हरियाणा: दो बार विधायक रहे परमेंद्र ढुल ने भाजपा छोड़ी, बोले- अब लड़ेंगे किसानों की लड़ाई
- बोले- कृषि कानूनों के विरोध में लिया फैसला, पार्टी नेताओं से नहीं मिला संतोषजनक जवाब
- ढुल के बेटे एडवोकेट रविंद्र सिंह ने भी प्रदेश सरकार में अतिरिक्त महाधिवक्ता के पद से दिया त्यागपत्र
विस्तार
हरियाणा के जुलाना से दो बार इनेलो से विधायक रह चुके और भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले परमेंद्र ढुल ने कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार को भाजपा छोड़ दी। ढुल ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा भाजपा में पार्टी के मंच पर भी उठाया था लेकिन वरिष्ठ नेता सिर्फ जुमलेबाजी करते रहे।
उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके चलते उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अब वे किसानों की लड़ाई लड़ेंगे और भविष्य की राजनीति पर जल्द ही फैसला करेंगे। इससे पहले कार्यकर्ताओं की बैठक में परमेंद्र ढुल तीन कानूनों पर सवाल उठा चुके थे।
सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में उन्होंने कहा कि घुटनों के बल चलने के बजाय मैं खड़ा होकर मरना पसंद करूंगा व किसान और मजदूरों की चिता पर कथित विकास एवं सत्ता सुख मुझे स्वीकार्य नहीं हैं। इसके साथ ही प्रदेश सरकार में अतिरिक्त महाविधवक्ता के पद पर रहे उनके बेटे रविंद्र सिंह ने भी त्यागपत्र दे दिया है।
मंगलवार को अर्बन एस्टेट स्थित अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए परमेंद्र ढुल ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को खुला त्यागपत्र भेजा है। साथ ही त्यागपत्र भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष को ई-मेल से भी भेजा है। ढुल ने कहा कि भाजपा को दोबारा सत्ता संभाले लगभग एक वर्ष हो चला है। चुनावों के दौरान कृषि व्यवस्था सुधारीकरण व किसान की आर्थिक दशा सुधारे के वादे किए गए थे। इसके चलते ही हर वर्ग ने भरपूर समर्थन भी भाजपा को दिया।
ढुल ने मुख्यमंत्री को लिखे त्यागपत्र में कहा है कि जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उन्हें भाजपा में शामिल करवाने का आग्रह किया था तो उन्होंने किसान वर्ग की भलाई से जुड़े कुछ अहम मुद्दों की शर्त भी रखी थी। आज इन सभी विषयों को तिलांजलि दी जा चुकी है। अब तक उन्हें उम्मीद थी, जिसके चलते वे चुप रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केंद्र सरकार द्वारा थोपे गए नए कृषि कानूनों पर आंख बंद कर हामी भर ली है।
मुख्यमंत्री को बताया केंद्र का क्लर्क
मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लिखे त्यागपत्र में ढुल ने कहा कि ‘एक मुख्यमंत्री होते हुए आपका काम केंद्रीय नेतृत्व का क्लर्क बनना नहीं, अपितु प्रदेश की जनता के हितों के प्रति समर्पित रहते हुए संवेदनशील बनना व उनके प्रति उदारता दिखाना होता है।’ आज प्रदेशभर के किसान आपकी तरफ उम्मीद भरी निगाहों से टकटकी लगाए हैं। मगर आपने उनकी उम्मीदों के साथ न्याय न करते हुए इन कानूनों को लागू कर किसानी की अस्मत पर हाथ डाला है।
दो महीने पहले ही की थी अध्यादेश वापस लेने की मांग
ढुल ने कहा कि दो माह पहले जब अध्यादेशों पर अपने विचार रखने के लिए उन्हें चंडीगढ़ हरियाणा निवास में बुलाया गया तब भी अध्यादेशों को तुरंत वापस लेने की मांग की थी। साथ ही इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे प्रावधान करने की भी मांग की थी।
कृषि कानूनों पर दोहरे मापदंड
पूर्व विधायक ढुल ने कहा कि एक ओर हरियाणा सरकार एवं भाजपा दावा करती रही है कि नए कानूनों के बावजूद मंडी व्यवस्था को चालू रखा जाएगा। खरीद केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही होगी। वहीं दूसरी ओर विभिन्न मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एपीएमसी एक्ट को बिहार की तर्ज पर समाप्त करने की बात की है। इन दोहरे मापदंडों की वजह से जिस कृषि व्यवस्था को दीनबंधु चौधरी छोटूराम ने स्थापित किया था, आज वह कृषि व्यवस्था ही खतरे में पड़ गई हैं। किसान लगातार तीन माह से सड़क पर है लेकिन सरकार के कानों पर जू तक नहीं रेंगती। ऐसे में यह सरकार व भाजपा के दोहरे मापदंड हैं।
पार्टी की ओर से नहीं कोई दिक्कत
मुझे परमेंद्र ढुल के इस्तीफे की जानकारी नहीं है और न ही मेरी कोई बात उनसे हुई है। पार्टी की तरफ से ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी। यह उनका फैसला है। राजू मोर, जिलाध्यक्ष, भाजपा।