'जल की जेल' में कैद चार हजार जिंदगियां, न पानी उतरा, न राहत पहुंची, यूं गुजर रही दिन-रात
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यमुना में आई बाढ़ के कहर से सैकड़ों लोगों की जिंदगी भंवर में फंस गई है। यमुना से सटे लापरा और पोबारी गांव 'जल की जेल' में कैद है। दोनों गांवों के चारों तरफ पानी का पहरा है और गलियों व घरों में दो से चार फीट पानी है। यहां की चार हजार आबादी ने घरों की छत और ऊंचे स्थानों पर शरण ले रखी है।
दो दिन से ना पानी उतरा है और ना ही राहत पहुंची है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लापरा भेजी गई एम्बुलेंस भी गांव से दो किमी पहले खड़ी की गई है। वहीं पोबारी गांव देश दुनिया से पूरी तरह से कटा हुआ है। यहां जरूरी सामान की भी किल्लत होनी शुरू हो गई है।
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लापरा-पानी के प्रहार से बेबस जिंदगी
शहर से केवल दस किमी दूर है लापरा गांव। यहां रहने वाले अरसद, वसीम, जमील, सज्जाद आदि ने बताया कि यमुना के पानी का प्रहार जिंदगी का इम्तिहान ले रहा है। बाढ़ से पहले अफसर और नेता आते हैं, कई वादे करके चलते जाते हैं लेकिन हर साल ये दंश झेलने को मजबूर हैं। गांव की हजारों एकड़ फसल बह गई है।
कई जगहों पर रास्ते कट चुके हैं। घर, स्कूल, दुकान, मंदिर हर जगह पानी है। स्कूल तो जलाशय बने हुए हैं। जहां बच्चे ट्यूब की नाव बनाकर अठखेलियां करते देखे जा सकते हैं। अधिकतर परिवारों ने छत पर तिरपाल डालकर सिर छिपाया है तो कई परिवारों ने थर्मल की राख से बनाएं गए ऊंचे रास्ते पर आश्रय लिया है।
पौबारी-हर साल आफत, राहत की कोई उम्मीद नहीं
पौबारी गांव में तस्वीर काफी भयावह है। यूपी की तरफ बसा हरियाणा का यह गांव, जहां पहुंचने का कोई रास्ता तक नहीं बचा। लोगों की जिंदगी आफत में पड़ गई है। ग्रामीण मोमीन, महफूज, मुदा हाजी, इमामूदीन, तासीन, अली हसन, सत्तार का कहना है कि दो दिन से बिजली नहीं है। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है।
बच्चे बीमार होने लगे हैं। लोग छत पर शिफ्ट हो गए हैं, लेकिन दुधारू पशु पानी में बंधे हुए हैं। यहां जिंदगी की रफ्तार थम गई है। ट्रैक्टर की बैटरी से मोबाइल चार्ज कर अपने जानकारों तक हाल बता रहे हैं। खाने-पीने की वस्तुएं खत्म होने को है। रास्ते ब्लॉक होने से बाहर जाने की कोई उम्मीद अभी नहीं है। जल्द राहत नहीं मिली तो भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।
यमुना से सटे कुछ गांवों में पानी घुस गया था। अब पानी उतरने लगा है। लापरा में सारी रात तहसीलदार मौजूद रहा। पौबारी गांव की स्थिति बारे एसडीएम से अपडेट लिया है। जिला प्रशासन की राहत टीमें अलर्ट है और पर्याप्त मात्रा में सामान उपलब्ध है। कुछ जगह खाने-पीने का सामान भिजवाया भी गया है। सुबह तक स्थिति सामान्य हो जाएगी।-मुकुल कुमार, डीसी, यमुनानगर
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शांत हुआ यमुना का रौद्र रूप, खतरा अभी टला नहीं
रविवार को रौद्र रूप में आई यमुना, अब धीरे-धीरे शांत होने लगी है लेकिन खतरा अभी टला नहीं है और जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ढाई गुणा ज्यादा है। रविवार को जहां आठ लाख 28 हजार क्यूसेक पानी रिकॉर्ड किया गया था। वहीं सोमवार को यह कम होकर ढाई लाख क्यूसेक रह गया।
ताजा स्थिति जानने के लिए दोपहर को डीसी मुकुल कुमार ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को साथ लेकर हथिनीकुंड बैराज और ताजेवाला हेडवर्क्स का दौर किया। उधर, हथिनीकुंड से छोड़े गए आठ लाख क्यूसेक पानी ने सोमवार अलसुबह जठलाना और गुमथला क्षेत्र में जमकर तबाही मचाई।