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नाटक में दिखा 'नाजायज रिश्तों' का घोस्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Jan 2014 12:12 AM IST
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एक लड़की को अपने शौक के लिए हवस का शिकार बनाया जाता है। फिर हवस का यह भूत (घोस्ट) कभी नहीं मरता।
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यह सब दिखाया गया पंजाब कला भवन में टीएफटी विंटर नेशनल फेस्टिवल के दूसरे दिन हेनरीक इबसन के लिखे नाटक ‘घोस्ट’ में।
जम्मू के अमेच्योर थियेटर ग्रुप ने इस नाटक का मंचन किया और इसका निर्देशन मुश्ताक काक ने किया। नाटक डेढ़ घंटे का था।
नाजायज रिश्तों की उलझी कहानी :
मंच पर प्रकाश उदय होता है और रेजीना जो कि घर की नौकरानी है, उसे उसके पिता जैकब अपने साथ चलने के लिए कहते हैं। लेकिन रेजीना जानती है कि उसके पिता उसे किसी व्यवसायी के हाथों बेच देंगे।
इसलिए वह अपने पिता को वहां से जाने को कहती है। इस बीच घर में पास्टर मेंडरस आता है जो घर की मालकिन हेलेना एलवींग का एडवाइजर है।
इसके साथ ही हेलेना का प्रवेश होता है। हेलेना अपने पति की पूरी कमाई से एक अनाथालय बनाती है लेकिन पास्टर इसे एक गलती कहता है।
वह हेलेना को कोसता भी है कि उसने शादी के बाद अपने पति को धोखा दिया और उससे (पास्टर से) संबंध बनाए। हेलेना इस बीच अपने पति के नाजायज संबंधों को भी खोलती है।
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वह कहती है कि मेरे पति की बुरी आदतें मेरे बेटे को ना लगे, इसलिए मैंने अपने बेटे को दूर भेज दिया। हेलेना का बेटा ओस्वाल्ड पेरिस से आता है। वह बीमारी से ग्रस्त है।
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वह घर की नौकरानी से प्यार करने लगता है और उससे जबरदस्ती जिस्मानी संबंध भी कायम करता है। लेकिन यह बात हेलेना जानते हुए भी नजरअंदाज कर देती है।
इस बीच ओस्वाल्ड, हेलेना से रेजीना के साथ शादी की बात करता है। हेलेना इस रिश्ते के लिए मना कर देती है क्योंकि रेजीना असल में ओस्वाल्ड की बहन है।
इसका कारण यह था कि रेजीना की मां के साथ मिस्टर ओस्वाल्ड के पिता के संबंध थे। इसे छुपाने के लिए ही जैकब से रेजीना की मां की शादी करवाई गई थी। रेजीना यह सब जान कर अपने पिता के पास वापस चली जाती है और जैकब अपनी बीमारी में अकेले दम तोड़ देता है।
कुछ खास दृश्य जो छाप छोड़ गए :
वह सीन जिसमें वकील बने पास्टर हेलेना पर आरोप लगाते है, नाटक को एक अच्छी पकड़ देता है। हेलेना का अपने पति के नाजायज संबंधों पर प्रकाश डालते हुए ओस्वाल्ड के लिए प्यार दिखाना भी दिल को छू जाता है।
इसके अलावा अंतिम सीन में नशे में चूर ओस्वाल्ड जब अपनी आखिरी उम्मीद रेजीना को खो देता है तो अपने बाप को कोसता है।
वह बीमारी के लिए भी अपने मां-बाप को कोसता है। इस सीन में ओस्वाल्ड ने काफी शानदार अभिनय किया। इस दौरान मां और बेटे के बीच हुए संवाद बेहद खूबसूरत हैं।
कुछ खामियां
नाटक रियलिस्टिक था इसलिए संगीत की गुजाइश कम दिखी। बीच में प्यानो का इस्तेमाल हुआ जो संवाद के साथ कुछ जगह मिल नहीं रहा था। बीच में लंबे संवाद भी थे जो बहुत तेजी से बोले गए। इन्हें समझने में थोड़ा मुश्किल आई।
नाटक में एमेच्योर आर्टिस्ट थे लेकिन एक्टिंग के मामले में हेलेना बनी डिलाइट ने अच्छा काम किया।
नाटक को जम्मू-कशमीर के मशहूर निर्देशक मुश्ताक काक ने निर्देशित किया।