पति की तलाश में गोंडा से अमृतसर पहुंची गीता, दर-दर रही भटक, किसी ने भी नहीं ली सुध
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चेहरे का रंग फीका पड़ा हुआ था, गोद में बच्चा उठाकर भूखी प्यासी बैठी गीता की कोई सुध नहीं ले रहा था। उसका पति संतोष दशहरा देखने गया था, तब से उसकी फोन पर बातचीत नहीं हुई। गोंडा से अपने बच्चे के साथ भागती हुई अमृतसर बस स्टैंड पहुंची तो किसी ने उसको सिविल अस्पताल तक पहुंचाया , लेकिन गीता को नहीं पता था कि रविवार को सेहत मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा मरीजों का हाल जानने के लिए आ रहे हैं और अस्पताल उनकी तीमारदारी में जुटा है।
भूखी प्यासी गीता अस्पताल में बैठी थी तो सोशल वर्कर सपना भाटिया ने उसका दर्द पूछा। इसके बाद गीता ने रोते रोते हुए बताया कि बीबी जी मेरा घर वाला दशहरा के दिन जौड़ा फाटक पर दशहरा देखने गया था, उसने मेरे साथ फोन पर बात की थी कि मैं दशहरा देखने जा रहा हूं। उसके बाद से उसका फोन बंद है और कुछ अता पता नहीं है। मेरा कोई यहां नहीं है, क्या करूं? सपना भाटिया उसका दर्द समझकर उसको अस्पताल के भीतर लगे एसजीपीसी के लंगर तक ले गई, बोली गीता कुछ खा लो... गीता बोली नहीं मेरे अंदर कुछ नहीं जाएगा.. मेरे पति नहीं मिल रहा है।
इसके बाद वह अस्पताल के भीतर बने आपातकालीन चिकित्सक कक्ष में गई। वहां डॉ. मनरीत कौर अपने साथी चिकित्सकों और लोक संपर्क विभाग के एक अधिकारी के साथ बातचीत कर रही थीं। सपना भाटिया बोली, मैडम इसको अंदर डेड हाऊस में भेज दो ताकि पति की शिनाख्त कर सके। इस पर डॉ. मनरीत ने कहा, अब हमारे पास कुछ नहीं है। सब कुछ गुरु नानक अस्पताल भेज दिया गया है।
फिर डॉ. मनरीत कौर गीता की बात को अनसुना कर साथी अधिकारियों के साथ बात करने लगी कि हेल्थ मिनिस्टर आ रहे हैं, रास्ता खाली करवाओ। सब कुछ ठीक ठाक कर दो...लंगर वाले को बुलाओ.. अंदर सिर्फ 13 मरीज ही दाखिल है.. अब इतना लंगर क्यों ले आए हैं... मंत्री साहब आ रहे हैं। गीता टकटकी लगाए आशा से डॉ. मनरीत की तरफ देख रही थी कि शायद उसको पति के बारे में कुछ मदद मिल सके।
इसके बाद डॉ. मनरीत कौर उठकर ट्रामा वार्ड का निरीक्षण करने चली गईं, जहां कुछ देर बाद सेहत मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा आने वाले थे। सपना भाटिया गीता को समझाने लगी कि आपको अब गुरु नानक अस्पताल जाना पड़ेगा, यहां पर कुछ नहीं है। गीता को बस स्टैंड से अस्पताल तक लाने वाले राकेश कुमार ने बताया कि गुरु नानक अस्पताल मजीठा रोड पर है।
गीता को बैंच पर बैठा दिया गया और वह टकटकी लगाए सभी को देख रही थी। सुबह 11 बजे अमृतसर पहुंची गीता शाम 4.30 बजे सिविल अस्पताल में परेशान बैठी थी। कभी बच्चों को देखती तो कभी आने जाने वाले सब लोगों को। मंत्री आए और सीधे ट्रॉमा सेंटर में चले गए। छह मिनट बाद ट्रामा सेंटर से बाहर निकले तो सपना भाटिया ने हिम्मत कर गीता को उनके आगे कर दिया कि सर, इसका घरवाला नहीं मिल रहा। मोहिंदरा ने गीता की बात सुनी और अधिकारियों को आदेश दिया कि इनको गुरु नानक अस्पताल लेकर चले जाओ। इसके बाद मोहिंदरा निकल गए... पीछे से गीता टकटकी लगाकर उनको देखती रही।