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जीएमसीएच के साथ अब पीजीआई में कोरोना की चेन हो रही हैं सक्रिय, पहले आ रहे थे इक्का-दुक्का मामले अब परिसर में बढ़ने लगी है संक्रमितों की संख्या
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चंडीगढ़। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 के साथ पीजीआई कैंपस में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ने लगा है। पिछले दिनों पीजीआई में कार्यरत जिन डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, उनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा पीजीआई से बाहर आवास लेकर रहने वाले लोग शामिल हैं। वहीं, अब धीरे-धीरे पीजीआई परिसर के आवासों में संक्रमण प्रवेश करने लगा है।
बुधवार को पीजीआई के आवासीय परिसर में 6 संक्रमित मरीज पाए गए। इसे लेकर वहां रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। पीजीआई रेजिडेंशियल कांप्लेक्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र का कहना है कि इस खतरे की आशंका उन्हें पहले ही थी, इसलिए उन्होंने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पीजीआई प्रशासन से सभी गेट पर सुरक्षा गार्डों की तैनाती के साथ ही बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाए जाने की मांग की थी, लेकिन इसकी अनदेखी की गई, जिसका नतीजा कोरोना संक्रमण के रूप में सामने आने लगा है।
सुभाष ने बताया कि परिसर में आवासीय क्षेत्र में कभी भी कोई भी आता-जाता रहता है। पीजीआई में बनाए गए रैन बसेरे में मरीज के परिजन और काफी संख्या में मरीज रहते हैं, जो यहां वहां घूमते रहते हैं। इससे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कुछ दिनों पहले ही डायरेक्टर को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की गई थी, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब दोबारा रिमाइंडर भेजा जाएगा। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बचाव के लिए व्यापक कार्य किए जाएं। पीजीआई में लगभग 5000 कर्मचारी रहते हैं। उनके परिवार के सदस्यों को लेकर उनकी संख्या लगभग 15 से 17 हजार तक है।
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बुधवार को पीजीआई के आवासीय परिसर में 6 संक्रमित मरीज पाए गए। इसे लेकर वहां रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। पीजीआई रेजिडेंशियल कांप्लेक्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र का कहना है कि इस खतरे की आशंका उन्हें पहले ही थी, इसलिए उन्होंने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पीजीआई प्रशासन से सभी गेट पर सुरक्षा गार्डों की तैनाती के साथ ही बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाए जाने की मांग की थी, लेकिन इसकी अनदेखी की गई, जिसका नतीजा कोरोना संक्रमण के रूप में सामने आने लगा है।
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सुभाष ने बताया कि परिसर में आवासीय क्षेत्र में कभी भी कोई भी आता-जाता रहता है। पीजीआई में बनाए गए रैन बसेरे में मरीज के परिजन और काफी संख्या में मरीज रहते हैं, जो यहां वहां घूमते रहते हैं। इससे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कुछ दिनों पहले ही डायरेक्टर को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की गई थी, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब दोबारा रिमाइंडर भेजा जाएगा। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बचाव के लिए व्यापक कार्य किए जाएं। पीजीआई में लगभग 5000 कर्मचारी रहते हैं। उनके परिवार के सदस्यों को लेकर उनकी संख्या लगभग 15 से 17 हजार तक है।
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