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सतलोक आश्रम के लिए धोखाधड़ी से जमीन लेने का मामला, 5 अप्रैल को आएगा फैसला

Sat, 31 Mar 2018 10:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 31 Mar 2018 10:10 AM IST
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fraud case of land acquisition for Satlok Ashram of Karuntha, court pronounce verdict on 5 April

करौंथा के सतलोक आश्रम की जमीन के धोखाधड़ी के मामले में जिला अदालत रामपाल सहित 9 लोगों के खिलाफ 5 अप्रैल को फैसला सुना सकती है। शुक्रवार दोपहर बाद जेएमआईसी मेनका सिंह की अदालत ने फैसला लिया कि हिसार जेल में बंद संत रामपाल की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। 

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आर्य समाजियों के वकील नरेंद्र सिंह कटारिया ने बताया कि बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट के नाम गिफ्ट डीड के तहत करौंथा की जमीन की रोहतक तहसील में रजिस्ट्री कराई गई। 2006 में सिविल लाइन थाने में रजिस्ट्री को चुनौती दी गई।
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आरोप लगाया गया कि गांव की एक युवक कमला देवी की जगह दूसरी महिला को खड़ा करके रजिस्ट्री कराई गई है। जबकि कमला देवी की भी जमीन में हिस्सेदारी थी। पुलिस ने मामले में संत रामपाल, ट्रस्टी राजेंद्र भठगांव, रवींद्र सुंडाना, सत्यदेव, नंबरदार कृष्ण व गिफ्ट डीड कराने वाले करौंथा के चार ग्रामीणों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही है। मामले में सत्यदेव अदालत से पीओ करार है। 

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बहस पूरी, फैसले का इंतजार 

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वकील ने बताया कि जेएमआईसी मेनका सिंह की अदालत में केस से जुड़ी बहस पूरी हो चुकी है। शुक्रवार को अदालत फैसला सुना सकती थी, लेकिन रामपाल सहित सभी आरोपियों की मौजूदगी जरूरी थी। फैसला सुनाते समय वीसी सिस्टम पर सवाल उठाया जा सकता है। ऐसे में अदालत ने दिनभर रामपाल को रोहतक कोर्ट में लाकर पेश करने की स्थिति पर मंथन किया। हालात को देखते हुए दोपहर बाद वीसी सिस्टम से ही पेशी कराने की सहमति दे दी। 

समर्थक खड़ी कर देते हैं परेशानी
पिछले दिनों एडीजे अश्वनी कुमार की कोर्ट ने पुलिस को हिदायत दी थी कि रामपाल को अदालत में पेश किया जाए। क्योंकि पुलिस बार-बार हिदायत के बावजूद वीसी सिस्टम नहीं लेकर आ रही। इसकी भनक रामपाल के समर्थकों को लग गई, जो सैकड़ों की संख्या में रोहतक बस स्टैंड से लेकर मानसरोवर पार्क तक पहुंच गए। पुलिस को कानून व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि उस दिन पुलिस ने रामपाल को पेश नहीं किया, बल्कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ही सुनवाई की गई।

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