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रिश्वत प्रकरण: 6 साल 80 सुनवाई के बाद आया फैसला, पूर्व एसपी देशराज को 3 साल की कैद
अमरीश शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 11 Aug 2018 09:46 AM IST
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पूर्व एसपी देशराज
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6 साल, 80 सुनवाई के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने चंडीगढ़ के पूर्व एसपी देशराज को एक लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में शुक्रवार को सजा सुना दी। बुधवार को अदालत ने एसपी को दोषी करार दिया था। अक्तूबर 2012 में सीबीआई ने देशराज को इंस्पेक्टर से एक लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। उस समय के सबसे चर्चित मामले में अब अदालत दोषी को 10 अगस्त को सजा सुनाएगी।
18 अक्तूबर 2012 को सीबीआई ने एजीएमयू कैडर 2008 के आईपीएस एसपी देशराज को इंस्पेक्टर अनोख सिंह की शिकायत पर उनके सेक्टर-23 स्थित सरकारी आवास से एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोप के मुताबिक यह रकम अनोख सिंह के खिलाफ चल रही विभागीय जांच में उसे राहत देने की एवज में मांगी गई थी। इसकी शिकायत अनोख सिंह ने सीबीआई से कर दी। शिकायत की पुष्टि होने पर सीबीआई ने ट्रैप लगाकर एसपी देशराज को एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
बचाव पक्ष की दलील
इससे पहले बचाव पक्ष की ओर से अंतिम बहस में दलील दी गई थी कि सीबीआई की ओर से पेश की गई ट्रैप के वक्त की रिकार्डिंग सही नहीं है। वहीं, दूसरी ओर इसमें तत्कालीन एसपी ने अपनी आवाज को पहचाना भी था। बचाव पक्ष के अनुसार, एसपी को फंसाने के लिए यह रकम प्लांट की गई थी। इंस्पेक्टर अनोख सिंह एसपी से मिलने आया था और जब एसपी एक मिनट के लिए दूसरे कमरे में गए तो उस वक्त उसने शायद यह पैसे उनकी ड्राअर में रख दिए होंगे। बचाव पक्ष ने एसपी देशराज और इंस्पेक्टर अनोख सिंह के बीच की कॉल रिकार्डिंग को भी झूठा बताया था। इसके अलावा ट्रैप के दौरान एसपी जिस इन्क्वायरी की बात कर रहे थे, वह एक कांस्टेबल रमेश की थी।
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सीबीआई वकील की दलीलें
सीबीआई की ओर से पेश सरकारी वकील केपी सिंह ने अंतिम बहस में दलील दी कि जांच एजेंसी ने एसपी देशराज के वॉयस सैंपल सीएफएसएल को भेजे थे, जो कि पॉजिटिव आए थे। इंस्पेक्टर पर उसे फंसाने के लिए रकम प्लांट करने पर उनकी दलील थी कि अगर उन्हें पैसे रखने का पता नहीं चला था तो उनके हाथ पर नोट पर लगा केमिकल कैसे मिला। यह सीएफएसएल रिपोर्ट से साबित हुआ है। रही बात इंक्वायरी की तो वह बचाव पक्ष जिस कांस्टेबल की इंक्वायरी की बात कर रहे हैं, उसकी जांच एसपी देशराज के पास थी ही नहीं। वहीं, एसपी देशराज उनसे बरामद हुए एक लाख रुपये के बारे में आज तक कोई जवाब नहीं दे सके हैं, कि वह उनके पास कहां से आए।
18 अक्तूबर 2012 : सीबीआई ने आईपीएस एसपी देशराज को सेक्टर-23 स्थित सरकारी आवास से एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया।
12 दिसंबर 2012 : देशराज को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
