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Hindi News ›   Chandigarh ›   Four Laning of NH-73 Highway

बहुत जल्द फोरलेन हो जाएगा एनएच-73

Sat, 22 Feb 2014 03:26 PM IST
सुशील गंभीर /अमर उजाला, पंचकूला
सुशील गंभीर /अमर उजाला, पंचकूला Updated Sat, 22 Feb 2014 03:26 PM IST
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Four Laning of NH-73 Highway
पंचकूला से यमुनानगर तक नेशनल हाईवे-73 को स्टेट वाइल्ड लाइफ विभाग ने मंजूरी दे दी है। अब यह मामला नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ को भेज दिया गया है।
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मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फोरेस्ट डॉ. अमरिंद्र कौर की मौजूदगी में बैठक हुई थी, जिसमें इसे पास कर दिया गया। यानी हाईवे की फोरलेनिंग के लिए पिछले काफी समय से अटका हुआ एक और पड़ाव पूरा हो गया।

दरअसल, इस हाईवे का निर्माण कार्य शुरू होने में इको सेंसेटिव जोन और खोल रायतन वाइल्ड लाइफ सेंचुरी आड़े आ रहे थे। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने मई व सितंबर में क्लीयरेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक वाइल्ड लाइफ विभाग से मंजूरी नहीं मिली थी।
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कंपनी ने कहा था- देर हो रही है तो रद कर दो ठेका
इस हाईवे का निर्माण कार्य शुरू होने में देरी के चलते निर्माण कंपनी ने 31 जनवरी को एनएचएआई को पत्र लिखकर ठेका रद्द करने की बात कही थी।

ऐसा नियम है कि जब तक पूरी क्लीयरेंस नहीं मिलेगी, तब तक निर्माण शुरू नहीं हो सकता। इसके अलावा तीन जनवरी को एनएचएआई ने हरियाणा के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा था कि अफसरों की लापरवाही से प्रोजेक्ट में देरी हो रही है। अब लंबे अर्से के बाद स्टेट वाइल्ड लाइफ से मंजूरी मिली है।
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बाकी निर्माण पर उठे थे सवाल
एडवोकेट विजय बंसल व एडवोकेट रवि शर्मा ने आरोप लगाया कि सिर्फ 700 मीटर सड़क को इको सेंसेटिव जोन में बताकर एनओसी नहीं दी जा रही, जबकि इस क्षेत्र में होटल, स्कूल व अन्य निर्माण पहले ही हो चुके हैं। इस संबंध में प्रधानमंत्री को भी एक ज्ञापन भेजा गया है।


झूरीवाला ट्रीटमेंट प्लांट को भी मंजूरी
स्टेट वाइल्ड लाइफ विभाग ने इसी हाईवे के किनारे झूरीवाला में सोलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने को भी मंजूरी देकर मामला नेशनल अथॉरिटी को भेज दिया है।

इसके अलावा टेक्नोलॉजी पार्क में आईटी कंपनियां स्थापित करने के मामले को भी स्टेट बोर्ड से पास कर नेशनल बॉडी को भेज दिया गया है, क्योंकि यह एरिया भी इको सेंसेटिव जोन में है।

एनएच-73 में यह रुकावट थी। स्टेट से पास कर मामला नेशनल अथॉरिटी को भेज दिया गया है।
- ओसी माथुर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
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