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पीयू : शोध के लिए खरीदे सामान का होगा ऑडिट
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में शोध के लिए खरीदे गए सामान का ऑडिट होगा। यदि मौके पर सामान आदि नहीं मिला तो विभाग को नोटिस जारी होगा। संतोषजनक जवाब न होने पर पीयू प्रशासन कार्रवाई भी कर सकता है।
पीयू में 300 से अधिक शोध चल रहे हैं। केंद्र व कई एजेंसियों से करोड़ों रुपये का बजट इन शोध के लिए मिला है। शोध के लिए संसाधन आदि जुटाए जाते हैं। उनकी खरीद भी होती है। यह रकम संबंधित एजेंसी या सरकार पीयू के खजाने में भेजती है। शिक्षक शोध की जरूरत के हिसाब से सामान आदि क्रय करने के लिए पीयू से अनुरोध करते हैं और उसके बाद पैसे जारी होते हैं। नियमों के अनुसार खरीदा गया सामान विभाग में होना चाहिए। उसका किसी अन्य कार्य के लिए प्रयोग नहीं हो सकता।
सूत्रों का कहना है कि पांच साल में खरीदे गए सामान का ऑडिट किए जाने की तैयारी है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कुछ शोध पूरे हो गए। उसके लिए खरीदा गया सामान विभागों में नहीं है। सामान कहां गायब हुआ? इसकी जांच करना विभाग का काम है, इसलिए पीयू प्रशासन विभागों से जवाब मांगेगा।
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रूसा के कई प्रोजेक्ट ग्रांट न आने से अटके
वहीं दूसरी ओर रूसा के तहत पास हुए प्रोजेक्ट की रकम न मिलने से कुछ शोध प्रस्ताव शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इसके लिए पीयू ने पहल की और केंद्र सरकार को पत्र भी लिखे, लेकिन अब तक रकम पीयू के खाते में नहीं आई है। यदि रकम मिल जाती तो पीयू कई महत्वपूर्ण शोध के जरिए अपनी साख और बेहतर कर लेती।
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पीयू में 300 से अधिक शोध चल रहे हैं। केंद्र व कई एजेंसियों से करोड़ों रुपये का बजट इन शोध के लिए मिला है। शोध के लिए संसाधन आदि जुटाए जाते हैं। उनकी खरीद भी होती है। यह रकम संबंधित एजेंसी या सरकार पीयू के खजाने में भेजती है। शिक्षक शोध की जरूरत के हिसाब से सामान आदि क्रय करने के लिए पीयू से अनुरोध करते हैं और उसके बाद पैसे जारी होते हैं। नियमों के अनुसार खरीदा गया सामान विभाग में होना चाहिए। उसका किसी अन्य कार्य के लिए प्रयोग नहीं हो सकता।
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सूत्रों का कहना है कि पांच साल में खरीदे गए सामान का ऑडिट किए जाने की तैयारी है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कुछ शोध पूरे हो गए। उसके लिए खरीदा गया सामान विभागों में नहीं है। सामान कहां गायब हुआ? इसकी जांच करना विभाग का काम है, इसलिए पीयू प्रशासन विभागों से जवाब मांगेगा।
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रूसा के कई प्रोजेक्ट ग्रांट न आने से अटके
वहीं दूसरी ओर रूसा के तहत पास हुए प्रोजेक्ट की रकम न मिलने से कुछ शोध प्रस्ताव शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इसके लिए पीयू ने पहल की और केंद्र सरकार को पत्र भी लिखे, लेकिन अब तक रकम पीयू के खाते में नहीं आई है। यदि रकम मिल जाती तो पीयू कई महत्वपूर्ण शोध के जरिए अपनी साख और बेहतर कर लेती।