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अपने केस की जानकारी के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर, हाईकोर्ट ने दी ये सुविधा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 12 Jan 2018 09:35 AM IST
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- फोटो : File Photo
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पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में मौजूद लोग अब केवल 5 रुपये का भुगतान कर हाईकोर्ट, जिला अदालतों में लंबित मामलों की जानकारी पा सकेंगे। इसके साथ ही इन आदेशों की प्रति भी उन्हें केवल 2 रुपये प्रति पेज के आधार पर उपलब्ध करवाई जाएगी। यह जानकारी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसजे वजीफदार ने योजना का औपचारिक शुभारंभ करते हुए दी।
इससे पूर्व हाईकोर्ट की कंप्यूटर कमेटी के चेयरमैन जस्टिस एसजे वजीफदार ने आईटी विभाग तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस योजना के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए जस्टिस राजेश बिंदल ने बताया कि हरियाणा, पंजाब और यूटी में मौजूद कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से अब नेशनल जुडीशियल डाटा ग्रिड, हाईकोर्ट और जिला अदालतों की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी गांव स्तर पर उपलब्ध करवाई जाएगी।
पंजाब में 65 सौ कॉमन सर्विस सेंटर
पंजाब में 6500, हरियाणा में 5500 तथा यूटी में ऐसे 22 कॉमन सर्विस सेंटर मौजूद हैं। इन सेंटरों पर कृषि, शिक्षा, बिजली, पुलिस, पब्लिक हेल्थ जैसी 171 प्रकार की सुविधाएं पूर्व में ही दी जा रही हैं और अब अपने केस के बारे में याचिकाकर्ता यहां से जानकारी हासिल कर सकेंगे। यह जानकारी आसानी से और नाम मात्र के खर्च पर उपलब्ध होगी। जानकारी केवल देखनी है तो उसके लिए 5 रुपये भुगतान करना होगा और यदि इसका प्रिंट चाहिए तो 2 रुपये प्रति पेज की दर से भुगतान करना होगा।
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इससे पूर्व हाईकोर्ट की कंप्यूटर कमेटी के चेयरमैन जस्टिस एसजे वजीफदार ने आईटी विभाग तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस योजना के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए जस्टिस राजेश बिंदल ने बताया कि हरियाणा, पंजाब और यूटी में मौजूद कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से अब नेशनल जुडीशियल डाटा ग्रिड, हाईकोर्ट और जिला अदालतों की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी गांव स्तर पर उपलब्ध करवाई जाएगी।
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पंजाब में 65 सौ कॉमन सर्विस सेंटर
पंजाब में 6500, हरियाणा में 5500 तथा यूटी में ऐसे 22 कॉमन सर्विस सेंटर मौजूद हैं। इन सेंटरों पर कृषि, शिक्षा, बिजली, पुलिस, पब्लिक हेल्थ जैसी 171 प्रकार की सुविधाएं पूर्व में ही दी जा रही हैं और अब अपने केस के बारे में याचिकाकर्ता यहां से जानकारी हासिल कर सकेंगे। यह जानकारी आसानी से और नाम मात्र के खर्च पर उपलब्ध होगी। जानकारी केवल देखनी है तो उसके लिए 5 रुपये भुगतान करना होगा और यदि इसका प्रिंट चाहिए तो 2 रुपये प्रति पेज की दर से भुगतान करना होगा।
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अभी तक वकील व क्लर्कों पर थे लोग निर्भर
कोर्ट
- फोटो : amar ujala
अफसरों को दी जा चुकी है ट्रेनिंग
इस कार्य को आसान बनाने के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की ट्रेनिंग का कार्यक्रम पूर्व में ही आयोजित किया जा चुका है। यह अधिकारी जिला मैनेजर के तौर पर कार्य करेंगे और कॉमन सर्विस सेंटर को न्यायालय से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करवाने में मदद करेंगे।
जस्टिस बिंदल ने कहा कि यह सेवा आरंभ होने से लोगों को अपने केस के बारे में जानने के लिए लंबी दूरी तय कर हाईकोर्ट या जिला अदालत नहीं आना पड़ेगा। इससे एक ओर तो उनके समय की बचत होगी और दूसरी ओर उनके धन की। कॉमन सर्विस सेंटर की इस सेवा की सबसे खास बात यह है कि यह गांव स्तर पर लोगों को जानकारी मुहैया करवाएंगे। यह सेवा ई गवर्नेंस सर्विस इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएगी।
अभी तक वकील व क्लर्कों पर थे लोग निर्भर
दूर दराज के क्षेत्रों से लोगों को अभी तक अपने केस के बारे में जानकरी प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय कर हाईकोर्ट या संबंधित जिला अदालत तक जाना पड़ता था। इसके बाद भी उनकी मुश्किलें कम नहीं होती थी और उन्हें आदेशों की प्रति प्राप्त करने के लिए क्लर्क को कुछ न कुछ भुगतान करना पड़ता था।
इस कार्य को आसान बनाने के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की ट्रेनिंग का कार्यक्रम पूर्व में ही आयोजित किया जा चुका है। यह अधिकारी जिला मैनेजर के तौर पर कार्य करेंगे और कॉमन सर्विस सेंटर को न्यायालय से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करवाने में मदद करेंगे।
जस्टिस बिंदल ने कहा कि यह सेवा आरंभ होने से लोगों को अपने केस के बारे में जानने के लिए लंबी दूरी तय कर हाईकोर्ट या जिला अदालत नहीं आना पड़ेगा। इससे एक ओर तो उनके समय की बचत होगी और दूसरी ओर उनके धन की। कॉमन सर्विस सेंटर की इस सेवा की सबसे खास बात यह है कि यह गांव स्तर पर लोगों को जानकारी मुहैया करवाएंगे। यह सेवा ई गवर्नेंस सर्विस इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएगी।
अभी तक वकील व क्लर्कों पर थे लोग निर्भर
दूर दराज के क्षेत्रों से लोगों को अभी तक अपने केस के बारे में जानकरी प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय कर हाईकोर्ट या संबंधित जिला अदालत तक जाना पड़ता था। इसके बाद भी उनकी मुश्किलें कम नहीं होती थी और उन्हें आदेशों की प्रति प्राप्त करने के लिए क्लर्क को कुछ न कुछ भुगतान करना पड़ता था।