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जीएसटी ने रोकी डस्टबिन की सप्लाई, रेट बढ़ने के कारण कंपनी ने नहीं भेजे
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 17 Jul 2017 09:20 AM IST
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Chandigarh Dustbin
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एक तरफ जहां निगम की ओर से सूखे और गीले कूड़े के लिए अलग-अलग बांटे गए डस्टबिन साइज को लेकर सवालों में घेरे में थे, वहीं अब अब जीएसटी के बाद इनकी सप्लाई ही बंद हो गई है।
डस्टबिन मुहैया करवाने वाली कंपनी के अनुसार जीएसटी लागू होने से डस्टबिन महंगे हो गए हैं। ट्रांसपोर्ट सर्विस पर भी जीएसटी लग गया है, इसलिए पुराने रेट पर कंपनी डस्टबिन की सप्लाई नहीं कर रही। फिलहाल शहर में डस्टबिन बांटने की मुहिम ठप पड़ गई है। अभी तक निगम की यह योजना सफल नहीं हो पा रही है। निगम ने अधूरी तैयारी के साथ इसे लागू कर दिया है। सेक्टरों में रहने वाले लोग इन डस्टबिनों की उपयोगिता पर भी सवाल उठा रहे हैं। अब तक निगम की ओर से बांटे गए डस्टबिनों का प्रयोग भी लोग अन्य कामों में ही कर रहे हैं।
साढ़े चार लाख से ज्यादा डस्टबिन बांटने की है योजना
अब तक अलग-अलग क्वालिटी के 90 हजार डस्टबिन आए हैं। इन पर पार्षद भी सवाल उठा रहे हैं। शहर में दो लाख 35 हजार घरों के लिए चार लाख 70 हजार डस्टबिन बांटने की योजना है पर डेढ़ माह में 50 हजार नीले और हरे रंग के डस्टबिन ही बांटे गए हैं। इस पर निगम की ओर से सवा दो करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है।
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कर्मचारियों को अलग-अलग कूड़ा एकत्रित को नहीं दिए डस्टबिन
5 जून को शुरू हुई इस स्कीम के तहत डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने वाले कर्मचारियों को अलग अलग कचरा लेने के लिए डस्टबिन नहीं बांटे गए हैं, जबकि उन्हें 40-40 लीटर के चार डस्टबिन नीले और हरे रंग के देने की घोषणा की गई थी। ऐसे में लोगों का कहना है कि वह अलग-अलग कचरा इकट्ठा कर रहे हैं जबकि कर्मचारी एक ही डस्टबिन में ही कचरा डाल रहे हैं। ऐसे में इस स्कीम का कोई फायदा नहीं हुआ। टेंडर के अनुसार, छह जुलाई तक दो लाख 35 हजार घरों के लिए डस्टबिन आ जाने चाहिए थे।
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डस्टबिन मुहैया करवाने वाली कंपनी के अनुसार जीएसटी लागू होने से डस्टबिन महंगे हो गए हैं। ट्रांसपोर्ट सर्विस पर भी जीएसटी लग गया है, इसलिए पुराने रेट पर कंपनी डस्टबिन की सप्लाई नहीं कर रही। फिलहाल शहर में डस्टबिन बांटने की मुहिम ठप पड़ गई है। अभी तक निगम की यह योजना सफल नहीं हो पा रही है। निगम ने अधूरी तैयारी के साथ इसे लागू कर दिया है। सेक्टरों में रहने वाले लोग इन डस्टबिनों की उपयोगिता पर भी सवाल उठा रहे हैं। अब तक निगम की ओर से बांटे गए डस्टबिनों का प्रयोग भी लोग अन्य कामों में ही कर रहे हैं।
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साढ़े चार लाख से ज्यादा डस्टबिन बांटने की है योजना
