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भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से सटे गांवों में हैंडपंप से निकल रहा 'पीला जहर', खतरे में हैं कई जिंदगियां
Wed, 17 Jul 2019 11:48 AM IST
खुशबू गोयल
अनिल कुमार, अमर उजाला, सीमांत गांव चांदी वाला से (फिरोजपुर)
अनिल कुमार, अमर उजाला, सीमांत गांव चांदी वाला से (फिरोजपुर)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 17 Jul 2019 11:48 AM IST
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हैंडपंप से निकल रहा 'पीला जहर'
- फोटो : अमर उजाला
भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे पंजाब के सीमावर्ती गांवों के जिन हैंडपंपों से मीठा पानी पीने को मिलता था, उनमें से अब जहरीला पानी निकल रहा है। ये सब पाकिस्तान की चमड़ा फैक्ट्रियों की करामात है। पाक से भारत की तरफ बहने वाले सतलुज दरिया में फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त गंदा पानी 16 सालों से डाला जा रहा है।
यह पानी हुसैनीवाला बॉर्डर से भारत में प्रवेश करता है। इसके कारण हुसैनीवाला बॉर्डर से सटे लगभग 22 गांवों का भूजल पीने लायक नहीं रह गया है। स्थानीय गांवों के बुजुर्गों का कहना है 16 साल पहले हैंडपंपों का पानी ठंडा और मीठा होता था, लेकिन अब जहरीला हो चुका है। उनके घरों की पानी की टंकी में भरा हैंडपंप का पानी पीला है।
वह इस पानी से कपड़े धोने व नहाने को मजबूर हैं, जो बीमारियों का कारण है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अकेले गांव चांदी वाले की समस्या नहीं है, बल्कि हुसैनीवाला बॉर्डर से लेकर फाजिल्का तक फैली सरहद के साथ-साथ सीमांत गांवों का भी ये हाल है।
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यह पानी हुसैनीवाला बॉर्डर से भारत में प्रवेश करता है। इसके कारण हुसैनीवाला बॉर्डर से सटे लगभग 22 गांवों का भूजल पीने लायक नहीं रह गया है। स्थानीय गांवों के बुजुर्गों का कहना है 16 साल पहले हैंडपंपों का पानी ठंडा और मीठा होता था, लेकिन अब जहरीला हो चुका है। उनके घरों की पानी की टंकी में भरा हैंडपंप का पानी पीला है।
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वह इस पानी से कपड़े धोने व नहाने को मजबूर हैं, जो बीमारियों का कारण है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अकेले गांव चांदी वाले की समस्या नहीं है, बल्कि हुसैनीवाला बॉर्डर से लेकर फाजिल्का तक फैली सरहद के साथ-साथ सीमांत गांवों का भी ये हाल है।
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गांव चांदी वाला निवासी कश्मीर सिंह (70) व जोगिंदर सिंह (65) का कहना है कि वह बंटवारे के बाद से ही इसी गांव में रह रहे हैं। आज से 17 साल पहले हैंडपंपों का पानी मीठा और ठंडा था। 16 सालों से पाकिस्तान के कसूर स्थित चमड़ा फैक्ट्रियां केमिकल युक्त पानी सतलुज दरिया में लगातार डाल रही हैं।
पाक से भारत आ रहा जहरीला पानी यहां के भू-जल में मिल चुका है। कश्मीर सिंह ने बताया कि पहले जमीन के नीचे बीस फीट की गहराई पर मिलने वाला पानी मीठा व ठंडा होता था, लेकिन अब डेढ़ सौ फीट से नीचे भी पानी पीने लायक नहीं है। केमिकल युक्त पानी पीने से कई जलजीव भी मर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वह हैंडपंप के पानी से टंकी भरते हैं, तो पानी के ऊपर पीले रंग की झाग बन जाती है। उन्हें वाटर वर्क्स से पानी की सप्लाई मुहैया करवाई जाती है, जो पूरी नहीं मिलती है। पिछले दो दिन से तो वाटर वर्क्स से भी पानी की सप्लाई नहीं दी गई है, ऐसे में वह बाजार से पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं।
कोई भी राजनीतिक नेता व अधिकारी उनकी इस समस्या पर ध्यान नहीं देता है। प्रदूषित पानी के जरिए ग्रामीणों को चमड़ी रोग के अलावा दांतों व हड्डियों से संबंधित बीमारियां हो रही हैं।
पाक से भारत आ रहा जहरीला पानी यहां के भू-जल में मिल चुका है। कश्मीर सिंह ने बताया कि पहले जमीन के नीचे बीस फीट की गहराई पर मिलने वाला पानी मीठा व ठंडा होता था, लेकिन अब डेढ़ सौ फीट से नीचे भी पानी पीने लायक नहीं है। केमिकल युक्त पानी पीने से कई जलजीव भी मर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वह हैंडपंप के पानी से टंकी भरते हैं, तो पानी के ऊपर पीले रंग की झाग बन जाती है। उन्हें वाटर वर्क्स से पानी की सप्लाई मुहैया करवाई जाती है, जो पूरी नहीं मिलती है। पिछले दो दिन से तो वाटर वर्क्स से भी पानी की सप्लाई नहीं दी गई है, ऐसे में वह बाजार से पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं।
कोई भी राजनीतिक नेता व अधिकारी उनकी इस समस्या पर ध्यान नहीं देता है। प्रदूषित पानी के जरिए ग्रामीणों को चमड़ी रोग के अलावा दांतों व हड्डियों से संबंधित बीमारियां हो रही हैं।