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हरियाणा के चौथे लाल ने खत्म किया सीएम सिटी का क्रेज
Mon, 30 Sep 2019 06:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
नसीब सैनी, कैथल
नसीब सैनी, कैथल
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 30 Sep 2019 06:20 AM IST
सार
- मनोहर लाल सबसे मजबूत पहलवान के तौर पर दोबारा से जनादेश मांग रहे हैं
- मनोहर लाल ने करनाल को नहीं दी विशेष तवज्जो
- 5 साल में हरियाणा का कोई भी ऐसा शहर नहीं है, जिसे कहा जा सके कि सीएम ने तवज्जो दी है
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मनोहर लाल खट्टर
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विस्तार
हरियाणा के गठन के बाद से ही सीएम सिटी का मतलब होता था ग्रांट, रोजगार व बड़े प्रोजेक्टस में विशेष तवज्जो, विशेष स्टेटस सिंबल। मतलब होने का भी बड़ा कारण था। वर्ष 2015 तक जितने भी मुख्यमंत्री बने, उनके गृह जिले व उनकी विधानसभा सीट वाले जिले की पूरे प्रदेश में विशेष स्थिति पूरे प्रदेश के जिलों व शहरों से अलग कर देती थी।
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इसी क्रेज के कारण कई नेताओं ने उत्तरी व दक्षिणी हरियाणा की चौधर के लिए आजीवन झंडा उठाए रखा। कई बार इन मुद्दों पर चुनाव लड़े। लेकिन मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री बनने के बाद करनाल को कोई विशेष तवज्जो न देकर चौधर के मुद्दे को ही खत्म कर दिया और इसके साथ ही सीएम सिटी का क्रेज भी चला गया। आज अपनी इन्हीं नीतियों के बदौलत मनोहर लाल सबसे मजबूत पहलवान के तौर पर चुनावी दंगल में उतरकर जनता से दोबारा से जनादेश मांग रहे हैं।
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हरियाणा के गठन के तुरंत बाद देखा जाए तो एक साल बाद ही चौधरी बंसी लाल मुख्यमंत्री बने थे। उनके समय में भिवानी का जो विकास हुआ। वह दूसरे शहरों के लिए उदाहरण बन गया। इसके बाद मौका मिला चौधरी भजन लाल व ताऊ देवी लाल को। उनके समय में हिसार में भी भजन लाल के विधानसभा क्षेत्र आदमपुर, देवीलाल के समय में सिरसा का जो विकास हुआ, उससे दूसरे जिलों के लोग प्रभावित होते थे।
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लंबे संघर्ष के बाद भुप्पी (भूपेंद्र सिंह हुड्डा को रोहतक के लोग भुप्पी कहते हैं) रोहतक में चौधर लाए तो 2005 से लेकर 2015 तक रोहतक की जो तस्वीर बदली, उससे सीएम सिटी का क्रेज और बढ़ गया था। कई नेताओं ने आजीवन अपने क्षेत्र में चौधर की लड़ाई लड़ी, इस बार यह मुद्दा नहीं है।
चुनाव में भाजपा में वरिष्ठ नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने उत्तरी हरियाणा में चौधर लाने के लिए आजीवन झंडा उठाए रखा। 2 जून 2003 की कैथल रैली इसी मुद्दे पर आधारित थी। लेकिन पिछले चुनाव के बाद जैसे ही करनाल से विधायक मनोहर लाल को हरियाणा का सीएम बनाया गया, उसके साथ उनका उत्तरी हरियाणा में चौधर लाने का मुद्दा खत्म हो गया। उधर, भाजपा के ही केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह आज तक दक्षिणी हरियाणा में चौधर लाने का झंडा बुलंद किए हुए हैं। कई बार दक्षिण की चौधर के लिए वहां से आवाज उठती रहीं हैं।
मनोहर लाल ने करनाल को नहीं दी विशेष तवज्जो
पिछले पांच साल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने करनाल शहर को सीएम सिटी होने के कारण कोई विशेष तवज्जो नहीं दी। यदि हम केवल शिक्षा के क्षेत्र को ही देख लें तो स्किल यूनिवर्सिटी गुड़गांव में, वाईएमसीए फरीदाबाद में, संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल में, आयुर्वेद विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र, मेडिकल यूनिवर्सिटी करनाल को, लॉ यूनिवर्सिटी सोनीपत में, प्रस्तावित एम्स मनेठी अहीरवाल में दी है। इस तरह से सीएम सिटी का जो एक स्टेटस सिंबल बन गया था, हरियाणा में इस बार वह मुद्दा नजर नहीं आ रहा। 5 साल में हरियाणा का कोई भी ऐसा शहर नहीं है, जिसे कहा जा सके कि सीएम ने विशेष तवज्जो दी है।
महज 5 साल में सीएम हुए पार्टी व विपक्ष में राजनीतिक तौर पर ताकतवर
सरकार गठन के शुरुआती 2-3 वर्षों तक सीएम की नेतृत्व क्षमता व राजनीतिक क्षमता पर लोगों ने तमाम सवाल उठाए। लेकिन वर्ष 2019 आते-आते सीएम मनोहर लाल ना केवल अपनी पार्टी में बल्कि विपक्ष में भी ताकतवर नेता के रूप में उभरते नजर आ रहे हैं। इनेलो की टूट, कांग्रेस की फूट के बीच मुख्यमंत्री के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे 75 पार से भी आगे की बात कर रहे हैं। परिणाम क्या होगा, यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा, लेकिन अभी तक सीएम मजबूत पहलवान के तौर पर चुनावी दंगल में जनता से दोबारा जनादेश मांगते नजर आ रहे हैं।