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Hindi News ›   Chandigarh ›   Former DGP of Punjab Sumedh Saini Running from Police due to Case

इसे कहते हैं समय का फेर... कभी जिसके सर्वेसर्वा थे, आज उसी पुलिस से भाग रहे सुमेध सैनी

Sat, 12 Sep 2020 11:06 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 12 Sep 2020 11:06 AM IST
सार

  • आतंकवाद के दौर के ढेरों दाग बढ़ा रहे सैनी की चिंता
  • कभी सताए गए अफसर-मुलाजिम अब बने हैं खतरा
  • पकड़े गए तो नहीं छूटने देगा बहिबलकलां गोलीकांड

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Former DGP of Punjab Sumedh Saini Running from Police due to Case
सुमेध सिंह सैनी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इसे समय का फेर कहा जाए या अपने ओहदे के गलत इस्तेमाल का नतीजा, देश में सबसे कम उम्र में डीजीपी बनने वाले सुमेध सैनी आज उसी पुलिस फोर्स से बचते-छिपते फिर रहे हैं, जिसके वे करीब साढ़े तीन साल तक सर्वेसर्वा रहे। पंजाब पुलिस ने शुक्रवार को भी सुमेध सैनी की तलाश में उनके चंडीगढ़ स्थित आवास पर छापा मारा।
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इससे पहले वीरवार को दिल्ली में भी उनके आवास पर दबिश दी गई थी, जहां सैनी के पारिवारिक सदस्य तो मिले, लेकिन पूर्व डीजीपी का अब तक कोई पता नहीं चल सका। गौरतलब है कि सुमेध सैनी को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है, जिसे वह अपने आवास के बाहर ही छोड़कर गायब हुए हैं। एक आईएएस अधिकारी के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण और कत्ल मामले में अग्रिम जमानत के लिए पूर्व डीजीपी विशेष अदालत और हाईकोर्ट के बाद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे।
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लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका कागजात पूरे न होने के कारण डिफेक्ट लिस्ट में डाल दी। संभव है कि सैनी अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में फिर याचिका दायर करने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही एसआईटी और पंजाब पुलिस को सोमवार तक सुमेध सैनी को तलाशने और गिरफ्तार करने का एक और मौका मिल गया है।
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सुमेध सैनी का कार्यकाल विवादास्पद रहा

15 मार्च, 2012 को पंजाब पुलिस के डीजीपी का पद संभालने वाले सुमेध सैनी का कार्यकाल विवादास्पद रहा है और सूबे की जनता में उनकी प्रतिष्ठा मिश्रित रही है। एक ओर जहां कुछ लोग उन्हें आतंकवाद और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने वाले अधिकारी के तौर पर गिनते हैं।

वहीं पंजाब की ज्यादातर आबादी उन्हें आतंकवाद के दौर में मानवाधिकार उल्लंघन के ढेरों मामलों का दोषी मानती है। सैनी 1980 से 1990 के बीच सूबे में छह जिलों के एसएसपी रहे और उन्होंने आतंकवाद को सख्ती से कुचला। हालांकि पूरे कार्यकाल के दौरान सुमेध सैनी के खिलाफ केवल दो केस ही दर्ज हुए।

लेकिन गंभीर आरोपों के बावजूद सियासी वरदहस्त के चलते सैनी लगातार तरक्की करते हुए डीजीपी पद तक पहुंचे। सुमेध सैनी को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का वरदहस्त रहा और उन पर मनमाने ढंग से पुलिस महकमा चलाने के भी आरोप लगे। इस कड़ी में अपने मातहतों से दुर्व्यवहार के कई आरोप भी सामने आए, लेकिन सैनी के सियासी रुसूख के आगे किसी अन्य अधिकारी की एक न चली।

बहिबलकलां गोलीकांड को लेकर चर्चा में हैं

कुछ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुमेध सैनी इसलिए भी गिरफ्तारी से बच रहे हैं, क्योंकि पुलिस के अफसरों और मुलाजिमों से उनका बर्ताव बहुत बुरा रहा है। उन्होंने अपने ही मातहतों से जैसा सलूक किया है, उन्हें डर है कि अगर मुलजिम के रूप में पुलिस के हाथ लगे तो उनके साथ पूर्व अधिकारी जैसा सलूक नहीं होने वाला।

दूसरी ओर, सैनी इस समय 2015 के ही बहिबलकलां गोलीकांड को लेकर चर्चा में हैं। राज्य के सिख संगठन सैनी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। ऐसे में मुल्तानी मामले में आत्मसमर्पण करने के बाद हो सकता है कि सिख संगठनों के दबाव में राज्य सरकार उन्हें बहिबलकलां मामले में हिरासत से न निकलने दे।
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