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न्याय न मिलने पर छात्रा ने भरी पंचायत में कहा- स्कूल में छात्राएं सुरक्षित नहीं
सोमदत्त शर्मा/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
Updated Fri, 15 Dec 2017 09:21 AM IST
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Panchayat Haryana
- फोटो : File Photo
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शिक्षक लड़कियों के टॉयलेट के बाहर बैठता है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ये कैसासिस्टम है, कहां का इंसाफ है? ऐसे कैसे बेटियां पढ़ सकेंगी और बच सकेंगी। निगदू के सरकारी स्कूल में प्रताड़ना की शिकार पीड़ित छात्रा ने भरी पंचायत में ये बातें चीख चीख कर कहीं और जांच कमेटी के सदस्यों की बोलती बंद कर दी।
बेटी रो-रोकर अपना दर्द बयान करने की कोशिश करती रही, लेकिन कमेटी और पंचायत ने बेटी को अपनी बात तक कहने का हक नहीं दिया। जांच का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आरोपी अध्यापक के रिश्तेदारों के सामने ही बेटियों के बयान लिये गए। सब ओर से समझौता करने का दबाव डाला गया। डीसी की जानाकारी में यह मामला लाने पर उन्होंने आश्वासन दिया कि बेटियों को न्याय दिलाया जाएगा। एसपी ने मामले की जांच डीएसपी को सौंप दी है।
मामला गांव निगदू के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को स्कूल के एक शिक्षक द्वारा प्रताड़ित करने का है। शिक्षक पर आरोप है कि साथ घूमने से इनकार करने से नाराज होकर वह स्कूल में छात्राओं के शौचालय के आगे कुर्सी डालकर बैठ जाता है और लड़कों से भद्दे कमेंट करने को कहता है। अमर उजाला द्वारा मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद शिक्षा विभाग की तरफ से बीईओ नीलोखेड़ी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम जांच के लिए पहुंची। स्कूल प्रिंसिपल और पुलिस चौकी में शिकायत देने के बाद भी आरोपी को बचाने के लिए दिनभर पंचायत का दौर चला।
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बेटी रो-रोकर अपना दर्द बयान करने की कोशिश करती रही, लेकिन कमेटी और पंचायत ने बेटी को अपनी बात तक कहने का हक नहीं दिया। जांच का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आरोपी अध्यापक के रिश्तेदारों के सामने ही बेटियों के बयान लिये गए। सब ओर से समझौता करने का दबाव डाला गया। डीसी की जानाकारी में यह मामला लाने पर उन्होंने आश्वासन दिया कि बेटियों को न्याय दिलाया जाएगा। एसपी ने मामले की जांच डीएसपी को सौंप दी है।
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मामला गांव निगदू के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को स्कूल के एक शिक्षक द्वारा प्रताड़ित करने का है। शिक्षक पर आरोप है कि साथ घूमने से इनकार करने से नाराज होकर वह स्कूल में छात्राओं के शौचालय के आगे कुर्सी डालकर बैठ जाता है और लड़कों से भद्दे कमेंट करने को कहता है। अमर उजाला द्वारा मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद शिक्षा विभाग की तरफ से बीईओ नीलोखेड़ी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम जांच के लिए पहुंची। स्कूल प्रिंसिपल और पुलिस चौकी में शिकायत देने के बाद भी आरोपी को बचाने के लिए दिनभर पंचायत का दौर चला।
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छात्राओं को चुप करा दिया
छात्राओं को चुप करा दिया