अब तक अलग-अलग क्वालिटी के 90 हजार डस्टबिन आए हैं। इन पर पार्षद भी सवाल उठा रहे हैं। शहर में दो लाख 35 हजार घरों के लिए चार लाख 70 हजार डस्टबिन बांटने की योजना है पर डेढ़ माह में 50 हजार नीले और हरे रंग के डस्टबिन ही बांटे गए हैं। इस पर निगम की ओर से सवा दो करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है।
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कर्मचारियों को अलग-अलग कूड़ा एकत्रित को नहीं दिए डस्टबिन
5 जून को शुरू हुई इस स्कीम के तहत डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने वाले कर्मचारियों को अलग अलग कचरा लेने के लिए डस्टबिन नहीं बांटे गए हैं, जबकि उन्हें 40-40 लीटर के चार डस्टबिन नीले और हरे रंग के देने की घोषणा की गई थी। ऐसे में लोगों का कहना है कि वह अलग-अलग कचरा इकट्ठा कर रहे हैं जबकि कर्मचारी एक ही डस्टबिन में ही कचरा डाल रहे हैं। ऐसे में इस स्कीम का कोई फायदा नहीं हुआ। टेंडर के अनुसार, छह जुलाई तक दो लाख 35 हजार घरों के लिए डस्टबिन आ जाने चाहिए थे।
आकार छोटा, ढक्कन भी नहीं, क्वालिटी घटिया
आकार छोटा, ढक्कन भी नहीं, क्वालिटी घटिया
गाड़ी धोने और पौधे लगाने के काम आ रहे डस्टबिन
सेक्टरों में जिन लोगों को डस्टबिन बांटे गए हैं, उनमें से कई लोग इसका प्रयोग दूसरे कामों के लिए कर रहे हैं। कोई इसका प्रयोग गाड़ी धोने के लिए कर रहा है तो किसी ने पौधे लगा दिए हैं। कुछ लोग घर में साफ-सफाई के लिए इसका प्रयोग कर रहे हैं।
आकार छोटा, ढक्कन भी नहीं, क्वालिटी घटिया
सेक्टर-21 निवासी एवं युवा इनोवेटिव सोसाइटी के चेयरमैन सचिन शर्मा का कहना है कि किसी किसी को ही डस्टबिन मिल रहे हैं। वैसे भी बांटे गए डस्टबिन की क्वालिटी घटिया है। जिन लोगों को बांटे भी गए हैं, वह उसमें कचरा नहीं डाल रहे, उनके ऊपर ढक्कन भी नहीं है। डस्टबिन का साइज काफी छोटा है। यह डस्टबिन तो चंद घंटों में ही भर जाएगा।
भाजपा के पार्षद भी उठा रहे सवाल
डस्टबिन की गुणवत्ता पर भाजपा पार्षद ही सवाल उठा रहे हैं। पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि अब तक तीन बार अलग-अलग सप्लाई आई है और हर सप्लाई में आए डस्टबिन की क्वालिटी में फर्क है। इसकी जानकारी मेयर और अधिकारियों को दी गई है। डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने वाले कर्मचारियों को जो 40-40 लीटर के डस्टबिन बांटने थे, वह अब तक नहीं बांटे गए हैं। ऐसे में जिन लोगों को डस्टबिन बांटे गए हैं वह सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा कर रहे हैं, लेकिन कर्मचारी उसे एक ही डस्टबिन में लेकर जा रहे हैं। सहज सफाई केंद्रों में भी सूखा और गीला कचरा इकट्ठा करने के लिए 450 क्यूबी मीटर के डस्टबिन रखने थे, लेकिन वह नहीं रखे गए हैं।
अलग कचरा क्यों इकट्ठा करना चाहता है निगम
स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए गीला और सूखा कचरा अलग अलग इकट्ठा करने के लिए जरूरी है, ताकि इसे अलग-अलग प्रोसेस किया जा सके। हाल ही में जो स्वच्छ सर्वेक्षण हुआ है, उसमें चंडीगढ़ दूसरे स्थान से खिसककर 11वें नंबर पर पहुंच गया। अलग अलग कचरा इकट्ठा करने में चंडीगढ़ के नंबर शून्य थे। गीला कचरे से खाद बनाई जा सकती है।
