स्थायी शांति के लिए करतारपुर कॉरिडोर का उपयोग करें भारत-पाकिस्तान : ज्ञानी हरप्रीत सिंह
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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह का कहना है कि यदि भारत-पाकिस्तान की सरकारें स्थायी शांति चाहती हैं तो करतारपुर कॉरिडोर का एक बेहतर विकल्प के तौर पर उपयोग किया जाना चाहिए। यह कॉरिडोर दक्षिण एशिया में शांति व्यवस्था बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। करतारपुर कॉरिडोर की पहली वर्षगांठ पर जत्थेदार ने खास बातचीत में कहा कि दोनों देशों के लोग अमन चाहते हैं लेकिन दोनों देशों की आंतरिक राजनीति शांति स्थापना के इस पुल को कमजोर करने की कोशिशों में जुटी हुईं है। दोनों देशों की सरकारों को ऐसा करने से गुरेज करना चाहिए।
जत्थेदार के अनुसार, कोरोना वायरस के कारण दोनों देशों की सरकारों ने कॉरिडोर को बंद कर दिया था। पाकिस्तान सरकार ने तो अपनी तरफ से कॉरिडोर खोल दिया है, लेकिन भारत सरकार ने अब भी कॉरिडोर बंद किया हुआ है। भारत सरकार ने देश भर के सभी धार्मिक स्थान दर्शनों के लिए खोल दिए हैं। ऐसे में कॉरिडोर को बंद रखने का कोई भी औचित्य नहीं है। केंद्र सरकार को बिना कोई देरी किए करतारपुर कॉरिडोर खोल देना चाहिए। गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों के लिए केवल सिख नहीं बल्कि पूरे देश के लोग जाते हैं।
दोनों देशों के लोगों का मिलन स्थल है करतारपुर साहिब
जत्थेदार ने कहा कि गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए जब भारतीय संगत पाकिस्तान जाती है, तो आने वाली पाकिस्तानी संगत से गुरुद्वारा साहिबान में मिलती है। इससे सदियों पुरानी आपसी सांझ और मजबूत होती है। दोनों देशों के लोगों के बीच बना अविश्वास का माहौल खत्म होता है। दोनों देशों के लोगों को एक दूसरे के नजदीक लाने में गुरुद्वारा करतारपुर साहिब एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
करतारपुर साहिब से श्री ननकाना साहिब तक एक नया हाईवे बना रहा पाकिस्तान
ज्ञानी हरप्रीत ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि पाकिस्तान सरकार गुरुद्वारा करतारपुर साहिब से लेकर गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब तक एक हाईवे का निर्माण करने जा रही है। वहां की सरकार ऐसी व्यवस्था बना रही है जिससे श्रद्धालु सुबह गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शन करने के बाद दोपहर को श्री ननकाना साहिब के दर्शन करने के बाद उसी दिन अपने देश लौट सकें। ऐसा प्रोजेक्ट बनता है तो यह एक बेहतर व्यवस्था होगी। वह दो बार गुरुद्वारा श्री करतापुर साहिब के दर्शन करने का सौभाग्य पा चुके हैं। जिस स्थान पर श्री गुरु नानक देव जी ने अपने अंतिम 18 वर्ष बिताए, वह पवित्र स्थान शांति व आध्यात्मिकता का केंद्र है।