5 जुलाई 2013 : सीबीआई को गृह मंत्रालय से केस चलाने की अनुमति मिली।
7 जुलाई 2013 : सीबीआई ने चार्जशीट फाइल की।
14 अक्तूबर 2013 : देशराज के खिलाफ आरोप तय।
14 फरवरी 2014 : इंस्पेक्टर अनोख सिंह ने देशराज के खिलाफ गवाही दी।
30 जुलाई 2018 : ट्रायल समाप्त।
8 अगस्त 2018 : देशराज दोषी करार।
10 अगस्त 2018 : सजा पर फैसला।
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18 अक्तूबर 2012 को सीबीआई ने एजीएमयू कैडर 2008 के आईपीएस एसपी देशराज को इंस्पेक्टर अनोख सिंह की शिकायत पर उनके सेक्टर-23 स्थित सरकारी आवास से एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोप के मुताबिक यह रकम अनोख सिंह के खिलाफ चल रही विभागीय जांच में उसे राहत देने की एवज में मांगी गई थी। इसकी शिकायत अनोख सिंह ने सीबीआई से कर दी। शिकायत की पुष्टि होने पर सीबीआई ने ट्रैप लगाकर एसपी देशराज को एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
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बचाव पक्ष की दलील
इससे पहले बचाव पक्ष की ओर से अंतिम बहस में दलील दी गई थी कि सीबीआई की ओर से पेश की गई ट्रैप के वक्त की रिकार्डिंग सही नहीं है। वहीं, दूसरी ओर इसमें तत्कालीन एसपी ने अपनी आवाज को पहचाना भी था। बचाव पक्ष के अनुसार, एसपी को फंसाने के लिए यह रकम प्लांट की गई थी। इंस्पेक्टर अनोख सिंह एसपी से मिलने आया था और जब एसपी एक मिनट के लिए दूसरे कमरे में गए तो उस वक्त उसने शायद यह पैसे उनकी ड्राअर में रख दिए होंगे। बचाव पक्ष ने एसपी देशराज और इंस्पेक्टर अनोख सिंह के बीच की कॉल रिकार्डिंग को भी झूठा बताया था। इसके अलावा ट्रैप के दौरान एसपी जिस इन्क्वायरी की बात कर रहे थे, वह एक कांस्टेबल रमेश की थी।
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सीबीआई वकील की दलीलें
सीबीआई की ओर से पेश सरकारी वकील केपी सिंह ने अंतिम बहस में दलील दी कि जांच एजेंसी ने एसपी देशराज के वॉयस सैंपल सीएफएसएल को भेजे थे, जो कि पॉजिटिव आए थे। इंस्पेक्टर पर उसे फंसाने के लिए रकम प्लांट करने पर उनकी दलील थी कि अगर उन्हें पैसे रखने का पता नहीं चला था तो उनके हाथ पर नोट पर लगा केमिकल कैसे मिला। यह सीएफएसएल रिपोर्ट से साबित हुआ है। रही बात इंक्वायरी की तो वह बचाव पक्ष जिस कांस्टेबल की इंक्वायरी की बात कर रहे हैं, उसकी जांच एसपी देशराज के पास थी ही नहीं। वहीं, एसपी देशराज उनसे बरामद हुए एक लाख रुपये के बारे में आज तक कोई जवाब नहीं दे सके हैं, कि वह उनके पास कहां से आए।
18 अक्तूबर 2012 : सीबीआई ने आईपीएस एसपी देशराज को सेक्टर-23 स्थित सरकारी आवास से एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया।
12 दिसंबर 2012 : देशराज को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
5 जुलाई 2013 : सीबीआई को गृह मंत्रालय से केस चलाने की अनुमति मिली।
7 जुलाई 2013 : सीबीआई ने चार्जशीट फाइल की।
14 अक्तूबर 2013 : देशराज के खिलाफ आरोप तय।
14 फरवरी 2014 : इंस्पेक्टर अनोख सिंह ने देशराज के खिलाफ गवाही दी।
30 जुलाई 2018 : ट्रायल समाप्त।
8 अगस्त 2018 : देशराज दोषी करार।
10 अगस्त 2018 : सजा पर फैसला।