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रिकॉर्ड में दवाइयां बंटवा दी, मिली मोरनी के पटवारखाने में

Sun, 28 Feb 2016 09:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोरनी(पंचकूला)
ब्यूरो/अमर उजाला, मोरनी(पंचकूला) Updated Sun, 28 Feb 2016 09:31 AM IST
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fraud of medicine by health deptt of morni, panchkula

रिकॉर्ड में लिखा गया है कि दवाइयां बंटवा दी गई है, लेकिन छापेमारी में वे पटवारखाने में मिली और बेचने की तैयारी चल रही थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब शनिवार को गुप्त सूचना पर उपमंडल अधिकारी डॉ. सुखदेव ने छापामारी कर दवाओं का स्टाक पकड़ किया।

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पशुओं के इलाज के लिए किसानों को बांटी जा चुकीं दवाओं का जखीरा पशु चिकित्सालय के साथ लगते एक सरकारी दफ्तर से बरामद होने पर विभाग के डॉक्टर और स्टाफ सहित राजस्व विभाग पर शक की सूई घूम गई है। वहीं मौके पर एसडीओ को कोई भी कर्मचारी नहीं मिला।
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खुद पशु चिकित्सक डॉ. समीर सुबह 11 बजे मौके पर पहुंचे और मजे से जांच अधिकारी के सामने सिगरेट पीते हुए धुएं के छल्ले उड़ाते रहे। यह सारा मामला पुलिस चौकी मोरनी से महज दस फुट दूर हुआ। मोरनी में पशुओं के इलाज के लिए दवाएं न मिलने और स्टाफ के नदारद रहने की शिकायतें लगातार विभाग व सरकार को मिल रही थीं।
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शनिवार को विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. सुखदेव ने छापा मारा। डॉ. सुखदेव राठी ने बताया कि लोगों को रिकॉर्ड बांटी गई दवाओं को साथ लगते सरकारी कार्यालय में छिपाकर रखने व एक भैंस के इंश्योरेंस के नाम पर डॉक्टर द्वारा कथित लापरवाही की शिकायत की जांच के लिए वह मोरनी पहुंचे हैं।

मोरनी ब्लॉक के बैहलों गांव के राजेंद्र परमार व कुछ अन्य लोगों ने कुछ दिन पहले अपने पशुओं के इंश्योरेंस कराए थे। आरोप है कि विभाग के डॉक्टरों ने इंश्योरेंस के नाम पर ग्रामीणों से डबल पैसे वसूले व इंश्योरेंस का रिकॉर्ड समय पर जमा नहीं कराया। इसके बाद राजेंद्र परमार ने विभाग के उच्च अधिकारियों को मामले की शिकायत दी थी।

परमार ने आरोप लगाया है कि उनके साथ पशु चिकित्सा केंद्र में कार्यरत डॉक्टर समीर ने इंश्योरेंस के दौरान लापरवाही बरती है। उनकी भैंस का इश्योरेंस डॉक्टर समीर ने 15 जनवरी को किया था। आरोप है कि इसकी एवज में राजेंद्र परमार से 200 रुपये वसूले गए थे। जबकि सरकारी स्तर पर हर भैंस का इश्योरेंस 100 रुपये में होता है।


31 जनवरी की रात को उनकी भैंस की पेट में अफारा होने से मौत हो गई। भैंस के मरने की सारी जानकारी राजेंद्र परमार ने सुबह डॉक्टर समीर को दी। लेकिन बार-बार फोन करने पर कोई भी कर्मचारी दोपहर तक भैंस का पोस्टमार्टम करने नहीं आया।

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