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Chandigarh News: अरावली की पहाड़ियों में अवैध खनन रोकने के लिए सरकार लाएगी एक्शन प्लान
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फरवरी तक तैयार होगी कार्य योजना, खनन से उजड़े क्षेत्रों को भी किया जाएगा पुनर्जीवित
यह कार्य योजना रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी के लिए भी लागू होगी
चंडीगढ़। अरावली व अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए हरियाणा सरकार एक कार्य योजना तैयार कर रही है। यह योजना अगले दो महीने में तैयार हो जाएगी। इसके तहत खनन वाले क्षेत्रों में ड्रोन तैनात करना, सैटेलाइट से निगरानी, सीसीटीवी कैमरे लगाना, टॉवर व चेक पोस्ट स्थापित करना शामिल हैं। साथ ही दशकों से अवैध खनन के कारण बर्बाद हुए क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने के लिए भी विशेष पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने बताया कि कार्य योजना को लेकर विभागों के साथ बैठक हो चुकी हैं। अगले डेढ़ से दो महीने में इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। यह प्लान अरावली के साथ रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी के लिए भी होगा।
उल्लेखनीय है कि 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह की पहाड़ियों पर खनन पर पूर्व प्रतिबंध लगा दिया था। मगर इसके बावजूद अवैध खनन जारी है। अवैध खनन रोकने में सरकार भी नाकाम रही। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने कई बार आवाज उठाई, मगर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा सके। यहां तक कि नूंह में एक डीएसपी को खनन माफिया ने अपने वाहन के नीचे कुचलकर मार दिया। लेकिन पहाड़ों को खोद-खोदकर खोखला करने का यह सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है। स्थानीय लोग और सामाजिक संस्थाओं ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दस्तक दी और खनन को रोकने की गुहार लगाई। एनजीटी ने कई सुनवाई में हरियाणा सरकार की दलील सुनने के बाद खनन को रोकने के लिए उठाए कदमों पर निराशा जताई और सख्त टिप्पणी की कि अधिकारी अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए उनके आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसके बाद हरियाणा सरकार ने अवैध खनन रोकने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की है। हाल ही विधानसभा में अवैध खनन रोकने के लिए जस्टिस एलएन मित्तल की एक रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें 12 से ज्यादा सुझाव दिए गए थे। कार्य योजना में इन सुझावों को भी शामिल किया जाएगा।
पर्याप्त स्टाफ न खनिज विभाग, न पुलिस के पास।
हरियाणा के अरावली क्षेत्र में अवैध खनन न रुकने की एक बड़ी वजह यह है कि पड़ोसी राज्य राजस्थान में खनन पर कोई रोक नहीं है। राजस्थान सीमा से माफिया घुसकर हरियाणा क्षेत्र में भी बेरोकटोक खनन को अंजाम देते हैं। दूसरी तरफ अवैध खनन को रोकने के लिए न तो खनिज विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ है और न पुलिस के पास। जस्टिस एलएन मित्तल ने इस दिशा में सरकार को सख्त कदम उठाने का सुझाव दिया है।
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स्टोन क्रशर में खनिज ले जाने वाले वाहन जीपीएस से लैस होंगे
अवैध खनन को पूरी तरह से रोकने के लिए स्टोन क्रशर में खनिज ले जाने वाले वाहनों पर निगरानी रखी जाएगी। इसके तहत गुरुग्राम, फरीदाबाद व नूंह में स्थित स्टोन क्रशर या स्क्रीनिंग प्लांटों तक सामग्री ले जाने वाले सभी वाहन फरवरी तक जीपीएस से लैस किए जाएंगे। इसके साथ ही जिन रास्तों से ये वाहन गुजरेंगे, वहां पर चेक प्वाइंट्स, रेडियो-फ्रीक्वेंसी व ट्रैकिंग सिस्टम से वाहनों पर निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए निगरानी कक्ष व स्टेशन भी स्थापित किए जाने हैं।
धूल व रेतीले तूफानों को रोकती हैं अरावली की पहाड़ियां
अरावली की पहाड़ियां खनिज, वनस्पति व जीवों से भरी हुई हैं। यह पहाड़ियां दिल्ली व हरियाणा के कुछ हिस्सों को धूल और रेतीले तूफानों से बचाती है। यदि यह पहाड़ियां न हो तो शहरों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। इसी वजह से लोग चिंतित भी हैं कि लगातार खनन से अरावली की पहाड़ियां खोखली जाएंगी। यदि यह पहाड़ियां नहीं रही तो लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
