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हरियाणा में अनुसूचित जातियों पर अत्याचार पर गंभीर नहीं अफसर, फाइलें विभागों में फांक रहीं धूल

Thu, 16 Jul 2020 11:02 AM IST
खुशबू गोयल प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 16 Jul 2020 11:02 AM IST
सार

  • विधानसभा कमेटी ने मांगी रिपोर्ट, आधी-अधूरी जानकारी लेकर पहुंचे एसपी
  • दुष्कर्म, हत्या की क्षतिपूर्ति की फाइलें विभागों में धूल फांक रहीं
  • हिसार, भिवानी और चरखी दादरी के एसपी अगली तारीख को बुलाए

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Haryana Administrative Officers Not Serious Regarding Crime Against Schedule Caste People
रिपोर्ट पर चर्चा करते अफसर - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

हरियाणा में अनुसूचित जातियों पर हो रहे अत्याचार को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। इस बात की पुष्टि उनके ढुलमुल रवैये से होती है। विधानसभा की एससी-बीसी कमेटी ने प्रदेश के अधिकारियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी तो एसपी आधी-अधूरी रिपोर्ट लेकर पहुंचे। बुधवार को करनाल, कुरुक्षेत्र और कैथल के एसपी कमेटी के सामने पेश हुए। उन्हें दोबारा से बुलाया गया है। इसके पहले पंचकूला और अंबाला के पुलिस अधिकारियों को बुलाया गया था।
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यह अधिकारी भी पूरी जानकारी लेकर नहीं पहुंचे थे। कमेटी ने इस मामले में दो सप्ताह का समय दिया है। अब अगली बार हिसार, भिवानी और चरखी दादरी के पुलिस अधीक्षकों को पेश होना है। रिपोर्ट में कमेटी को यह बताना होगा कि किस जिले में दलितों पर अत्याचार से संबंधित कितने मामले आए। यह मामले किस धारा के तहत दर्ज किए गए और कार्रवाई कितने मामलों में हुई। यह भी बताना होगा कि मामलों में सरकार की ओर से दिए जाने वाले मुआवजे की क्या स्थिति है।
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दस साल के आंकड़े मंगवाए
विधानसभा कमेटी ने पुलिस अधिकारियों से दस साल के आंकड़े मांगे, अधिकारी मात्र तीन साल के आंकड़े लेकर पहुंचे। ऐसे में उन्हें पिछले दस साल के आंकड़े लाने के लिए कहा है।
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अफसर मुझे नहीं बरगला सकते: चेयरमैन

कमेटी के चेयरमैन ईश्वर सिंह के मुताबिक, कैथल जिले में ही दुष्कर्म और हत्या से संबंधित करीब 40 मामलों की फाइलें धूल फांक रही हैं। ईश्वर सिंह का कहना है कि वह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य रह चुके हैं, लिहाजा अधिकारी उन्हें ऐसे मामलों में बरगला नहीं सकते।

यह आते हैं अपराध की श्रेणी में
आगजनी, दुष्कर्म, अपमानित करना, जातिसूचक शब्द कहना, दासी प्रथा, मैला ढोना, कब्जा करना, सामूहिक दुष्कर्म, बहिष्कार करना आदि।

मैंने पुलिस अधिकारियों से डिटेल रिपोर्ट मांगी है। एसपी आधी-अधूरी रिपोर्ट लेकर पहुंचे थे। मैंने उन्हें दो सप्ताह का समय दिया है।
- ईश्वर सिंह, अध्यक्ष, एससी-बीसी कमेटी
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