{"_id":"f9143552559854178b84e3f0c272aa09","slug":"gmada-once-again-managed-to-save-building","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक बार फिर बिल्डिंग बचाने में कामयाब रहा गमाडा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक बार फिर बिल्डिंग बचाने में कामयाब रहा गमाडा
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Sat, 25 Jan 2014 11:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्रेटर मोहाली एरिया डेवपलमेंट अथॉरिटी (गमाडा) शनिवार को एक बार फिर अपनी बिल्डिंग बचाने में कामयाब रहा। इस दौरान गमाडा के वकील ने किसानों का मुआवाजा चुकाने के लिए अदालत से कुछ और समय की मांग की। अदालत द्वारा मामले की अगली सुनवाई पांच अप्रैल तय की गई।
जानकारी के मुताबिक क रीब दस साल पहले नॉलेज सिटी बनाने के लिए जमीन एक्वायर करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस दौरान किसानों को करीब 40 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से भुगतान किया गया। लेकिन अधिकतर किसानों ने गमाडा के रेट का विरोध किया था।
साथ ही मुआवजा लेने से मना कर दिया था और कोर्ट की शरण ली थी। लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने कुंभड़ा एवं मौली बैदवान की जमीन का रेट 71.40 लाख तथा रायपुर खुर्द एवं चीला की जमीन का 53.40 लाख रुपये रेट निर्धारित किया था। इसी के आधार पर किसानों को ब्याज सहित पैसे देने थे। करीब 105 केसों का 400 करोड़ रुपये गमाडा को देना था। जिसमें काफी राशि का गमाडा भुगतान कर चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक क रीब दस साल पहले नॉलेज सिटी बनाने के लिए जमीन एक्वायर करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस दौरान किसानों को करीब 40 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से भुगतान किया गया। लेकिन अधिकतर किसानों ने गमाडा के रेट का विरोध किया था।
विज्ञापन
साथ ही मुआवजा लेने से मना कर दिया था और कोर्ट की शरण ली थी। लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने कुंभड़ा एवं मौली बैदवान की जमीन का रेट 71.40 लाख तथा रायपुर खुर्द एवं चीला की जमीन का 53.40 लाख रुपये रेट निर्धारित किया था। इसी के आधार पर किसानों को ब्याज सहित पैसे देने थे। करीब 105 केसों का 400 करोड़ रुपये गमाडा को देना था। जिसमें काफी राशि का गमाडा भुगतान कर चुका है।
विज्ञापन