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Chandigarh News: रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी में धोखाधड़ी के चार आरोपी बरी
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चंडीगढ़। जिला अदालत ने रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) में जमा होने वाली फीस के 5.61 लाख के घोटाले में आरोपी चार पूर्व सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में अकाउंटेंट दीप सिंह, देव राम शर्मा, भूपिंदर सिंह, गुरविंदर सिंह और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नवप्रीत सिंह हैं। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने इन चारों के खिलाफ साल 2011 में इंचार्ज रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग ऑफिसर संजीव कोहली की शिकायत पर आईपीसी की धारा-409, 420 और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
आरोपियों के वकील दीक्षित अरोड़ा ने अदालत में दलील दी कि पुलिस ने चारों के खिलाफ वर्ष 2011 में केस दर्ज किया था। करीब 12 साल बाद 2023 में चालान पेश किया। वहीं, किसी भी आरोपी से रुपयों की रिकवरी भी नहीं हुई। आरएलए के वाहन सारथी साफ्टवेयर में कई तरह की खामियां थीं। इस वजह से चारों के खिलाफ आरोप साबित नहीं होने पर अदालत ने बरी कर दिया।
क्या था मामला...रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग ऑफिसर संजीव कोहली ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आरएलए ऑफिस में आम लोगों से फीस के बतौर जमा की गई राशि की कर्मचारी रसीदें तो जारी करते रहे लेकिन पैसा अपनी जेब में डालते थे। एक अप्रैल 2011 से 30 अगस्त 2011 तक आरोपियों ने रुपये आरएलए के बैंक खाते में जमा नहीं कराए। नियम के मुताबिक कैशियर को पूरे दिन का कैश अगले दिन ट्रेजरी ब्रांच में जमा करना होता था। अकाउंट की जांच की गई तो 5,61,286 रुपये के हेरफेर की बात सामने आई। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। पुलिस ने फूड एंड सप्लाई विभाग के अकाउंटेंट दीप सिंह, डीसी आफिस के अकाउंटेंट देव राम शर्मा, गवर्नमेंट प्रेस के अकाउंटेंट भूपिंदर सिंह, सीनियर अस्सिटेंट गुरविंदर सिंह और नवप्रीत सिंह खिलाफ केस दर्ज किया था।
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आरोपियों के वकील दीक्षित अरोड़ा ने अदालत में दलील दी कि पुलिस ने चारों के खिलाफ वर्ष 2011 में केस दर्ज किया था। करीब 12 साल बाद 2023 में चालान पेश किया। वहीं, किसी भी आरोपी से रुपयों की रिकवरी भी नहीं हुई। आरएलए के वाहन सारथी साफ्टवेयर में कई तरह की खामियां थीं। इस वजह से चारों के खिलाफ आरोप साबित नहीं होने पर अदालत ने बरी कर दिया।
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क्या था मामला...रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग ऑफिसर संजीव कोहली ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आरएलए ऑफिस में आम लोगों से फीस के बतौर जमा की गई राशि की कर्मचारी रसीदें तो जारी करते रहे लेकिन पैसा अपनी जेब में डालते थे। एक अप्रैल 2011 से 30 अगस्त 2011 तक आरोपियों ने रुपये आरएलए के बैंक खाते में जमा नहीं कराए। नियम के मुताबिक कैशियर को पूरे दिन का कैश अगले दिन ट्रेजरी ब्रांच में जमा करना होता था। अकाउंट की जांच की गई तो 5,61,286 रुपये के हेरफेर की बात सामने आई। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। पुलिस ने फूड एंड सप्लाई विभाग के अकाउंटेंट दीप सिंह, डीसी आफिस के अकाउंटेंट देव राम शर्मा, गवर्नमेंट प्रेस के अकाउंटेंट भूपिंदर सिंह, सीनियर अस्सिटेंट गुरविंदर सिंह और नवप्रीत सिंह खिलाफ केस दर्ज किया था।
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