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Chandigarh News: वर्षों बाद मिले यार<bha>;</bha> याद आई कैंपस की पांच पैसे वाली चाय, 35 पैसे वाला डोसा

Sun, 24 Dec 2023 02:29 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Dec 2023 02:29 AM IST
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Friends, we met after years; I remembered the five paise tea and 35 paise dosa on campus
चंडीगढ़। पचास साल पहले पीयू से डिग्री और सपने लेकर निकले पुराने विद्यार्थी शनिवार को एकबार फिर जब विवि कैंपस पहुंचे तो पुरानी यादों में खो गए। पुरातन विद्यार्थियों ने पीयू में गुजरे अपने दिनों को याद किया। बताया कि 1960-70 के दशक में विवि कैंपस में स्टूडेंट सेंटर नहीं बना था। तब सेक्टर-14 के बाजार में केवल तीन दुकानें हुआ करतीं थीं। उस समय वहां पांच पैसे में चाय और 35 पैसे में डोसा मिलता था। सभी दोस्त खूब मस्ती करते थे। पंजाब यूनिवर्सिटी में शनिवार को पहुंचे पुरातन विद्यार्थियों में देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी, हरियाणा की पहली उपायुक्त केशनी आनंद अरोड़ा, हरियाणा की पूर्व मुख्य सचिव मीनाक्षी आनंद चौधरी, चंडीगढ़ के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, 1973 गोल्डन बैच से अमृत लाल गर्ग, अमेरिका से डॉ. अरुण वर्मा, स्विट्जरलैंड से डॉ. विवेक आदि शामिल रहे। इन पुराने विद्यार्थियों ने पीयू को अपग्रेड करने की बात भी कही। कहा कि पहले देशभर के शीर्ष पांच-छह विश्वविद्यालयों में पीयू का नाम लिया जाता था, उस दौर को फिर से वापस लाना होगा।
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पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, केशनी आनंद, मीनाक्षी आनंद, साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के प्रो. संजय चतुर्वेदी ने राजनीतिक विज्ञान की अपनी कक्षा में बैठकर बीते पलों को याद किया। स्टूडेंट सेंटर बंद होने से कई एलुमनी थोड़े निराश हुए क्योंकि वहां बैठकर चाय की चुस्कियों के साथ बात करने का मौका नहीं मिला।
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मैं आईआईटी कानपुर छोड़कर पीयू में पढ़ने आया था
आईआईटी कानपुर में मुझे दाखिला मिल रहा था, लेकिन पिताजी से कहकर पढ़ने के लिए पीयू आया। उस समय पीयू का नाम देश के शीर्ष चार-पांच विश्वविद्यालयों में था। 1966 बैच में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग से इंजीनियरिंग की और यहां से अपने भविष्य की नींव रखी। पीयू को अब आधारभूत संरचना से लेकर शिक्षा में बेहतर काम करने की जरूरत है।
- डॉ. अरुण वर्मा, व्यवसायी, अमेरिका
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लड़कियों के कारण राजनीतिक विज्ञान विभाग में रहती थी रौनक
केमिकल इंजीनियरिंग में उस समय लड़कियां नहीं हुआ करती थीं, लेकिन हमारे विभाग की ऊपरी मंजिल पर राजनीतिक विज्ञान विभाग था, जहां लड़कियां पढ़ती थीं इसलिए सभी विद्यार्थियों के लिए राजनीतिक विज्ञान का केंद्र आकर्षण का स्थान होता था। 35 पैसे का डोसा खाया करते थे। आईआईटी-दिल्ली में भी दाखिला मिल रहा था लेकिन यहां पढ़ाई अधिक सुविधाजनक थी, इसलिए यहां आ गए।
- अमृत लाल गर्ग, उद्यमी, 1973 गोल्डन बैच
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पिताजी के साथ स्कूटर पर आती थी पीयू, याद आ गए वो दिन
पिता प्रो. जेसी आनंद के साथ स्कूटर पर बैठक राजनीतिक शास्त्र विभाग आया करती थी। यहां न केवल पढ़ाई की बल्कि दो साल पढ़ाया भी। जब आईएएस की परीक्षा पास की तो पिता बोले यह सर्विस भूल जाओ तुम शिक्षक ही बनी रहो। पहले दोनों बहनों के आईएएस बनने से पिता चाहते थे कि मैं शिक्षक ही बनी रहूं। विभाग की इन्हीं कक्षाओं में मैं प्लेटो, एरिस्टोटल आदि पढ़ाया करती थी।
- केशनी आनंद अरोड़ा, हरियाणा की प्रथम उपायुक्त, 1974 बैच
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जेल से छूटकर आया तो छुपकर आया था दोस्तों से मिलने पीयू
पीयू में शिक्षकों ने जितना प्यार दिया उसने भविष्य बनाने में मदद की। मैं पहले दिन से हार्डकोर आरएसएस-बीजेपी समर्थक था लेकिन राजनीतिक विज्ञान विभाग में आकर मार्क्सवादी, कम्यूनिस्ट आदि सभी विचारधाराओं के बारे में पढ़ा। 1995 में जब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने पर पहली बार जेल जाना पड़ा तो वहां से पहला पत्र प्रो.पाम राजपूत को लिखा था। जब जेल से छूटकर आया तो सीबीआई से छुपकर पीयू आकर दोस्तों से मिला।
- सत्यपाल जैन, पूर्व विद्यार्थी, पूर्व सांसद
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