{"_id":"0aa1b47bddc86b2ef8e341874dfadb5e","slug":"good-news-for-2500-contract-workers-of-chandigarh-pgi-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"PGI के ढाई हजार कर्मियों के लिए खुशखबरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
PGI के ढाई हजार कर्मियों के लिए खुशखबरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 18 Apr 2015 11:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीजीआई में ठेकेदारी प्रथा पर प्रतिंबंध लग गया है। इसके लिए सरकार की ओर से एक गजेटेड नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इससे करीब दो हजार कर्मचारियों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। पीजीआई की यूनियन इस मुद्दे पर पिछले 18 सालों से संघर्ष कर रही थी।
विज्ञापन
पीजीआई इंप्लाई यूनियन के अश्विनी मुंजाल के मुताबिक पीजीआई के सामने अब दो स्थितियां हैं या तो वह कांट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करे या फिर कांट्रैक्ट वाले काम को बंद कर दे। काम बंद होने की स्थिति में सभी कर्मचारियों को मुआवजा मिलेगा और ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी, जहां भी वह काम करे वह अपने साथ कांट्रैक्ट के कर्मचारियों को भी ले जाए।
विज्ञापन
सोमवार को यूनियन पीजीआई एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ सेक्टर नौ स्थित डिप्टी लेबर कमिश्नर को शिकायत देगा। सवाल यह है कि गत 12 दिसंबर को केंद्र सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी हो चुका है तो अब तक ठेकेदारी का काम क्यों नहीं बंद किया गया।
विज्ञापन
पिछले वर्ष 9 मई को सेंट्रल एडवाइजरी कांट्रैक्ट लेबर बोर्ड ने सरकार को अनुमोदित कर पीजीआई में ठेकेदारी प्रथा को बंद करने के आदेश जारी किए थे। इसमें पीजीआई एडमिनिस्ट्रेशन व यूनियन के सदस्य भी मौजूद थे।
जानकारी छुपाने का आरोप
यूनियन की ओर से आरोप लगाया गया कि पिछले साल नवंबर में नोटिफिकशन के बारे में आरटीआई के तहत पीजीआई की ओर से सूचना मांगी गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। तीन महीने बीतने के बाद भी पीजीआई की ओर से कोई जानकारी मुहैया नहीं करवाई गई तो यूनियन ने अपील दायर की।
1996 से उल्लंघन
यूनियन के अश्विनी मुंजाल ने बताया कि पीजीआई में 1996 से कांट्रैक्ट एंव लेबर एक्ट 1970 की सेक्शन 10 की सब सेक्शन एक का उल्लंघन हो रहा था। नियम के मुताबिक कांट्रैक्ट पर लेबर वही रख सकते हैं, जहां पर अस्थाई तौर पर काम हो रहा हो। एक्ट की रूल नंबर 25 के मुताबिक यदि कहीं पर कांट्रैक्ट लेबर पर रखी गई हो और उसी नेचर का काम पक्के कर्मचारी कर रहे हो तो कांट्रैक्ट लेबर को भी पक्के कर्मचारी के बराबर सैलरी मिलनी चाहिए। पीजीआई में दोनों ही एक्ट का उल्लंघन हो रहा था।