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मोहाली के युवक के अंगदान से चार को मिली जिंदगी
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन की ओर से जीएमसीएच-32 को रिट्रायवल सेंटर घोषित किए जाने के बाद मेडिकल कॉलेज में पहला अंगदान कराया गया है। इसमें पीजआई की टीम ने भी सहयोग किया है। जीएमसीएच की ओर से समय पर सूचना देने और अंगदाता के परिजनों को अंगदान के लिए तैयार करने के बाद ग्रीन कॉरिडोर से मोहाली के युवक को पीजीआई पहुंचाया गया। पीजीआई की ब्रेन डेड कमेटी ने सर्टिफिकेशन जारी कर अंगदान कराने का फैसला लिया। अंगदान में मिले अंगों से चार लोगों की जान बचाई गई है। इसमें से यकृत, किडनी और अग्नाशय को पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को प्रत्यारोपित किया गया है जबकि हृदय का मिलान न होने पर ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से दिल्ली के आर एंड आर अस्पताल भेजा गया जहां मरीज को हृदय प्रत्यारोपित किया गया।
जीएमसीएच की निदेशक प्राचार्य प्रो. जसविंदर कौर ने बताया कि न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. विपिन गुप्ता के नेतृत्व में युवक का इलाज कर रही टीम ने समय पर परिजनों को अंगदान के लिए परामर्श दिया, वहीं रोगी को तय समय पर पीजीआई स्थानांतरित किया। दोनों ही अस्पतालों के बीच तालमेल व सहयोग से यह संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि युवक के परिजनों का निर्णय कई परिवारों के लिए खुशियों का कारण बन गया है।
26 अगस्त को सड़क हादसे में हुआ घायल
मोहाली निवासी 20 वर्षीय शाहनवाज को 26 अगस्त को सड़क हादसे में घायल होने पर सोहाना के एक हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। वहां स्थिति में सुधार न होने पर परिजनों ने 27 अगस्त को जीएमसीएच-32 में शिफ्ट कराया। यहां पर डॉक्टरों ने स्थिति में सुधार न होता देख एक सितंबर को उसे पीजीआई रेफर कर दिया। इससे पहले जीएमसीएच 32 के डॉक्टरों की टीम ने शाहनवाज के परिजनों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया और अंगदान के लिए तैयार किया। उनकी अनुमति मिलने पर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर शाहनवाज को पीजीआई शिफ्ट किया गया, जहां 2 सितंबर को पीजीआई की कमेटी ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
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तीन सितंबर को एयर लिफ्ट हुआ दिल
पीजीआई में शाहनवाज के दिल का मिलान न होने पर उसे तीन सितंबर को सुबह 8 बजे दिल्ली के लिए एयरलिफ्ट किया गया। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा है कि पीजीआई अंगदान जैसे नेक कार्य में बैक एंड सपोर्ट के लिए हमेशा मौजूद है। जीएमसीएच 32 ने यह कार्य कर आसपास के क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों के लिए मिसाल कायम की है। हम जीएमसीएच 32 के प्रयास की सराहना करते हैं। उन्होंने अन्य मेडिकल कॉलेजों को इससे प्रभावित होकर अंगदान को गति देने के लिए आगे आने की अपील की है।
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जीएमसीएच की निदेशक प्राचार्य प्रो. जसविंदर कौर ने बताया कि न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. विपिन गुप्ता के नेतृत्व में युवक का इलाज कर रही टीम ने समय पर परिजनों को अंगदान के लिए परामर्श दिया, वहीं रोगी को तय समय पर पीजीआई स्थानांतरित किया। दोनों ही अस्पतालों के बीच तालमेल व सहयोग से यह संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि युवक के परिजनों का निर्णय कई परिवारों के लिए खुशियों का कारण बन गया है।
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26 अगस्त को सड़क हादसे में हुआ घायल
मोहाली निवासी 20 वर्षीय शाहनवाज को 26 अगस्त को सड़क हादसे में घायल होने पर सोहाना के एक हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। वहां स्थिति में सुधार न होने पर परिजनों ने 27 अगस्त को जीएमसीएच-32 में शिफ्ट कराया। यहां पर डॉक्टरों ने स्थिति में सुधार न होता देख एक सितंबर को उसे पीजीआई रेफर कर दिया। इससे पहले जीएमसीएच 32 के डॉक्टरों की टीम ने शाहनवाज के परिजनों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया और अंगदान के लिए तैयार किया। उनकी अनुमति मिलने पर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर शाहनवाज को पीजीआई शिफ्ट किया गया, जहां 2 सितंबर को पीजीआई की कमेटी ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
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तीन सितंबर को एयर लिफ्ट हुआ दिल
पीजीआई में शाहनवाज के दिल का मिलान न होने पर उसे तीन सितंबर को सुबह 8 बजे दिल्ली के लिए एयरलिफ्ट किया गया। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा है कि पीजीआई अंगदान जैसे नेक कार्य में बैक एंड सपोर्ट के लिए हमेशा मौजूद है। जीएमसीएच 32 ने यह कार्य कर आसपास के क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों के लिए मिसाल कायम की है। हम जीएमसीएच 32 के प्रयास की सराहना करते हैं। उन्होंने अन्य मेडिकल कॉलेजों को इससे प्रभावित होकर अंगदान को गति देने के लिए आगे आने की अपील की है।