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Chandigarh News: फसल खरीद की तैयारियों में जुटी सरकार, 26 मार्च से सरसों और एक अप्रैल से गेहूं की होगी खरीद
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मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज ब्योरे अनुसार होगी खरीद
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने रबी सीजन 2024-25 को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेश में सरसों की खरीद 26 मार्च से और गेहूं, चना व जौ की खरीद एक अप्रैल से शुरू होगी। सरसों के लिए 5650 रुपये, गेहूं के लिए 2275 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया गया है। इस बार भी फसल खरीद का भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में किया जाएगा। इसके लिए पहले से ही 7300 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।
सरकार की तरफ से सरसों की सरकारी खरीद की जिम्मेदारी हैफेड और हरियाणा भंडारण निगम की दी गई है। सरसों के लिए 106 मंडियां, खरीद केंद्र बनाए हैं। इस बार मंडियों में 14.28 लाख मीट्रिक टन आवक होने की संभावना हैं। गौर हो कि 2022-23 में 3.17 लाख मीट्रिक टन और 2023-24 में 6.83 लाख मीट्रिक टन आवक हुई थी। गेहूं की खरीद के लिए 417 मंडियां व खरीद केंद्र बनाए हैं। इस बार 112.14 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उत्पादन होने की संभावना हैं।
बता दें कि फसल खरीद मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज डाटा के आधार पर की जाएगी। इस पोर्टल पर सरसों के लिए 4,74,768 किसानों ने 18,06,326 एकड़ भूमि का पंजीकरण करवाया है। साथ ही गेहूं के लिए 7,82,921 किसानों ने 41,64,324 एकड़ भूमि का पंजीकरण करवाया है। हालांकि, डाटा मिसमैच होने से खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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जल्द सरसों की खरीद शुरू करे और बकाया मुआवजा दे सरकार : हुड्डा
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से जल्द सरसों की खरीद शुरू करने और किसानों को बकाया मुआवजा देने की मांग उठाई है। हुड्डा का कहना है कि मंडियों में फसल की आवक शुरू हो चुकी है। लेकिन सरकार 26 मार्च से खरीद शुरू करने की बात कह रही है, जबकि तैयारियों को देखकर यह भी होता संभव नजर नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पार्टल पर 9.25 लाख किसानों ने 61.45 लाख एकड़ का पंजीकरण करवाया है। लेकिन इसमें से 10.40 लाख एकड़ रकबे का रिकॉर्ड मिसमैच है। जब तक यह खामी दूर नहीं होती, तब तक सरकार किसानों की फसल नहीं खरीदेगी।
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने रबी सीजन 2024-25 को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेश में सरसों की खरीद 26 मार्च से और गेहूं, चना व जौ की खरीद एक अप्रैल से शुरू होगी। सरसों के लिए 5650 रुपये, गेहूं के लिए 2275 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया गया है। इस बार भी फसल खरीद का भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में किया जाएगा। इसके लिए पहले से ही 7300 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।
सरकार की तरफ से सरसों की सरकारी खरीद की जिम्मेदारी हैफेड और हरियाणा भंडारण निगम की दी गई है। सरसों के लिए 106 मंडियां, खरीद केंद्र बनाए हैं। इस बार मंडियों में 14.28 लाख मीट्रिक टन आवक होने की संभावना हैं। गौर हो कि 2022-23 में 3.17 लाख मीट्रिक टन और 2023-24 में 6.83 लाख मीट्रिक टन आवक हुई थी। गेहूं की खरीद के लिए 417 मंडियां व खरीद केंद्र बनाए हैं। इस बार 112.14 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उत्पादन होने की संभावना हैं।
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बता दें कि फसल खरीद मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज डाटा के आधार पर की जाएगी। इस पोर्टल पर सरसों के लिए 4,74,768 किसानों ने 18,06,326 एकड़ भूमि का पंजीकरण करवाया है। साथ ही गेहूं के लिए 7,82,921 किसानों ने 41,64,324 एकड़ भूमि का पंजीकरण करवाया है। हालांकि, डाटा मिसमैच होने से खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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जल्द सरसों की खरीद शुरू करे और बकाया मुआवजा दे सरकार : हुड्डा
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से जल्द सरसों की खरीद शुरू करने और किसानों को बकाया मुआवजा देने की मांग उठाई है। हुड्डा का कहना है कि मंडियों में फसल की आवक शुरू हो चुकी है। लेकिन सरकार 26 मार्च से खरीद शुरू करने की बात कह रही है, जबकि तैयारियों को देखकर यह भी होता संभव नजर नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पार्टल पर 9.25 लाख किसानों ने 61.45 लाख एकड़ का पंजीकरण करवाया है। लेकिन इसमें से 10.40 लाख एकड़ रकबे का रिकॉर्ड मिसमैच है। जब तक यह खामी दूर नहीं होती, तब तक सरकार किसानों की फसल नहीं खरीदेगी।