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Chandigarh News: एक कमरे में चार-चार विद्यार्थी, फिर भी पीयू में नहीं मिल रहा छात्रावास
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को छात्रावास में कमरे नहीं मिल पा रहे हैं। लड़कियों के छात्रावास में ज्यादा परेशानी आ रही है क्योंकि यहां पहले ही कमरों की संख्या कम होने के कारण दो छात्राओं के कमरे में तीन और तीन के कमरे में चार छात्राओं को रखा गया था। इसके बावजूद जगह नहीं बची है। पंजाब सरकार ने पीयू में दो नए छात्रावास बनाने का वायदा किया था, लेकिन एक साल से अधिक समय के बाद भी अभी तक निर्माण प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। छात्रसंघ चुनाव से पहले सीएम भगवंत मान ने स्वयं पीयू का दौरा कर एक महीने में लड़कियों के छात्रावास नंबर-11 का काम शुरू करवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन चार माह बीतने के बाद भी इस दिशा में धरातल पर कोई काम नहीं हो पाया है। वहीं जीएच-11 का ग्राउंड फ्लोर पहले से बना हुआ है, लेकिन छात्रावास निर्माण प्रक्रिया शुरू होने के चलते इन कमरों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। सीएम भगवंत मान ने दौरे के दौरान कहा था कि लड़कियों के छात्रावास के विस्तार और लड़कों के लिए नए छात्रावास के निर्माण के लिए 49 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। चुनाव से पहले इसको लेकर अधिसूचना भी जारी की गई, लेकिन पैसा आजतक नहीं आया। छात्रावास स्थलों का दौरा करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा था कि लड़कियों के दो मंजिला छात्रावास पर पांच अन्य मंजिलों का निर्माण किया जाएगा जबकि लड़कों के लिए छह मंजिला छात्रावास का निर्माण किया जाएगा।
पीएचडी के विद्यार्थियों को जेआरएफ के बाद भी छात्रावास मिलने में परेशानी
पीयू के छात्रावास में कमरों की संख्या की कमी चलते पीएचडी (जेआरएफ) शोधार्थी लड़कियों को भी कमरा आवंटित होने में परेशानी आ रही है। वहीं जेआरएफ होल्डर को भी अन्य छात्रों के साथ कमरा शेयर कर रहने के लिए कहा जा रहा है। जबकि नियमों के मुताबिक जेआरएफ को अकेले कमरा मिलता है। छात्रावास में बढ़ रहे दबाव के चलते अब डीएसडब्ल्यू दफ्तर की ओर से गेस्ट पर आवंटित कमरों का समय न बढ़ाकर उन्हें निकाला जा रहा है जिससे मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को वहां रखा जा सके।
लड़कियों की संख्या के मुकाबले छात्रावास काफी कम
पंजाब यूनिवर्सिटी में लड़कियों के 11 छात्रावास हैं। इसमें दस सेक्टर-14 और सेक्टर-25 में हैं। वहीं एक वर्किंग वुमन छात्रावास है। इसके अलावा लड़कों के आठ छात्रावास हैं। लेकिन पीयू में छात्राओं की संख्या के मुकाबले छात्रावासों में जगह बहुत कम है। यहां दाखिला लेने वाली छात्राओं में केवल से 30 से 40 प्रतिशत को ही छात्रावास मिल पाता है, अन्य छात्राएं बाहर पीजी और फ्लैट में रहने को मजबूर हैं।
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पीएचडी के विद्यार्थियों को जेआरएफ के बाद भी छात्रावास मिलने में परेशानी
पीयू के छात्रावास में कमरों की संख्या की कमी चलते पीएचडी (जेआरएफ) शोधार्थी लड़कियों को भी कमरा आवंटित होने में परेशानी आ रही है। वहीं जेआरएफ होल्डर को भी अन्य छात्रों के साथ कमरा शेयर कर रहने के लिए कहा जा रहा है। जबकि नियमों के मुताबिक जेआरएफ को अकेले कमरा मिलता है। छात्रावास में बढ़ रहे दबाव के चलते अब डीएसडब्ल्यू दफ्तर की ओर से गेस्ट पर आवंटित कमरों का समय न बढ़ाकर उन्हें निकाला जा रहा है जिससे मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को वहां रखा जा सके।
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लड़कियों की संख्या के मुकाबले छात्रावास काफी कम
पंजाब यूनिवर्सिटी में लड़कियों के 11 छात्रावास हैं। इसमें दस सेक्टर-14 और सेक्टर-25 में हैं। वहीं एक वर्किंग वुमन छात्रावास है। इसके अलावा लड़कों के आठ छात्रावास हैं। लेकिन पीयू में छात्राओं की संख्या के मुकाबले छात्रावासों में जगह बहुत कम है। यहां दाखिला लेने वाली छात्राओं में केवल से 30 से 40 प्रतिशत को ही छात्रावास मिल पाता है, अन्य छात्राएं बाहर पीजी और फ्लैट में रहने को मजबूर हैं।
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