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अपने ही ढाते हैं बच्चों पर जुल्म, उड़ाते हैं विश्वास की धज्जियां, जानिए क्या करें?

Thu, 12 Oct 2017 01:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 12 Oct 2017 01:41 PM IST
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ground report on child labour, child abusing, child exploitation, sexual harassment
बाल मजदूरी
बच्चे उसी की ओर हाथ बढ़ाते हैं, जिनपर उनका विश्वास जागता है। बच्चे बहुत ही तरल मानसिकता पर खड़े होते हैं, थोड़ा सा प्यार देने पर आपकी ओर कदम बढ़ा लेते हैं। इनकी खुशियां एक टॉफी या स्नेह से बढ़े हाथ तक ही सीमित होती हैं। लेकिन इनके लिए बढ़े बहुत सारे हाथ इनके विश्वास का गला घोंट रहे हैं। गला घोटने वाले भी कोई और नहीं, ज्यादातर मामलों में इनके अपने सगे-संबंधी, पारिवारिक सदस्य और बहुत करीबी रिश्तेदार।
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बाल शोषण के बढ़ते मामलों ने बच्चों के साथ होते विश्वासघात की परतें उधेड़ कर रख दी हैं। चंडीगढ़ में तो ऐसे अपराध सामने आए, जिन्होंने बचपन को बचाने की सभी योजनाओं पर सवालिया निशान लगा दिए। ट्राइसिटी में पिछले तीन साल में 400 से भी ज्यादा बाल शोषण के केस दर्ज हुए। अकेले चंडीगढ़ में 222 केस सामने आए हैं।
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चौंकाने वाला बात ये है कि ज्यादातर मामलों में अपने ही आरोपी पाए गए हैं। जिन पर बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही बचपन को बर्बाद कर दिया। नोबेल पीस अवार्डी कैलाश सत्यार्थी अब इस गंभीर समस्या के खिलाफ वीरवार को सुबह नौ बजे पंजाब यूनिवर्सिटी आएंगे और पीयू में पैदल मार्च के बाद लॉ आडिटोरियम में चंडीगढ़ के बचपन को बचाने के लोगों को जागरूक करेंगे।
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ज्यादातर स्कूलों में नही हैं काउंसिलर

ground report on child labour, child abusing, child exploitation, sexual harassment
demo pic
स्कूलों में गुड टच, बैड टच का पाठ पढ़ाने के लिए योजनाएं चल रही हैं। जबकि ज्यादातर स्कूलों में यह पाठ पढ़ाने के लिए काउंसिलर नहीं हैं। मंगलवार को भी गुड टच, बैड टच के पाठ के दौरान शोषण का मामला सामने आया। हालांकि केस एक निजी स्कूल का था। ज्यादातर सरकारी स्कूलों में काउंसिलर की सीटें खाली पड़ी हैं। कुछ काउंसिलरों को तनख्वाह नहीं मिली तो उन्होंने स्कूल छोड़ दिए।

बाल शोषण के ये आए गंभीर मामले...
- हाल ही में दस साल की बच्ची के साथ रेप का मामला सामने आया था। रेप का आरोपी बच्ची का मामा है। बच्ची ने एक बच्ची को भी जन्म दिया है।
- एक एनजीओ चलाने वाले जुल्फिकार खान ने उन्हीं बच्चों को शिकार बनाया, जिन्हें काबिल बनाने की उसने जिम्मेदारी उठाई थी।
- 2014 में बाल निकेतन में बच्चियों से यौन शोषण का मामला सामने आया था। दोषी वही कर्मचारी निकला, जिस पर उनकी सुरक्षा का जिम्मा था।

बचपन को बचाने के लिए इंतजाम...

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बाल मजदूर - फोटो : demo pic
- चंडीगढ़ में निजी संस्थाओं के अलावा एक सरकारी संस्था सीसीपीसीआर नौनिहालों के हित्त के लिए काम कर रही है। इसके अलावा अनाथ बच्चों के लिए प्रोटेक्शन होम भी बनाए गए हैं।
- 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन के अलावा पुलिस की महिला एवं बाल विंग को 1091 पर बच्चों के खिलाफ अपराध की सूचना दी जा सकती है।
- पंचकूला में बाल विकास विभाग, एंटी ट्रैफिकिंग टीमें बनी हुई हैं। शोषण का शिकार हो रहे बच्चों को बचाने के लिए कई बार रेड होती हैं, लेकिन अपराध के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।

सड़कों पर भटकने के लिए बचपन मजबूर
शहर के विभिन्न लाइट प्वाइंट्स, मार्केट, पार्किंग एरिया में अकसर गुब्बारे, खिलौने आदि बेचते हुए बच्चे देखे जा सकते हैं। यह सिर्फ ट्राइसिटी में ही नहीं, अन्य शहरों में भी हालात ऐसे ही हैं। इस तरह से बर्बाद हो रहे बचपन को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ दिन की गहमागहमी के बाद हालात फिर वही हो जाते हैं।

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बाल श्रम - फोटो : SELF
मां-बाप व्यस्त जिंदगी में बच्चों की जिम्मेदारी से दूर भाग रहे हैं। बच्चे आसानी से उनका शिकार बन रहे हैं, जिन पर वे विश्वास करते हैं। असल में ऐसे लोगों के लिए बच्चे सॉफ्ट टारगेट होते हैं। उन्हें लगता है कि किसी को पता नहीं चलेगा। अगर बच्चों की मानसिक स्थिति की बात करें तो पता चलता है कि वे सामाजिक और भावुक तौर पर भटक रहे हैं। क्योंकि मां-बाप केपास उनके लिए समय नहीं है और मोबाइल, इंटरनेट को बच्चों ने अपना बना लिया है।
- रोशन लाल, साइकलॉजी विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी

समय-समय पर स्कूल व अन्य संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। अगर सरकारी स्कूलों में काउंसिलर नहीं हैं, तो इस बारे में अधिकारियों से बात की जाएगी। नोबेल अवार्डी कैलाश सत्यार्थी की चंडीगढ़ प्रशासन केसाथ बैठक भी है। सभी मामले इस दौरान चर्चा केलिए रखे जाएंगे।
- हरजिंद्र कौर, चेयरपर्सन, चंडीगढ़ कमेटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट (सीसीपीसीआर)
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