बगावत पर भावुक हुए प्रकाश सिंह बादल, बोले- ढींढसा जान भी मांगते तो हंसकर दे देता
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पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि सुखदेव सिंह ढींढसा को पार्टी में जितना सम्मान दिया जाता था, आज तक किसी भी नेता को नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल पार्टी अध्यक्ष होने के बावजूद सेक्रेटरी जनरल बड़े ढींढसा के पैरों को हाथ लगाया करते थे। उन्होंने कहा कि ढींढसा के बिना संगरूर और बरनाला में ही नहीं बल्कि पूरी पार्टी में पत्ता नहीं हिलता था।
वह हैरान हैं कि आखिर किन मजबूरियों के कारण उन्होंने पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा। यह पहली बार है जब बड़े बादल ने ढींढसा परिवार की पार्टी से बगावत पर बयान दिया है। बादल शिरोमणि अकाली दल की तरफ से रविवार को स्थानीय अनाज मंडी में कांग्रेस सरकार के खिलाफ आयोजित रोष रैली को संबोधित कर रहे थे। हालांकि रोष रैली के दौरान अकाली नेताओं के निशाने पर प्रदेश सरकार से ज्यादा ढींढसा परिवार रहा। इस रोष रैली में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के साथ पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के अलावा भाजपा नेता भी मौजूद रहे।
रैली के दौरान बड़े बादल ने यहां तक कह दिया कि मैं ढींढसा के साथ सिर्फ राजनीतिक मसलों पर ही विचार नहीं करता था, बल्कि पारिवारिक मसलों पर भी उनके साथ राय मशविरा करता रहता था। हमने अपनी बेटियों के विवाह तक भी ढींढसा और ब्रहमपुरा के साथ बातचीत करने के बाद किए थे। यदि ढींढसा उनकी जान भी मांग लेते तो उन्होंने जवाब नहीं देना था।
बड़े बादल ने भावुक होते हुए कहा कि बेगानों के सहारे अपने सिर पर ताज टिकाना शोभा नहीं देता।। एक कतरा भी दरिया से अलग होकर अपना अस्तित्व गंवा बैठता है। उन्होंने कहा कि कुदरत ने ढींढसा परिवार से एक ऐसा फैसला करवा लिया है जो उनके लिए नुकसानदेह साबित होगा। इससे परमिंदर का सियासी भविष्य भी धुंधला हो गया है।
शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने ढींढसा परिवार को गद्दार कहा। सुखबीर ने कहा कि ढींढसा परिवार ने पार्टी की पीठ में छुरा घोंपकर गद्दारी की है। सुखबीर ने कहा कि मैं 20-25 साल की सियासत में हमेशा बड़े ढींढसा के पांव हाथ लगाता था और उनके द्वारा कहा जाने वाला कोई भी काम करके खुद उनके घर जाकर रिपोर्ट देता था। अब भी मैंने इस मसले पर छह बार ढींढसा से माफी भी मांगी।
यहां तक भी कहा कि यदि वह चाहते हैं तो मैं अखबारों में भी सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने को तैयार हूं लेकिन ढींढसा परिवार कांग्रेस के हाथ चढ़कर पार्टी को खत्म करने पर तुल गए, जो पार्टी को कभी मंजूर नहीं होगा। अकाली दल के प्रांतीय प्रवक्ता विनरजीत सिंह गोल्डी ने कहा कि कोई भी पार्टी से बड़ा नहीं होता। पार्टी का वफादार होना सबसे जरूरी है।
इस मौके पर पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया, एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल, पूर्व मंत्री दलजीत सिंह चीमा, जत्थेदार तोता सिंह, सिकंदर सिंह मलूका, चरणजीत सिंह बराड़, अकाली दल के प्रांतीय प्रवक्ता विनरजीत सिंह गोल्डी, सीनियर अकाली नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा, भाजपा के जिलाध्यक्ष रणदीप सिंह दियोल, सरजीवन जिंदल और नगर काउंसिल के अध्यक्ष रिपुदमन सिंह ढिल्लों मौजूद थे।