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बड़ा ऐलानः मांगें न मानी तो आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे गेस्ट टीचर्स

Sun, 03 Apr 2016 11:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 03 Apr 2016 11:28 AM IST
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हरियाणा गेस्ट टीचर्स का विवाद - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के सरकारी स्कूलों से 31 मार्च को नौकरी से हटाए जा चुके 3581 गेस्ट टीचरों ने रोजगार के लिए प्रदेश सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। शनिवार को हिसार जिले में गेस्ट टीचरों ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि दो सरकारी स्कूलों में ताला भी लगा दिया गया। गेस्ट टीचर एसोसिएशन के पदाधिकारी अजय लोहान ने बताया कि एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिलने का समय मांगा है।
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संभवत: शिक्षा मंत्री ने शनिवार देर रात को ही महेंद्रगढ़ में मुलाकात हो जाएगी, जबकि मुख्यमंत्री से रविवार को मुलाकात संभव है। उन्होंने कहा कि गेस्ट टीचर दस साल से अधिक समय तक नौकरी करने के बाद बेरोजगार कर दिए गए हैं। अब गेस्ट टीचरों के पास बचाने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए सरकार से होने वाली बातचीत दो-टूक की जाएगी और किसी आश्वासन के फेर में नहीं पड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने यदि उन्हें नौकरी पर नहीं लिया तो इस बार पूरे प्रदेश में आक्रामक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा गेस्ट टीचरों की याचिका खारिज कर दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने जाटों को आरक्षण देते समय क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले की परवाह की है? लोहान ने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले उन्हें पक्की नौकरी का वादा किया था। सरकार बनने के बाद भाजपा को अपना वादा निभाना चाहिए। प्रदेश सरकार ने पिछले साल जून माह में गेस्ट टीचरों को सरप्लस बताते हुए नौकरी से हटा दिया था।
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इसके बाद शुरू हुए आंदोलन को देखते हुए सरकार ने हाईकोर्ट में टीचरों की कमी और बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए गेस्ट टीचरों को फिर से नौकरी पर लेने की अनुमति मांगी थी। तब हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि गेस्ट टीचरों को 31 मार्च, 2016 तक नौकरी पर रख लिया जाए और इस अवधि के दौरान सरकार टीचरों की नियमित भरती कर ले। 31 मार्च को प्रदेश सरकार ने गेस्ट टीचरों को तो नौकरी से हटा दिया, लेकिन अब तक नियमित टीचरों की भरती की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।


सरकार ने 8394 पीजीटी व टीजीटी की भरती के लिए विज्ञापन भी निकाला है और करीब डेढ़ लाख युवाओं ने आवेदन भी किए हैं, लेकिन भरती का काम पूरा नहीं हुआ है। इस बीच, नौकरी से हटाए गए गेस्ट टीचरों ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन दोनों ही अदालतों से उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी। अब गेस्ट टीचर प्रदेश सरकार से आखिरी उम्मीद लेकर मिलेंगे।
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