{"_id":"66eed7843d6ee5862f0a2c1b","slug":"frequent-visits-from-parents-of-minors-are-emotionally-important-high-court-chandigarh-news-c-16-1-pkl1041-522400-2024-09-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाबालिग की माता-पिता से लगातार मुलाकातें भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाबालिग की माता-पिता से लगातार मुलाकातें भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण: हाईकोर्ट
विज्ञापन
-पिता की प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने की टिप्पणी
-अदालत ने मौसी के पास रह रहे बेटे से मुलाकात की पिता को दी अनुमति
-- -
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बच्चे की कस्टडी के लिए पिता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि नाबालिग की उसके माता-पिता से लगातार और सौहार्दपूर्ण मुलाकातें बच्चे के भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की बातचीत सकारात्मक और पोषण करने वाले माहौल में योगदान करती हैं, जो बच्चे के समग्र कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।
संगरूर निवासी पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल करते हुए नाबालिग बेटे की कस्टडी बच्चे की मौसी से दिलाने की मांग की थी। याची ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी की मौत के बाद बेटे को मौसी और अन्य प्रतिवादियों ने अवैध रूप से रखा है। हाईकोर्ट के आदेश पर बच्चे को कोर्ट लाया गया, तो चैंबर में बातचीत के दौरान, बच्चे ने मौसी की देखभाल में खुशी की भावना व्यक्त की, जिसके साथ वह लगभग तीन साल की उम्र से रह रहा है। साथ ही बच्चे ने अपने पिता से मिलने की स्पष्ट इच्छा भी व्यक्त की, लेकिन कहा कि मुलाकातें मौसी के घर पर हों। हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि कोई सुविधाजनक दिन चुन कर मुलाकातें निर्धारित की जा सकती हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता ने अपने बेटे के साथ संबंध बनाए रखने के प्रयासों में मौसी की ओर से बाधाओं की आशंका जताई।
पिता व मौसी दोनों से प्यार और मार्गदर्शन मिले
जवाब में मौसी ने कोर्ट को विश्वास दिलाया कि मुलाकातों के दौरान कोई बाधा उत्पन्न नहीं करेगी और दोनों के बीच संबंध को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर जोर देगी। हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि बच्चे और उसके पिता के बीच लगातार और सौहार्दपूर्ण मुलाकातें बच्चे के भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विकास पर सकारात्मक और पोषणकारी प्रभाव डालेंगी। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों ने बच्चे के लाभ के लिए अपने मतभेदों को दूर करने और उसके विकास के लिए आवश्यक सहायक वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इस सहयोग से बच्चे के पालन-पोषण में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि उसे अपने पिता और मौसी दोनों से प्यार और मार्गदर्शन मिले। इस समझौते के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
-अदालत ने मौसी के पास रह रहे बेटे से मुलाकात की पिता को दी अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बच्चे की कस्टडी के लिए पिता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि नाबालिग की उसके माता-पिता से लगातार और सौहार्दपूर्ण मुलाकातें बच्चे के भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की बातचीत सकारात्मक और पोषण करने वाले माहौल में योगदान करती हैं, जो बच्चे के समग्र कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।
संगरूर निवासी पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल करते हुए नाबालिग बेटे की कस्टडी बच्चे की मौसी से दिलाने की मांग की थी। याची ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी की मौत के बाद बेटे को मौसी और अन्य प्रतिवादियों ने अवैध रूप से रखा है। हाईकोर्ट के आदेश पर बच्चे को कोर्ट लाया गया, तो चैंबर में बातचीत के दौरान, बच्चे ने मौसी की देखभाल में खुशी की भावना व्यक्त की, जिसके साथ वह लगभग तीन साल की उम्र से रह रहा है। साथ ही बच्चे ने अपने पिता से मिलने की स्पष्ट इच्छा भी व्यक्त की, लेकिन कहा कि मुलाकातें मौसी के घर पर हों। हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि कोई सुविधाजनक दिन चुन कर मुलाकातें निर्धारित की जा सकती हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता ने अपने बेटे के साथ संबंध बनाए रखने के प्रयासों में मौसी की ओर से बाधाओं की आशंका जताई।
विज्ञापन
पिता व मौसी दोनों से प्यार और मार्गदर्शन मिले
जवाब में मौसी ने कोर्ट को विश्वास दिलाया कि मुलाकातों के दौरान कोई बाधा उत्पन्न नहीं करेगी और दोनों के बीच संबंध को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर जोर देगी। हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि बच्चे और उसके पिता के बीच लगातार और सौहार्दपूर्ण मुलाकातें बच्चे के भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विकास पर सकारात्मक और पोषणकारी प्रभाव डालेंगी। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों ने बच्चे के लाभ के लिए अपने मतभेदों को दूर करने और उसके विकास के लिए आवश्यक सहायक वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इस सहयोग से बच्चे के पालन-पोषण में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि उसे अपने पिता और मौसी दोनों से प्यार और मार्गदर्शन मिले। इस समझौते के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
विज्ञापन