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गणतंत्र के प्रहरी: डीसी ऑफिस में आने वालों के फार्म मुफ्त भरते हैं दिव्यांग संजीव, 20 साल से कर रहे सेवा

Fri, 26 Jan 2024 09:34 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 26 Jan 2024 09:34 AM IST
सार

चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित डीसी ऑफिस में बैठने वाले 42 साल के संजीव कुमार का एक हाथ और एक पैर खराब है। वे पिछले बीस साल से लगातार डीसी दफ्तर में आने वाले लोगों की मदद कर रहे हैं। इस काम की वे कोई फीस नहीं लेते, जो अपनी खुशी से कुछ दे देता है, उसे रख लेते हैं। 

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Handicapped Sanjeev Kumar helping people near DC office in Chandigarh for last 20 years
लोगों की मदद करते संजीव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

42 वर्ष के संजीव कुमार पिछले करीब 20 साल से चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित डीसी ऑफिस के पास लोगों की मदद कर रहे हैं। वो जरूरतमंद लोगों के पेंशन और राशन कार्ड के फॉर्म भरते हैं। इसके लिए उनकी कोई तय फीस नहीं है, जो कोई उन्हें जो देता है, वो स्वीकार कर लेते हैं।
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मेहमाननवाजी ऐसी कि जो भी उनके पास आता है, उसे चाय पिलाए बिना नहीं भेजते। संजीव एक हाथ और एक पैर से दिव्यांग हैं लेकिन उनके जज्बे और हिम्मत के आसपास के सभी लोग फैन हैं।
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सेक्टर-45डी में रहने वाले संजीव कुमार वैश ने बताया कि बचपन में ही उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद से वह अपने भाई के साथ रह रहे हैं। एक बार वह किसी के साथ डीसी ऑफिस आए थे। 
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उन्होंने देखा कि एक बुजुर्ग महिला पिछले काफी समय से हाथ में कागज लिए इधर-उधर घूम रही थी। करीब एक घंटे बाद महिला उनके पास आई और फॉर्म भरने की बात कही। उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने किसी तरह वह फॉर्म भर दिया। इसके बाद महिला ने उन्हें 20 रुपये थमा दिए। संजीव ने बताया कि उन्होंने पैसे लेने से मना कर दिया लेकिन महिला ने कहा कि वह यह पैसे खुशी से दे रही हैं कि उन्होंने कठिन समय में मदद की। यह देख उनके दोस्त ने कहा कि यह काम के साथ मानव सेवा का भी जरिया है। तब से ही वह डीसी ऑफिस के पास फोटोस्टेट की मशीन के करीब बैठते हैं और लोगों की मदद कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि फॉर्म भरने के बाद उन्हें, जो भी पैसे देते हैं वो रख लेते हैं। बहुत से गरीब लोग भी आते हैं। कई लोगों के पास वापस जाने के पैसे तक नहीं होते। ऐसे में उन्होंने कई लोगों को घर जाने के लिए पैसे दिए हैं। जो कोई भी दूर से आता है, उन्हें चाय पिलाए बगैर नहीं भेजते। उन्होंने कहा कि आज के समय में गलत रास्ते बताने वाले बहुत लोग हैं, लेकिन कोई सही रास्ता बताने को तैयार नहीं है। ऐसे में उनके पास जो भी आता है, उसे वह सही राह दिखाते हैं। जरूरत पड़ने पर खुद भी साथ चले जाते हैं ताकि बुजुर्गों को भटकना न पड़े।

एक हाथ-एक पैर खराब, नहीं की शादी
संजीव ने बताया कि बचपन से ही उनका एक हाथ और एक पैर खराब है। माता-पिता हैं नहीं, इसलिए उन्होंने शादी नहीं की। जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है लेकिन फिर भी कभी हिम्मत नहीं हारे। वह अकेले हैं। जरूरतें और खर्च कम है, इसलिए जितना भी जो लोग पैसे दे जाते हैं, उससे गुजारा चल रहा है। 

उन्होंने कहा कि अब डीसी ऑफिस के आसपास के लोग ही परिवार जैसे हैं और वैसा ही रिश्ता बन गया है। दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी सुबह-सुबह उनसे मिलकर जाते हैं। जो भी एक बार उनके पास आ जाता है, वह कभी गलत रास्ते नहीं जाता और उनका काम भी नियमों के अनुसार हो जाता है। 


संजीव कुमार ने बताया कि वर्ष 2018 में चंडीगढ़ प्रशासन ने ज्यादातर फॉर्म ऑनलाइन कर दिए। इसकी वजह से उनके काम पर काफी फर्क पड़ा। पहले रोजाना जो 10 से 20 फॉर्म भरते थे, अब वह 5 से 6 फॉर्म भर रहे हैं लेकिन अभी भी जिन लोगों का उन पर विश्वास है, वह उनसे ही फॉर्म भरवाने आते हैं।
 
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