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यह कार्य योजना रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी के लिए भी लागू होगी
चंडीगढ़। अरावली व अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए हरियाणा सरकार एक कार्य योजना तैयार कर रही है। यह योजना अगले दो महीने में तैयार हो जाएगी। इसके तहत खनन वाले क्षेत्रों में ड्रोन तैनात करना, सैटेलाइट से निगरानी, सीसीटीवी कैमरे लगाना, टॉवर व चेक पोस्ट स्थापित करना शामिल हैं। साथ ही दशकों से अवैध खनन के कारण बर्बाद हुए क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने के लिए भी विशेष पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने बताया कि कार्य योजना को लेकर विभागों के साथ बैठक हो चुकी हैं। अगले डेढ़ से दो महीने में इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। यह प्लान अरावली के साथ रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी के लिए भी होगा।
उल्लेखनीय है कि 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह की पहाड़ियों पर खनन पर पूर्व प्रतिबंध लगा दिया था। मगर इसके बावजूद अवैध खनन जारी है। अवैध खनन रोकने में सरकार भी नाकाम रही। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने कई बार आवाज उठाई, मगर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा सके। यहां तक कि नूंह में एक डीएसपी को खनन माफिया ने अपने वाहन के नीचे कुचलकर मार दिया। लेकिन पहाड़ों को खोद-खोदकर खोखला करने का यह सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है। स्थानीय लोग और सामाजिक संस्थाओं ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दस्तक दी और खनन को रोकने की गुहार लगाई। एनजीटी ने कई सुनवाई में हरियाणा सरकार की दलील सुनने के बाद खनन को रोकने के लिए उठाए कदमों पर निराशा जताई और सख्त टिप्पणी की कि अधिकारी अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए उनके आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसके बाद हरियाणा सरकार ने अवैध खनन रोकने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की है। हाल ही विधानसभा में अवैध खनन रोकने के लिए जस्टिस एलएन मित्तल की एक रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें 12 से ज्यादा सुझाव दिए गए थे। कार्य योजना में इन सुझावों को भी शामिल किया जाएगा।
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पर्याप्त स्टाफ न खनिज विभाग, न पुलिस के पास।
हरियाणा के अरावली क्षेत्र में अवैध खनन न रुकने की एक बड़ी वजह यह है कि पड़ोसी राज्य राजस्थान में खनन पर कोई रोक नहीं है। राजस्थान सीमा से माफिया घुसकर हरियाणा क्षेत्र में भी बेरोकटोक खनन को अंजाम देते हैं। दूसरी तरफ अवैध खनन को रोकने के लिए न तो खनिज विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ है और न पुलिस के पास। जस्टिस एलएन मित्तल ने इस दिशा में सरकार को सख्त कदम उठाने का सुझाव दिया है।
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स्टोन क्रशर में खनिज ले जाने वाले वाहन जीपीएस से लैस होंगे
अवैध खनन को पूरी तरह से रोकने के लिए स्टोन क्रशर में खनिज ले जाने वाले वाहनों पर निगरानी रखी जाएगी। इसके तहत गुरुग्राम, फरीदाबाद व नूंह में स्थित स्टोन क्रशर या स्क्रीनिंग प्लांटों तक सामग्री ले जाने वाले सभी वाहन फरवरी तक जीपीएस से लैस किए जाएंगे। इसके साथ ही जिन रास्तों से ये वाहन गुजरेंगे, वहां पर चेक प्वाइंट्स, रेडियो-फ्रीक्वेंसी व ट्रैकिंग सिस्टम से वाहनों पर निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए निगरानी कक्ष व स्टेशन भी स्थापित किए जाने हैं।
धूल व रेतीले तूफानों को रोकती हैं अरावली की पहाड़ियां
अरावली की पहाड़ियां खनिज, वनस्पति व जीवों से भरी हुई हैं। यह पहाड़ियां दिल्ली व हरियाणा के कुछ हिस्सों को धूल और रेतीले तूफानों से बचाती है। यदि यह पहाड़ियां न हो तो शहरों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। इसी वजह से लोग चिंतित भी हैं कि लगातार खनन से अरावली की पहाड़ियां खोखली जाएंगी। यदि यह पहाड़ियां नहीं रही तो लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।