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BA किए बिना एमए कर ली और फिर अफसर बना गया, तरीका बेहद अनोखा
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 01 Oct 2017 04:55 PM IST
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fraud for employment
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गजब का कारनामा देखिए, युवक ने पहले बिना बीए किए एमए कर ली और फिर अफसर बनकर ऐशोआराम की जिंदगी बिताने लगा। इसके लिए तरीका बेहद अनोखा निकाला। केस इतना अनोखा है कि आपके मुंह से निकलेगा कि ऐसा भारत देश में ही हो सकता है। मामला पंजाब का है। पूर्व अकाली-भाजपा सरकार के समय अफसरशाही के मनमाने कामकाज का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
एक पूर्व मंत्री के निजी स्टाफ में शामिल व्यक्ति ने ग्रेजुएशन किए बिना तमिलनाडु की अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से एमए की डिग्री हासिल कर ली। और फि र उसी की बदौलत उसको पीसीएस अधिकारी नियुक्त कर दिया गया। इसके बाद नियुक्ति को सही बनाने के लिए ट्रेनिंग पीरियड में भी कटौती कर दी गई। यह खुलासा एक महिला प्रोमिला की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है।
यह पीसीएस अधिकारी रमन कुमार कोछड़ इन दिनों गुरदासपुर में असिस्टेंट कमिश्नर (जनरल) के पद पर तैनात हैं। आरटीआई के तहत सूचना में पता चला है कि कोछड़ ने 1988 में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से दसवीं की और उसके बाद 2005 में सीधे अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से हिस्ट्री विषय में एमए सेकेंड डिवीजन में पास कर ली। वर्ष 2007-08 में उन्होंने जालंधर की पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से एमबीए (मार्केटिंग) और 2011 में पीयू से एमए पंजाबी पास कर ली।
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वर्ष 2014 में उन्होंने पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) में पीसीएस (कार्यकारी ब्रांच) रजिस्टर ए-2 में रजिस्ट्रेशन कराया। खास बात यह है कि पीपीएससी के फार्म में उन्होंने क्वालिफिकेशन डिटेल देते हुए क्लास- ग्रेजुएशन, डिग्री का नाम- एमए हिस्ट्री दर्ज किया। यानी, बीए के कॉलम में एमए की डिग्री।
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एक पूर्व मंत्री के निजी स्टाफ में शामिल व्यक्ति ने ग्रेजुएशन किए बिना तमिलनाडु की अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से एमए की डिग्री हासिल कर ली। और फि र उसी की बदौलत उसको पीसीएस अधिकारी नियुक्त कर दिया गया। इसके बाद नियुक्ति को सही बनाने के लिए ट्रेनिंग पीरियड में भी कटौती कर दी गई। यह खुलासा एक महिला प्रोमिला की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है।
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यह पीसीएस अधिकारी रमन कुमार कोछड़ इन दिनों गुरदासपुर में असिस्टेंट कमिश्नर (जनरल) के पद पर तैनात हैं। आरटीआई के तहत सूचना में पता चला है कि कोछड़ ने 1988 में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से दसवीं की और उसके बाद 2005 में सीधे अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से हिस्ट्री विषय में एमए सेकेंड डिवीजन में पास कर ली। वर्ष 2007-08 में उन्होंने जालंधर की पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से एमबीए (मार्केटिंग) और 2011 में पीयू से एमए पंजाबी पास कर ली।