पुलिस ने भी कार्रवाई करने की बजाए समझौते का पूरा समय दिया। स्कूल में चार घंटे तक बेटियों को न्याय दिलाने के लिए नहीं, आरोपी को बचाने के लिए मंथन किया गया। छात्राओं को बुलाया गया, सवाल पूछे गए। लेकिन जब छात्राएं आरोपी अध्यापक के बारे में बोलने लगीं तो उन्हें चुप करा दिया गया। भारी दबाव के बावजूद एक नाबालिग छात्रा पंचायत और कमेटी के सामने चीख-चीख कर बोली। न्याय न मिलने पर छात्रा ने सरकार और सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि, सर आप कहते हो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाओ, लेकिन आवाज उठाई तो उसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। रोते हुए छात्रा ने पंचायत और जांच कमेटी पर सवाल उठाए।
जांच कमेटी की सदस्य बाहर, आरोपी के रिश्तेदार अंदर
जांच कमेटी में बीईओ नीलखेड़ी धर्मपाल के नेतृत्व में दो प्रिंसिपल और एक लेक्चरर की टीम स्कूल पहुंची। टीम ने पहले पंचायत में बेटियों को बुलाया और बाद में उनसे अकेले भी बात की। खास बात यह है कि इस दौरान काफी देर तक जांच टीम की महिला सदस्य बाहर रही और आरोपी अध्यापक के रिश्तेदार अंदर रहे। उनकी मौजूदगी में ही लड़की के बयान लिए गए। सबसे अहम बात यह भी रही कि पूरी पंचायत और जांच कमेटी के सामने एक बार भी आरोपी अध्यापक को नहीं बुलाया गया और न ही आरोपी अध्यापक ने माफी मांगी। बावजूद इसके आरोपी को माफ करने की प्रक्रिया चलती रही।
ग्रामीण बोले, तीन महिला शिक्षकों ने रखी लाज
पंचायत के दौरान ग्रामीणों ने कुरुक्षेत्र में छात्राओं के साथ गई तीन महिला शिक्षकों को लड़कियों की सुरक्षा करने को लेकर बधाई दी। ग्रामीणों ने कहा कि तीनों महिला अध्यापकों ने बेटियों और पूरे गांव की लाज रखी है। उन्होंने कहा कि अगर महिला अध्यापक आरोपी शिक्षक का विरोध नहीं करते तो कोई भी घटना हो सकती थी। वहीं, तीनों महिला अध्यापकों ने बताया कि उनसे जबरदस्ती डरा धमकार कर समझौता कराया गया है। वे अपनी बातों पर आज भी स्टैंड हैं। हमें एससी/एसटी एक्ट लगवाने की धमकी तक दी गई।
पुलिस ने भी कार्रवाई करने की बजाए समझौते का पूरा समय दिया। स्कूल में चार घंटे तक बेटियों को न्याय दिलाने के लिए नहीं, आरोपी को बचाने के लिए मंथन किया गया। छात्राओं को बुलाया गया, सवाल पूछे गए। लेकिन जब छात्राएं आरोपी अध्यापक के बारे में बोलने लगीं तो उन्हें चुप करा दिया गया। भारी दबाव के बावजूद एक नाबालिग छात्रा पंचायत और कमेटी के सामने चीख-चीख कर बोली। न्याय न मिलने पर छात्रा ने सरकार और सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि, सर आप कहते हो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाओ, लेकिन आवाज उठाई तो उसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। रोते हुए छात्रा ने पंचायत और जांच कमेटी पर सवाल उठाए।
जांच कमेटी की सदस्य बाहर, आरोपी के रिश्तेदार अंदर
जांच कमेटी में बीईओ नीलखेड़ी धर्मपाल के नेतृत्व में दो प्रिंसिपल और एक लेक्चरर की टीम स्कूल पहुंची। टीम ने पहले पंचायत में बेटियों को बुलाया और बाद में उनसे अकेले भी बात की। खास बात यह है कि इस दौरान काफी देर तक जांच टीम की महिला सदस्य बाहर रही और आरोपी अध्यापक के रिश्तेदार अंदर रहे। उनकी मौजूदगी में ही लड़की के बयान लिए गए। सबसे अहम बात यह भी रही कि पूरी पंचायत और जांच कमेटी के सामने एक बार भी आरोपी अध्यापक को नहीं बुलाया गया और न ही आरोपी अध्यापक ने माफी मांगी। बावजूद इसके आरोपी को माफ करने की प्रक्रिया चलती रही।
ग्रामीण बोले, तीन महिला शिक्षकों ने रखी लाज
पंचायत के दौरान ग्रामीणों ने कुरुक्षेत्र में छात्राओं के साथ गई तीन महिला शिक्षकों को लड़कियों की सुरक्षा करने को लेकर बधाई दी। ग्रामीणों ने कहा कि तीनों महिला अध्यापकों ने बेटियों और पूरे गांव की लाज रखी है। उन्होंने कहा कि अगर महिला अध्यापक आरोपी शिक्षक का विरोध नहीं करते तो कोई भी घटना हो सकती थी। वहीं, तीनों महिला अध्यापकों ने बताया कि उनसे जबरदस्ती डरा धमकार कर समझौता कराया गया है। वे अपनी बातों पर आज भी स्टैंड हैं। हमें एससी/एसटी एक्ट लगवाने की धमकी तक दी गई।