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Ground Report : विकास से महरूम हैं हुसैनीवाला बॉर्डर के गांव, न है डाकखाना और न ही बैंक

Sun, 12 Mar 2023 06:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब
अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 12 Mar 2023 06:42 AM IST
सार

यहां दूर-दूर तक न स्कूल हैं और न ही अस्पताल। 22 गांवों में बैंक और डाकखाना तक नहीं है। सड़कों की स्थिति जर्जर है। ग्रामीणों से भारत-पाक के बीच हुए 1965 और 1971 के युद्ध की बात करें तो उनके चेहरों पर डर साफ दिखाई देने लगता है।

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Ground Report: Neither post office nor bank in the villages of Hussainiwala border
हुसैनीवाला बॉर्डर

विस्तार

हुसैनीवाला बॉर्डर से सटे गांव सात दशक बाद भी विकास में बहुत पीछे हैं। यहां दूर-दूर तक न स्कूल हैं और न ही अस्पताल। 22 गांवों में बैंक और डाकखाना तक नहीं है। सड़कों की स्थिति जर्जर है।

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ग्रामीणों से भारत-पाक के बीच हुए 1965 और 1971 के युद्ध की बात करें तो उनके चेहरों पर डर साफ दिखाई देने लगता है। उक्त दोनों युद्धों में ये लोग अपना बहुत कुछ खो बैठे हैं। जो खोया, वह आज तक वापस नहीं मिला। विकास तो दूर की कौड़ी दिखाई देता है। केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी इन्हें नहीं मिल रहा है। कारगिल युद्ध व सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान सीमा पर पैदा हुए तनाव के दौरान ये लोग बेघर हो गए थे।
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पाकिस्तान की चमड़ा फैक्ट्रियों ने भू-जल किया जहरीला
पाकिस्तान के कसूर में बनी चमड़ा फैक्ट्रियों से सतलुज नदी का पानी दूषित होने से यहां के गांवों का भू-जल जहरीला हो चुका है। विश्व बैंक की योजना के तहत वर्ष 2014 में गांव रहिमेके में एक वाटर वर्क्स लगा है। कुल तीन वाटर वर्क्स हैं। 22 सीमांत गांवों में साढ़े पंद्रह हजार से ज्यादा की आबादी है। ग्रामीणों को हर माह पानी का बिल 80 रुपये देना पड़ता है। 
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सीमावर्ती गांव भानेवाला निवासी तारा सिंह, हरबंस सिंह व हंसा सिंह ने बताया कि ज्यादातर लोगों के अनपढ़ रहने का मुख्य कारण यह भी है कि वर्ष 1973 में सरकारी स्कूल बनाया गया। आज भी 22 गांवों के लगभग 2021 परिवारों के बच्चों के लिए सात सरकारी प्राथमिक स्कूल, एक हाईस्कूल व एक सीनियर सेकेंड्री स्कूल है। कई स्कूलों में तो  एक या दो शिक्षक ही हैं। 

  • खुंदर गट्टी में एक हाईस्कूल है और गट्टी राजोके में सरकारी सीनियर सेकेंड्री स्कूल है। 22 गांवों में सिर्फ पांच लोग एमए पास हैं। 30 लोग बीए पास हैं। 

पाकिस्तानी सेना 71 की जंग के बाद सारा सामान ले गई 
गट्टी रहिमेके निवासी बुजुर्ग बलवीर सिंह का कहना है कि 1971 में पाकिस्तान के साथ 14 दिन तक युद्ध चला। लोगों को अपना सामान उठाने का मौका तक नहीं मिला। पाकिस्तान की फौज ने उनके गांवों पर कब्जा कर लिया था। जब दोनों देशों का समझौता हुआ तो पाकिस्तानी फौज यहां से सभी पौधे, घरों की ईंटें व उनका सामान तक ले गई थी। 

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