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Chandigarh News: जीएमएसएच-16 में फ्लोरोस्कोपी मशीन ट्रायल पर शुरू, मरीजों को मिलेगी हाईटेक जांच सुविधा
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चंडीगढ़। जीएमएसएच-16 में मरीजों को आधुनिक जांच सुविधा देने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। अस्पताल में फ्लोरोस्कोपी एक्स-रे मशीन ट्रायल आधार पर शुरू की गई है। ट्रायल सफल रहने पर इस सुविधा को स्थायी रूप से जारी रखा जाएगा। फ्लोरोस्कोपी एक विशेष एक्स-रे तकनीक है, जो शरीर के आंतरिक अंगों की रियल-टाइम यानी गतिशील तस्वीरें दिखाती है।
यह सी-आर्म तकनीक के माध्यम से हड्डियों, जोड़ों, हृदय और पाचन तंत्र की गतिविधियों को लाइव देखने में मदद करती है। इससे डॉक्टरों को न केवल सटीक निदान में सुविधा मिलती है, बल्कि ऑपरेशन के दौरान मार्गदर्शन भी मिलता है। अस्पताल के डीएमएस डॉ. परमजीत सिंह ने बताया कि मशीन फिलहाल ट्रायल पर चलाई जा रही है। यदि इसके परिणाम संतोषजनक रहे तो इसे नियमित सेवा में शामिल किया जाएगा।
महीनों से चल रही परेशानी होगी दूर
अस्पताल में बड़ी एक्स-रे मशीनों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। वर्तमान में केवल एक बड़ी मशीन ही कार्यरत है जबकि दूसरी मशीन पिछले सात महीनों से खराब पड़ी है। ऐसे में मरीजों की जांच का दबाव बढ़ गया है। अधिकांश वार्डों और विभागों में फिलहाल पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के सहारे काम चलाया जा रहा है, जो सीमित उपयोग और गुणवत्ता के कारण पूरी जरूरत पूरी नहीं कर पा रही हैं। यदि फ्लोरोस्कोपी मशीन नियमित रूप से शुरू हो जाती है तो मरीजों को हाईटेक और सटीक जांच सुविधा यहीं उपलब्ध हो सकेगी। इससे जटिल मामलों में बेहतर उपचार संभव होगा और बाहरी रेफरल की आवश्यकता भी कम हो सकती है। अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि यह पहल मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
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यह सी-आर्म तकनीक के माध्यम से हड्डियों, जोड़ों, हृदय और पाचन तंत्र की गतिविधियों को लाइव देखने में मदद करती है। इससे डॉक्टरों को न केवल सटीक निदान में सुविधा मिलती है, बल्कि ऑपरेशन के दौरान मार्गदर्शन भी मिलता है। अस्पताल के डीएमएस डॉ. परमजीत सिंह ने बताया कि मशीन फिलहाल ट्रायल पर चलाई जा रही है। यदि इसके परिणाम संतोषजनक रहे तो इसे नियमित सेवा में शामिल किया जाएगा।
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महीनों से चल रही परेशानी होगी दूर
अस्पताल में बड़ी एक्स-रे मशीनों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। वर्तमान में केवल एक बड़ी मशीन ही कार्यरत है जबकि दूसरी मशीन पिछले सात महीनों से खराब पड़ी है। ऐसे में मरीजों की जांच का दबाव बढ़ गया है। अधिकांश वार्डों और विभागों में फिलहाल पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के सहारे काम चलाया जा रहा है, जो सीमित उपयोग और गुणवत्ता के कारण पूरी जरूरत पूरी नहीं कर पा रही हैं। यदि फ्लोरोस्कोपी मशीन नियमित रूप से शुरू हो जाती है तो मरीजों को हाईटेक और सटीक जांच सुविधा यहीं उपलब्ध हो सकेगी। इससे जटिल मामलों में बेहतर उपचार संभव होगा और बाहरी रेफरल की आवश्यकता भी कम हो सकती है। अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि यह पहल मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
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