मिल्खा ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी मेरे जैसे
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फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह पीजीआई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मोदी की तुलना खुद के साथ कर डाली। मिल्खा सिंह ने कहा कि मेरी और पीएम नरेंद्र मोदी की कहानी एक जैसी है।
मोदी भी जमीन से उठकर प्रधानमंत्री बने हैं। उनमें विल पावर थी और कड़ी मेहनत की। मुझे भी नहीं पता था कि ओलंपिक क्या होता और पदक। मैंने बहुत मेहनत की। हास्पिटल में भर्ती हुआ। जान पर बन आई, लेकिन अपनी इच्छा नहीं छोड़ी। यहां तक पहुंचने में आर्मी का बहुत योगदान रहा।
यदि आर्मी ज्वाइन नहीं करता तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता। मिल्खा सिंह कहते हैं कि उनकी आखिरी ख्वाहिश है कि वे जीते-जी एक और मिल्खा देख सकें। ओलंपिक पदक जीतने का मेरा सपना अधूरा रह गया है। मैं देखना चाहता हूं कि मेरे जैसा एक और धावक आए और भारत को सम्मान दिलाए।
अच्छा डाक्टर वही है, जो मरीजों से बात करे
पीजीआई में आयोजित एनुअल कल्चर समारोह में पहुंचे फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह ने रेजिडेंट डाक्टर और स्टूडेंट से कहा कि अच्छा डाक्टर वही है, जो मरीजों से बात करे। मरीजों से दो मिनट सलीके से बात करने से उसकी आधी बीमारी ठीक हो जाती है।
कई डाक्टर अपने फील्ड में माहिर हैं, लेकिन वे मरीजों से बात नहीं करते हैं। ऐसे डाक्टर कतई अच्छे नहीं होते हैं। उन्होंने एक और सलाह दी कि डाक्टर हर मरीज को एक्सरसाइज के लिए जरूर प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि पीजीआई के डाक्टरों से उन्हें बहुत उम्मीद है और वे एक बेहतरीन डाक्टर के साथ अच्छे इंसान भी हैं।
इसके बाद मिल्खा सिंह ने हाफ मैराथन को पीजीआई के भार्गव आडिटोरियम से हरी झंडी दिखाई। इसमें रेजिडेंट डाक्टर, डिप्टी डायरेक्टर चेतन पीएस राव, उनके बच्चे और स्टूडेंट ने हिस्सा लिया। हाफ मैराथन पीजीआई से सुखना तक आयोजित की गई।
भाग मिल्खा भाग से किया वेलकम
मिल्खा सिंह जब भार्गव आडिटोरियम पहुंचे तो उनके स्वागत में भाग मिल्खा भाग मूवी की क्लीपिंग दिखाई गई। फिल्म देखकर उनकी आंखों से आंसू निकल आए।
उन्होंने कहा कि जब वे फिल्म देखते हैं तो उनके अपने आप ही आंसू निकल आते हैं। उसके बाद पीजीआई के डायरेक्टर वाइके चावला ने उनका स्वागत किया।
मिल्खा सिंह के सम्मान में आडिटोरियम में बैठे सभी डाक्टर, स्टूडेंट और बच्चों ने सीट से खड़े होकर तालियां बजाई।