चंडीगढ़ के पूर्व डीजीपी को बड़ा झटका: गृह मंत्रालय के खिलाफ गए थे कोर्ट, अब नक्सल एरिया में रवानगी
आईपीएस सुरेंद्र सिंह यादव को मार्च 2024 में चंडीगढ़ में डीजीपी के पद पर नियुक्त किया गया था। एक अप्रैल को उन्हें बीएसएफ दिल्ली में ट्रांसफर किया गया था। इस फैसले के खिलाफ वे कोर्ट चले गए थे। कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली है।
विस्तार
चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव को रातोंरात चंडीगढ़ से बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स में ट्रांसफर कर दिल्ली भेजने के जारी आदेशों के बाद अब एक और झटका लगा है। उन्होंने बीएसएफ में डीआईजी के पद पर नियुक्त करने के ट्रांसफर आदेशों के खिलाफ कोर्ट में आवेदन दायर किया था लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया है।
गृह मंत्रालय के खिलाफ कोर्ट में जाने वाले आईपीएस सुरेंद्र सिंह यादव को पहले ओरिएंटेशन के लिए राजस्थान भेजा गया और अब उन्हें बतौर डीआईजी नक्सल विरोधी अभियान बीएसएफ मुख्यालय छत्तीसगढ़ में भेजा गया है।
मार्च 2024 में हुई थी चंडीगढ़ में नियुक्ति
दरअसल एजीएमयूटी कैडर के 1997 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सुरेंद्र सिंह यादव दिल्ली में आर्थिक अपराध शाखा में कार्यरत थे और मार्च, 2024 में इन्हें केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ में डीजीपी के पद पर नियुक्त किया गया था। बतौर डीजीपी वह सबसे पहले उस समय चर्चा में आए जब इन्होंने लंबे समय से एक ही जगह जमे करीब 2763 जवानों का तबादला करवाया। इससे पहले इतनी अधिक संख्या में कभी जवानों के तबादले नहीं हुए थे। इसके बाद इन्होंने थानों में पुलिस जवानों सहित पब्लिक मीटिंगों में हिस्सा लेकर जनता की शिकायतें सुनी।
इन्होंने नशा तस्करी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में संलिप्त जवानों को रिटायर करवाया। वह भ्रष्टाचार के खिलाफ थे लेकिन उनके समय में यूटी पुलिस के कई जवान रिश्वत के मामलों में फंसे। इसके अलावा थानों में सेटिंग करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी केस तक दर्ज करवाए। डीजीपी यादव के रहते यूटी पुलिस के जवान भी मानसिक रूप से काफी परेशान हुए। बाकायदा इनके समय में सबसे अधिक जवानों ने तो पुलिस विभाग छोड़ने का फैसला किया और वीआरएस तक लेने के लिए आवेदन किया।
पुलिस जवानों द्वारा डीजीपी के खिलाफ वायरल की गई चिट्ठी
यूटी पुलिस के जवान अपने मुखिया से इतने परेशान हो चुके थे कि उन्होंने सोशल मीडिया में एक चिट्ठी भी वायरल करवा दी। इस चिट्ठी में उनके खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया गया था। लेकिन डीजीपी ने यह चिट्ठी लिखने का षड्यंत्र रचने वालों के खिलाफ अंदरखाते जांच करवाई और यूटी पुलिस के ही तीन जवानों के खिलाफ बाकायदा एक केस भी दर्ज करवाया गया। हालांकि वह मामला
बाद में ठंडे बस्ते में चला गया और उन जवानों के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
यह भी पढ़ें: सीबीआई इंस्पेक्टर को कैद: जरूरी काम कहकर मांगी थी नई गाड़ी, वापस मांगने पर दी धमकी; कोर्ट की सख्त टिप्पणी
रातोंरात ट्रांसफर के आदेशों ने हिलाई डीजीपी की कुर्सी
वहीं, एक अप्रैल की देर रात को गृहमंत्रालय की ओर से एक आदेश जारी किया गया जिसमें डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव का तबादला चंडीगढ़ से दिल्ली बीएसएफ में बतौर डीआईजी के पद पर कर दिया गया। आईपीएस यादव को तुरंत प्रभाव से दिल्ली मुख्यालय में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। यादव ने यूटी पुलिस के किसी भी अफसर से बातचीत तक नहीं की और न ही अपनी कोई विदाई पार्टी करवाई।
रातोंरात उन्होंने ट्रक भरकर अपना सामान दिल्ली भेज दिया और सुबह होते ही खुद भी दिल्ली पहुंच गए।
मुखालफत में मिली छत्तीसगढ़ नक्सल विरोधी मुख्यालय की कमान
इन तबादला आदेशों के खिलाफ आईपीएस एसएस यादव ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने से जूनियर अधिकारी के नीचे डीआईजी लगाए जाने वाले आदेशों को चुनौती दी। लेकिन कोर्ट ने भी इस आवेदन पर कोई खास गौर नहीं किया और इसे खारिज कर दिया। इसी बीच दिल्ली बीएसएफ मुख्यालय से गृह मंत्रालय ने उन्हें राजस्थान आईपीएस पुलिस एकेडमी में ओरिएंटेशन के लिए भेज दिया और अब उन्हें वहां से छत्तीसगढ़ में नक्सल एरिया में भेज दिया गया है जहां उनका कार्यस्थल नक्सल विरोधी अभियान कमान मुख्यालय होगा।