राम रहीम की उम्मीदों को झटका, जेल से बाहर आने का प्रयास नाकाम, पैरोल अर्जी ली वापस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साध्वी यौन शोषण और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या में रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम ने अपनी पैरोल अर्जी वापस ले ली है। इसकी पुष्टि सिरसा के एसपी अरुण सिंह ने की है। हालांकि, अर्जी वापस लेने के कारणों का खुलासा नहीं किया गया। माना जा रहा है कि चौतरफा विरोध के बाद अर्जी वापस लेने का फैसला लिया गया है।
पैरोल मांगने का मामला सामने आने के बाद से प्रदेश की राजनीति गर्मा गई थी। राज्य सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे थे। छत्रपति के परिवार सहित अन्य सामाजिक संगठन और कई वकील तक राम रहीम को पैरोल देने का विरोध कर रहे थे। बता दें कि सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम ने 18 जून को कृषि कार्य के लिए पैरोल मांगी थी।
रोहतक जेल अधीक्षक को आवेदन देकर 42 दिन की खेती के लिए पैरोल देने की मांग की थी। इस संबंध में जेल प्रशासन ने सिरसा जिला प्रशासन से सिफारिश मांगी थी। साथ ही राम रहीम की कृषि योग्य जमीन का विवरण मांगा था। सिरसा प्रशासन ने राजस्व विभाग से डेरा प्रमुख की कृषि योग्य भूमि के मालिकाना हक की रिपोर्ट तलब की थी।
पहले तहसील कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट पुलिस विभाग को सौंपी थी, उसमें डेरा प्रमुख की व्यक्तिगत मालिकाना हक की भूमि न होने का हवाला दिया। लेकिन पुलिस विभाग इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ। क्योंकि राम रहीम डेरा सच्चा सौदा के ट्रस्ट के अधीन आने वाली भूमि पर काश्तकार है। सोमवार को एसपी अरुण सिंह ने बताया कि डेरा प्रमुख ने अपनी पैरोल की अर्जी वापस ले ली है।
पैरोल के विरोध में रामचंद्र छत्रपति के परिजनों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन
गुरमीत राम रहीम को पैरोल न देने के मामले में सोमवार को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के परिजनों और कुछ लोगों ने एडवोकेट रणजीत भांबू की अध्यक्षता में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। एडवोकेट भांबू ने कहा कि डेरा मुखी को पैरोल नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दो साल पहले राम रहीम की गिरफ्तारी के समय सिरसा का आर्थिक नुकसान हुआ था।
शहर में आतंक का माहौल बन गया था। छत्रपति के भतीजे रूप कुमार ने कहा कि अगर डेरा मुखी को पैरोल मिलती है तो उनके परिवार को भी जान का खतरा है। अगर वह एक बार बाहर आ गया तो कभी वापस जेल नहीं जाएगा। इस पर उपायुक्त ने कहा कि यह मामला अभी विचाराधीन है।