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वर्ष 2014 में उन्होंने पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) में पीसीएस (कार्यकारी ब्रांच) रजिस्टर ए-2 में रजिस्ट्रेशन कराया। खास बात यह है कि पीपीएससी के फार्म में उन्होंने क्वालिफिकेशन डिटेल देते हुए क्लास- ग्रेजुएशन, डिग्री का नाम- एमए हिस्ट्री दर्ज किया। यानी, बीए के कॉलम में एमए की डिग्री।
सामान्य प्रशासन विभाग ने किया झूठा दावा
fraud for employment
पीपीएससी की ओर से रमन कोछड़ के आवेदन पर यह कहते हुए आपत्ति उठाई गई कि पीसीएस (ईबी) 2011 के अनुसार आवेदक की पात्रता ग्रेजुएशन होना जरूरी है। लेकिन रमन कोछड़ ग्रेजुएशन का कोई सबूत नहीं दे सके हैं।
इस पर सामान्य प्रशासन विभाग के तत्कालीन प्रिंसिपल सेक्रेटरी संजय कुमार ने पीपीएससी को 30 मई, 2014 को पत्र लिखकर दावा किया कि रमन कोछड़ के पास मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री है और उनका आवेदन सामान्य प्रशासन विभाग के रिकार्ड के अनुसार पूरी तरह सही है।
यूजीसी ने बगैर ग्रेजुएशन एमए की डिग्री को अवैध बताया
उधर, सरकार के पकसोनल विभाग की पीसीएस शाखा ने इस मामले में 18 अगस्त, 2016 को यूजीसी से रमन कोछड़ की डिग्री के बारे में सुझाव मांगे तो यूजीसी ने रमन कोछड़ की ओर से बिना ग्रेजुएशन के एमए की डिग्री हासिल करने को पूरी तरह अवैध करार देते हुए कहा कि कोई भी विद्यार्थी तीन वर्षीय ग्रेजुएशन पूरी किए बिना मास्टर डिग्री हासिल करने का पात्र नहीं हो सकता।
इस पर सामान्य प्रशासन विभाग के तत्कालीन प्रिंसिपल सेक्रेटरी संजय कुमार ने पीपीएससी को 30 मई, 2014 को पत्र लिखकर दावा किया कि रमन कोछड़ के पास मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री है और उनका आवेदन सामान्य प्रशासन विभाग के रिकार्ड के अनुसार पूरी तरह सही है।
यूजीसी ने बगैर ग्रेजुएशन एमए की डिग्री को अवैध बताया
उधर, सरकार के पकसोनल विभाग की पीसीएस शाखा ने इस मामले में 18 अगस्त, 2016 को यूजीसी से रमन कोछड़ की डिग्री के बारे में सुझाव मांगे तो यूजीसी ने रमन कोछड़ की ओर से बिना ग्रेजुएशन के एमए की डिग्री हासिल करने को पूरी तरह अवैध करार देते हुए कहा कि कोई भी विद्यार्थी तीन वर्षीय ग्रेजुएशन पूरी किए बिना मास्टर डिग्री हासिल करने का पात्र नहीं हो सकता।
फाइल घूमती रही इस दफ्तर से उस दफ्तर
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- फोटो : demo pic
यूजीसी के दिशा-निर्देश मिलने के बाद तत्कालीन परसोनल सचिव राजी पी. श्रीवास्तव ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बताया कि रमन कोछड़ को नियुक्ति पत्र जारी किया जा चुका है और वे ट्रेनिंग अधीन हैं। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि इस मामले पर फिर से विचार किया जाए।
इस पर तत्कालीन मुख्य सचिव सर्वेश कौशल ने 10 नवंबर 2016 को इस मामले पर एलआर और एजी से राय लेने के बाद फाइल मुख्यमंत्री को भेजे जाने की ताकीद जारी की। एलआर की ओर से 13 दिसंबर 2016 को अपनी राय देते हुए रमन कुमार की नियुक्ति को पूरी तरह गलत ठहराया गया।
इस पर मुख्य सचिव ने फिर अपनी राय देते हुए एडवोकेट जनरल से भी राय लेने की सलाह दी। इस तरह रमन कोछड़ की फाइल एक से दूसरे दफ्तर घूमती रही और पीसीएस के तौर पर उनकी नियुक्ति कायम रही।
इस पर तत्कालीन मुख्य सचिव सर्वेश कौशल ने 10 नवंबर 2016 को इस मामले पर एलआर और एजी से राय लेने के बाद फाइल मुख्यमंत्री को भेजे जाने की ताकीद जारी की। एलआर की ओर से 13 दिसंबर 2016 को अपनी राय देते हुए रमन कुमार की नियुक्ति को पूरी तरह गलत ठहराया गया।
इस पर मुख्य सचिव ने फिर अपनी राय देते हुए एडवोकेट जनरल से भी राय लेने की सलाह दी। इस तरह रमन कोछड़ की फाइल एक से दूसरे दफ्तर घूमती रही और पीसीएस के तौर पर उनकी नियुक्ति कायम रही।