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ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने वाले लोगों के होश उड़ा देगी ये खबर
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 25 Jun 2016 10:30 AM IST
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ब्यूटी प्रोडक्ट्स
- फोटो : फाइल फोटो
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ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने वाली महिलाओं और सैलून संचालकों के होश उड़ाने वाला बड़ा मामला सामने आया है। पंजाब के बठिंडा से 21700 नकली फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा के पैकेट पकड़े गए हैं। ब्लड बैंक से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि आज तक उन्होंने इसके बारे में न तो सुना और न ही पढ़ा है, लेकिन पंजाब पुलिस की जांच में सामने आया है कि इसका प्रयोग कास्मेटिक और ब्यूटी प्रोडक्ट में होने वाला था। असली प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा से त्वचा को सुंदर बनाने के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं, लेकिन नकली फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा का मामला पहली बार सामने आया है।
क्या होता फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा
प्लाज्मा रक्त का ही एक हिस्सा होता है। मशीनों के माध्यम से उसे आठ से छह घंटे में अलग किया जाता है। पीले रंग के इस पदार्थ को माइनस 30 डिग्री पर रखा जाता है। प्लाज्मा से भी कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट निकाले जाते हैं, जिनका इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण बीमारियों में किया जाता है। जैसे कि हीमोफीलिया, लीवर की बीमारियां, इम्यून डेफिसिएंटी डिस्आर्डर, ट्रामा, बर्न और सर्जरी पेशेंट में इसका इस्तेमाल होता है।
ऐसे बनाते थे नकली
जांच में पता चला है कि मुंबई की एक कंपनी को भारी संख्या में प्लाज्मा चाहिए था। इतनी संख्या में बना पाना आरोपियों के लिए मुश्किल था। वे उसमें अंडे की जर्दी, सोया मिल्क, रिफाइंड वेजीटेबल आयल, पानी और रंग का इस्तेमाल करते थे। आरोपी इस तकनीक को नेपाल से सीखकर आए थे। उसके बाद वह प्राइवेट अस्पताल के ब्लड बैंक में काम करने लगा। अब यह तकनीक विशेषज्ञों की समझ से परे है। पीजीआई ब्लड बैंक से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आज तक न तो उन्होंने नकली प्लाज्मा पकड़ा और न ही साइंस में पढ़ा है, लेकिन उनका यह कहना है प्लाज्मा से जो कंपोनेंट निकाले जाते हैं, वे काफी आधुनिक मशीनों से निकाले जाते हैं।
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ब्यूटी प्रोडक्ट के इस्तेमाल में लाते थे प्रयोग
प्रारंभिक जांच में यही पता चल पाया है कि इसका इस्तेमाल ब्यूटी प्रोडक्ट और स्किन के इलाज के तौर पर किया जाना था। वे मुंबई और साउथ इंडिया में इसे भेजते थे। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि प्लाज्मा का इस्तेमाल ब्यूटी इंडस्ट्री में भी किया जाता है। विशेषकर डेड स्किन को पुर्नजीवित करने के लिए। इससे फेशियल स्टेम सेल रीजेनरेशन थैरेपी भी कहते हैं। इसमें प्लेटलेट्स और प्लाज्मा दोनों को मिक्स किया जाता है। संभव है कि इसके लिए भी नकली प्लाज्मा का इस्तेमाल किया जाना हो।
आर्टिफिशियल प्लाज्मा बनाना तो असंभव जैसा है। पेशेंट में तो इसका इस्तेमाल किया ही नहीं जा सकता। आज तक इसके बारे में मैंने नहीं सुना। यदि अंडा, सोयाबीन और अन्य चीजों से प्लाज्मा तैयार कर रहे थे तो पता नहीं उनका क्या मकसद रहा होगा?
- आरआर शर्मा, एडिशनल प्रोफेसर ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन
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क्या होता फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा
प्लाज्मा रक्त का ही एक हिस्सा होता है। मशीनों के माध्यम से उसे आठ से छह घंटे में अलग किया जाता है। पीले रंग के इस पदार्थ को माइनस 30 डिग्री पर रखा जाता है। प्लाज्मा से भी कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट निकाले जाते हैं, जिनका इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण बीमारियों में किया जाता है। जैसे कि हीमोफीलिया, लीवर की बीमारियां, इम्यून डेफिसिएंटी डिस्आर्डर, ट्रामा, बर्न और सर्जरी पेशेंट में इसका इस्तेमाल होता है।
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ऐसे बनाते थे नकली
जांच में पता चला है कि मुंबई की एक कंपनी को भारी संख्या में प्लाज्मा चाहिए था। इतनी संख्या में बना पाना आरोपियों के लिए मुश्किल था। वे उसमें अंडे की जर्दी, सोया मिल्क, रिफाइंड वेजीटेबल आयल, पानी और रंग का इस्तेमाल करते थे। आरोपी इस तकनीक को नेपाल से सीखकर आए थे। उसके बाद वह प्राइवेट अस्पताल के ब्लड बैंक में काम करने लगा। अब यह तकनीक विशेषज्ञों की समझ से परे है। पीजीआई ब्लड बैंक से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आज तक न तो उन्होंने नकली प्लाज्मा पकड़ा और न ही साइंस में पढ़ा है, लेकिन उनका यह कहना है प्लाज्मा से जो कंपोनेंट निकाले जाते हैं, वे काफी आधुनिक मशीनों से निकाले जाते हैं।
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ब्यूटी प्रोडक्ट के इस्तेमाल में लाते थे प्रयोग
प्रारंभिक जांच में यही पता चल पाया है कि इसका इस्तेमाल ब्यूटी प्रोडक्ट और स्किन के इलाज के तौर पर किया जाना था। वे मुंबई और साउथ इंडिया में इसे भेजते थे। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि प्लाज्मा का इस्तेमाल ब्यूटी इंडस्ट्री में भी किया जाता है। विशेषकर डेड स्किन को पुर्नजीवित करने के लिए। इससे फेशियल स्टेम सेल रीजेनरेशन थैरेपी भी कहते हैं। इसमें प्लेटलेट्स और प्लाज्मा दोनों को मिक्स किया जाता है। संभव है कि इसके लिए भी नकली प्लाज्मा का इस्तेमाल किया जाना हो।
आर्टिफिशियल प्लाज्मा बनाना तो असंभव जैसा है। पेशेंट में तो इसका इस्तेमाल किया ही नहीं जा सकता। आज तक इसके बारे में मैंने नहीं सुना। यदि अंडा, सोयाबीन और अन्य चीजों से प्लाज्मा तैयार कर रहे थे तो पता नहीं उनका क्या मकसद रहा होगा?
- आरआर शर्मा, एडिशनल प्रोफेसर ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन