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Chandigarh News: ट्रांसजेंडरों के लिए मलोया में बनेगा गरिमा गृह, 0.13 एकड़ भूमि आवंटित

Wed, 11 Sep 2024 02:30 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2024 02:30 AM IST
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Garima Grih will be built for transgenders in Maloya, 0.13 acre land allotted
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने ट्रांसजेंडरों के लिए पहला गरिमा गृह बनाने का फैसला किया है। इसके लिए मलोया में 0.13 एकड़ का प्लॉट आवंटित भी कर दिया गया है। इसका निर्माण भी जल्द शुरू करने की योजना है। गरिमा गृह में ट्रांसजेंडरों को भोजन, चिकित्सा देखभाल जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ आश्रय प्रदान किया जाएगा। गरिमा गृह में रहने के लिए ऐसे ट्रांसजेंडर पात्र होंगे, जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है।
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आमतौर पर ट्रांसजेंडरों को समाज में हाशिए और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। अक्सर आवास, रोजगार और स्वास्थ्य देखभाल जैसी बुनियादी सुविधाओं तक उनकी पहुंच नहीं हो पाती। गरिमा गृह का मकसद ट्रांसजेंडरों के लिए एक सुरक्षित और सहायक माहौल बनाना है, जिससे उन्हें सम्मान के साथ रहने की जगह मिल सके। यूटी प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि गरिमा गृह की स्थापना टीजी अधिनियम 2019 की धारा 12(3) के तहत निर्धारित प्रावधान के अनुरूप किया गया, जिसमें कहा गया कि चाहे कोई भी माता-पिता या उसके परिवार का कोई सदस्य ट्रांसजेंडर की देखभाल करने में असमर्थ हो तो न्यायालय उसकी देखभाल करेगा। इस अधिनियम के तहत ऐसे व्यक्तियों को रिहैबिलिटेशन सेंटर में रखने का निर्देश दिया गया है।
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गरिमा गृह न केवल यह तय करेगा कि समुदाय को सुरक्षित माहौल तक पहुंचाया जाए बल्कि यह ट्रांसजेंडरों के सशक्तिकरण में भी काफी मदद करेगा। इसके लिए उनके पास ट्रांसजेंडरों के लिए बनाए गए राष्ट्रीय पोर्टल द्वारा जारी किया गया ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है। एक शर्त यह भी होगी कि वे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हों।
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पीएमसी करेगी प्रबंधन, डीसी होंगे अध्यक्ष
गरिमा गृह का प्रबंधन एक परियोजना प्रबंधन समिति (पीएमसी) द्वारा किया जाएगा, जिसके अध्यक्ष डीसी होंगे। पीएमसी का सदस्य सचिव व निदेशक एक ट्रांसजेंडर को ही बनाना होगा। इसके अलावा एनजीओ के प्रतिनिधि, डॉक्टर, ट्रांसजेंडर कल्याण और इनके मुद्दों विशेषज्ञ सदस्य होंगे। पीएमसी की हर महीने बैठक और बैठक के मिनट्स को रिकॉर्ड करना अनिवार्य होगा। यह सुनिश्चित करना परियोजना के निदेशक की जिम्मेदारी होगी कि पीएमसी की बैठक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हो। बैठकों के मिनट्स को मंत्रालय के साथ भी साझा करना होगा। 25 निवासियों वाले गरिमा गृह के संचालन के लिए करीब 11 कर्मचारी भी दिए जाएंगे। इसके अलावा कई मानक व शर्तें भी तय की गई हैं।

गरिमा गृह का मकसद
- ट्रांसजेंडरों को आवास, भोजन, चिकित्सा देखभाल जैसी बुनियादी सुविधाएं दिलाना
- ट्रांसजेंडरों के क्षमता जैसे, कौशल विकास का समर्थन करना
- ट्रांसजेंडरों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें अत्याचारों से बचाना
- कौशल विकास, कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार के लिए तैयार कराना
- उनके विकास के लिए एक सुरक्षित और समावेशी माहौल बनाना
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