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पढ़ने जाना था अमेरिका पहुंच गया थाईलैंड
अमर उजाला ब्यूरो/ यमुना नगर
Updated Tue, 19 Aug 2014 12:47 AM IST
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अमेरिका में पढ़ाई का लालच देकर दंपति ने एक युवक को स्टडी वीजा के नाम पर टूरिस्ट वीजा थमा दिया।
युवक ने अमेरिका के लिए उड़ान तो भरी, लेकिन वह अमेरिका की बजाए थाईलैंड पहुंच गया।
वहां पहुंचकर उसे पता लगा कि दंपति ने उसे अमेरिका का नहीं थाईलैंड का टूरिस्ट वीजा दिया था।
स्वदेश लौटकर युवक ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने जांच के बाद दंपति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
गांव महैलावली निवासी अमरिक सिंह ने थाना सदर जगाधरी पुलिस को दी शिकायत में कहा कि 2012 में उनका बेटा हरमन पढ़ाई के लिए अमेरिका जाना चाहता था, लेकिन उसे वीजा नहीं मिल रहा था। इस दौरान उनकी मुलाकात नंदा कॉलोनी निवासी विजय शर्मा और उसकी पत्नी सुनीता से हुई।
विजय ने बताया कि वह लोगों को विदेश भेजते हैं। जिस पर उन्होंने विजय से हरमन को अमेरिका भेजने की बात कही। जिस पर दंपति ने उन्हें हरमन को विदेश भेजने का आश्वासन दिया।
दंपति ने उनसे इस काम के लिए साढ़े चार लाख रुपये मांगे। उन्होंने विजय और सुनीता को रुपये दे दिए। दंपति ने उन्हें हरमन के नाम पर वीजा दिलवा दिया।
हरमन ने बताया कि वह अमेरिका जाना चाहते थे, लेकिन वह वीजा के अनुसार थाईलैंड पहुंच गए। वहां पहुंचने पर उन्हें हुए धोखे का पता लगा।
थाईलैंड से उन्होंने यह बात परिजनों को बताई। उन्होंने विजय और सुनीता से इस बारे में बात की तो दोनों ने कोई संतोष जनक जवाब नहीं दिया।
हरमन के घर लौटने पर विजय और सुनीता से वीजा के नाम पर लिए रुपये लौटाने को कहा तो उन्होंने रुपये भी नहीं लौटाए। पुलिस ने अमरिक सिंह की शिकायत पर दंपति को धोखाधड़ी और कबूतरबाजी के आरोप में नामजद कर लिया है।
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आरोपियों ने आने नहीं दिया वापस
हरमन के अनुसार आरोपी विजय और सुनीता भी उसे थाईलैंड में मिले। वहां दोनों ने बहाना बनाकर उसका पासपोर्ट लेकर रख लिया। जब उन्होंने दोनों से अमेरिका भेजने की बात दोहराई तो वह टाल-मटोल करने लगे। इस पर हरमन ने दोनों को उन्हें वापस इंडिया भेजने को कहा, लेकिन उन्होंने पासपोर्ट वापस न देने की बात कही। हरमन ने बताया कि वह छह महीने थाईलैंड में ही फंसा रहा।
वकील ने दिलवाया पासपोर्ट
हरमन ने बताया कि काफी प्रयास के बाद भी जब उन्हें आरोपियों ने पासपोर्ट नहीं लौटाया तो उन्होंने एंबेसी में इस बारे शिकायत की। एंबेसी की सहायता से उन्होंने एक वकील किया। वकील ने उन्हें आरोपियों से पासपोर्ट वापस दिलवाया।
नहीं थे आने के पैसे
हरमन ने बताया कि उन्हें पासपोर्ट तो मिल गया था, लेकिन देश लौटने के लिए उनके पास टिकट के पैसे नहीं थे। जिसके बाद उन्होंने घर बात की और रुपये मंगवाए। जिसके बाद वह वापस लौटे।
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युवक ने अमेरिका के लिए उड़ान तो भरी, लेकिन वह अमेरिका की बजाए थाईलैंड पहुंच गया।
वहां पहुंचकर उसे पता लगा कि दंपति ने उसे अमेरिका का नहीं थाईलैंड का टूरिस्ट वीजा दिया था।
स्वदेश लौटकर युवक ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने जांच के बाद दंपति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
गांव महैलावली निवासी अमरिक सिंह ने थाना सदर जगाधरी पुलिस को दी शिकायत में कहा कि 2012 में उनका बेटा हरमन पढ़ाई के लिए अमेरिका जाना चाहता था, लेकिन उसे वीजा नहीं मिल रहा था। इस दौरान उनकी मुलाकात नंदा कॉलोनी निवासी विजय शर्मा और उसकी पत्नी सुनीता से हुई।
विजय ने बताया कि वह लोगों को विदेश भेजते हैं। जिस पर उन्होंने विजय से हरमन को अमेरिका भेजने की बात कही। जिस पर दंपति ने उन्हें हरमन को विदेश भेजने का आश्वासन दिया।
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दंपति ने उनसे इस काम के लिए साढ़े चार लाख रुपये मांगे। उन्होंने विजय और सुनीता को रुपये दे दिए। दंपति ने उन्हें हरमन के नाम पर वीजा दिलवा दिया।
हरमन ने बताया कि वह अमेरिका जाना चाहते थे, लेकिन वह वीजा के अनुसार थाईलैंड पहुंच गए। वहां पहुंचने पर उन्हें हुए धोखे का पता लगा।
थाईलैंड से उन्होंने यह बात परिजनों को बताई। उन्होंने विजय और सुनीता से इस बारे में बात की तो दोनों ने कोई संतोष जनक जवाब नहीं दिया।
हरमन के घर लौटने पर विजय और सुनीता से वीजा के नाम पर लिए रुपये लौटाने को कहा तो उन्होंने रुपये भी नहीं लौटाए। पुलिस ने अमरिक सिंह की शिकायत पर दंपति को धोखाधड़ी और कबूतरबाजी के आरोप में नामजद कर लिया है।
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आरोपियों ने आने नहीं दिया वापस
हरमन के अनुसार आरोपी विजय और सुनीता भी उसे थाईलैंड में मिले। वहां दोनों ने बहाना बनाकर उसका पासपोर्ट लेकर रख लिया। जब उन्होंने दोनों से अमेरिका भेजने की बात दोहराई तो वह टाल-मटोल करने लगे। इस पर हरमन ने दोनों को उन्हें वापस इंडिया भेजने को कहा, लेकिन उन्होंने पासपोर्ट वापस न देने की बात कही। हरमन ने बताया कि वह छह महीने थाईलैंड में ही फंसा रहा।
वकील ने दिलवाया पासपोर्ट
हरमन ने बताया कि काफी प्रयास के बाद भी जब उन्हें आरोपियों ने पासपोर्ट नहीं लौटाया तो उन्होंने एंबेसी में इस बारे शिकायत की। एंबेसी की सहायता से उन्होंने एक वकील किया। वकील ने उन्हें आरोपियों से पासपोर्ट वापस दिलवाया।
नहीं थे आने के पैसे
हरमन ने बताया कि उन्हें पासपोर्ट तो मिल गया था, लेकिन देश लौटने के लिए उनके पास टिकट के पैसे नहीं थे। जिसके बाद उन्होंने घर बात की और रुपये मंगवाए। जिसके बाद वह वापस लौटे।