सेक्टरों में जिन लोगों को डस्टबिन बांटे गए हैं, उनमें से कई लोग इसका प्रयोग दूसरे कामों के लिए कर रहे हैं। कोई इसका प्रयोग गाड़ी धोने के लिए कर रहा है तो किसी ने पौधे लगा दिए हैं। कुछ लोग घर में साफ-सफाई के लिए इसका प्रयोग कर रहे हैं।
आकार छोटा, ढक्कन भी नहीं, क्वालिटी घटिया
सेक्टर-21 निवासी एवं युवा इनोवेटिव सोसाइटी के चेयरमैन सचिन शर्मा का कहना है कि किसी किसी को ही डस्टबिन मिल रहे हैं। वैसे भी बांटे गए डस्टबिन की क्वालिटी घटिया है। जिन लोगों को बांटे भी गए हैं, वह उसमें कचरा नहीं डाल रहे, उनके ऊपर ढक्कन भी नहीं है। डस्टबिन का साइज काफी छोटा है। यह डस्टबिन तो चंद घंटों में ही भर जाएगा।
भाजपा के पार्षद भी उठा रहे सवाल
डस्टबिन की गुणवत्ता पर भाजपा पार्षद ही सवाल उठा रहे हैं। पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि अब तक तीन बार अलग-अलग सप्लाई आई है और हर सप्लाई में आए डस्टबिन की क्वालिटी में फर्क है। इसकी जानकारी मेयर और अधिकारियों को दी गई है। डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने वाले कर्मचारियों को जो 40-40 लीटर के डस्टबिन बांटने थे, वह अब तक नहीं बांटे गए हैं। ऐसे में जिन लोगों को डस्टबिन बांटे गए हैं वह सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा कर रहे हैं, लेकिन कर्मचारी उसे एक ही डस्टबिन में लेकर जा रहे हैं। सहज सफाई केंद्रों में भी सूखा और गीला कचरा इकट्ठा करने के लिए 450 क्यूबी मीटर के डस्टबिन रखने थे, लेकिन वह नहीं रखे गए हैं।
अलग कचरा क्यों इकट्ठा करना चाहता है निगम
स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए गीला और सूखा कचरा अलग अलग इकट्ठा करने के लिए जरूरी है, ताकि इसे अलग-अलग प्रोसेस किया जा सके। हाल ही में जो स्वच्छ सर्वेक्षण हुआ है, उसमें चंडीगढ़ दूसरे स्थान से खिसककर 11वें नंबर पर पहुंच गया। अलग अलग कचरा इकट्ठा करने में चंडीगढ़ के नंबर शून्य थे। गीला कचरे से खाद बनाई जा सकती है।
एक घर में दो बार बंट गए डस्टबिन
Municipal Corporation office Chandigarh
- फोटो : File Photo
एक घर में दो बार बंट गए डस्टबिन
निगम द्वारा डस्टबिन बांटने के समय वार्ड पार्षद भी मौजूद रहते हैं। सेक्टर-40 में भाजपा कार्यकर्ता भी डस्टबिन बांट रहे हैं। इस वार्ड की पार्षद गुरबख्श रावत हैं। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में भाजपा कार्यकर्ता भी डस्टबिन बांट रहे हैं। ऐसे में उन्हाेंने उन घरों में भी बांट दिए, जहां वह पहले बांट चुकी हैं।
डस्टबिन खरीदने से पहले डस्टबिन के साइज को लेकर नगर निगम को लोगों से सुझाव लेने चाहिए थे। ऐसे डस्टबिन का कोई फायदा नहीं है जिसमें न तो हैंडल हैं और न ढक्कन। यह एक फ्लाप शो है। सेक्टर-21 के कम्युनिटी सेंटर में डस्टबिन भरे हुए हैं। नगर निगम सिर्फ इन पर राशि खर्च करके पैसे की बर्बादी की है।
- बलजिंदर सिंह बिट्टू, चेयरमैन, फॉसवेक।
मेरे वार्ड के निवासी बांटे जा रहे डस्टबिन पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों ने इनका प्रयोग करने से मना कर दिया है। कई लोगों ने कहा कि सूखा और गीला कचरा रखने के लिए वह अलग से बड़े साइज के डस्टबिन खरीदेंगे। जबकि इनका प्रयोग किसी और काम के लिए कर लिया जाएगा। ऐसे डस्टबिन बांटने का कोई फायदा नहीं है। यहां तक की कारें धोने के लिए भी डस्टबिन का प्रयोग किया जा रहा है।
- देवेंद्र सिंह बबला, कांग्रेस पार्षद।
हमारे कर्मचारी सहयोग देने को तैयार हैं, लेकिन अब तक किसी को न तो रेहड़ी और न ही अलग अलग कचरा डालने के लिए डस्टबिन मिले हैं। जब पूरे डस्टबिन आ जाते, तब बांटने चाहिए थे।
-ओम प्रकाश सैनी, चेयरमैन, डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन सोसाइटी।
जल्द मामले को सुलझा लिया जाएगा
जीएसटी लागू होने से कंपनी ने डस्टबिन की सप्लाई रोक दी है। पुराने रेट पर कंपनी डस्टबिन की सप्लाई नहीं कर रही है। जल्द ही इस मामले को सुलझा लिया जाएगा और डस्टबिन की सप्लाई शुरू हो जाएगी। डस्टबिन के साइज को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उसकी गुणवत्ता की जांच की जा रही है। लोगों में अलग-अलग गीला और सूखा कचरा इकट्ठा करने की आदत डालने के लिए निगम की ओर से डस्टबिन बांटे जा रहे हैं। - आशा जसवाल, मेयर।
निगम द्वारा डस्टबिन बांटने के समय वार्ड पार्षद भी मौजूद रहते हैं। सेक्टर-40 में भाजपा कार्यकर्ता भी डस्टबिन बांट रहे हैं। इस वार्ड की पार्षद गुरबख्श रावत हैं। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में भाजपा कार्यकर्ता भी डस्टबिन बांट रहे हैं। ऐसे में उन्हाेंने उन घरों में भी बांट दिए, जहां वह पहले बांट चुकी हैं।
डस्टबिन खरीदने से पहले डस्टबिन के साइज को लेकर नगर निगम को लोगों से सुझाव लेने चाहिए थे। ऐसे डस्टबिन का कोई फायदा नहीं है जिसमें न तो हैंडल हैं और न ढक्कन। यह एक फ्लाप शो है। सेक्टर-21 के कम्युनिटी सेंटर में डस्टबिन भरे हुए हैं। नगर निगम सिर्फ इन पर राशि खर्च करके पैसे की बर्बादी की है।
- बलजिंदर सिंह बिट्टू, चेयरमैन, फॉसवेक।
मेरे वार्ड के निवासी बांटे जा रहे डस्टबिन पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों ने इनका प्रयोग करने से मना कर दिया है। कई लोगों ने कहा कि सूखा और गीला कचरा रखने के लिए वह अलग से बड़े साइज के डस्टबिन खरीदेंगे। जबकि इनका प्रयोग किसी और काम के लिए कर लिया जाएगा। ऐसे डस्टबिन बांटने का कोई फायदा नहीं है। यहां तक की कारें धोने के लिए भी डस्टबिन का प्रयोग किया जा रहा है।
- देवेंद्र सिंह बबला, कांग्रेस पार्षद।
हमारे कर्मचारी सहयोग देने को तैयार हैं, लेकिन अब तक किसी को न तो रेहड़ी और न ही अलग अलग कचरा डालने के लिए डस्टबिन मिले हैं। जब पूरे डस्टबिन आ जाते, तब बांटने चाहिए थे।
-ओम प्रकाश सैनी, चेयरमैन, डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन सोसाइटी।
जल्द मामले को सुलझा लिया जाएगा
जीएसटी लागू होने से कंपनी ने डस्टबिन की सप्लाई रोक दी है। पुराने रेट पर कंपनी डस्टबिन की सप्लाई नहीं कर रही है। जल्द ही इस मामले को सुलझा लिया जाएगा और डस्टबिन की सप्लाई शुरू हो जाएगी। डस्टबिन के साइज को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उसकी गुणवत्ता की जांच की जा रही है। लोगों में अलग-अलग गीला और सूखा कचरा इकट्ठा करने की आदत डालने के लिए निगम की ओर से डस्टबिन बांटे जा रहे हैं। - आशा जसवाल, मेयर।