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बीस फुट पानी भरा, सेना न आती तो शायद ही बचते

Wed, 10 Sep 2014 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कैथ्ाल
ब्यूरो/अमर उजाला कैथ्ाल Updated Wed, 10 Sep 2014 11:45 PM IST
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Flood in J&K, Kaithal's family rescued by Army
कैथल। श्रीनगर के जवाहर नगर में करीब 20 फुट तक पानी भरा था। धराशाई हो रहे मकानों के नीचे नीचे कई लोग दव गए। हमारा पूरा परिवार दहशत में था। सेना की मदद से ही हम सकुशल लौटे हैं।
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यह कहना है श्रीनगर में आई त्रासदी से सुकशल लौटे गांव कोटड़ा निवासी जगबीर सिंह का। वे बुधवार को अपने परिवार सहित कुरुक्षेत्र अपनी ससुराल पहुंचे।

सुबह चार बजे ही सड़के लबालब हो गई
‘अमर उजाला’ से बातचीत में जगबीर दीक्षित ने बताया कि वे करीब 12 वर्ष पूर्व कश्मीर गए थे। जहां श्रीनगर स्थित शेर-ए- कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय में बतौर एचओडी कार्यरत हैं। जगबीर ने बताया कि वह जवाहर नगर स्थित डीएवी स्कूल के पास पत्नी मीनाक्षी शर्मा एवं बेटी ऋषिता (10) और बेटे सिमोन (05) के साथ रहते थे। लगातार चार-पांच दिन की बरसात के बाद पांच सितंबर की रात को उनके पास संदेश आया कि रात को पानी आ सकता है। उस इलाके में अक्सर दो से तीन फुट पानी आ जाता था।
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 सुबह चार बजे तक सड़कें लबालब हो र्गइं। दोपहर तक पानी घरों में घुस गया। इस कारण वे मकान की दूसरी मंजिल पर चले गए। इसके बाद दोपहर तक पहली मंजिल पूरी तरह से डूब गई तथा उनके पास का ही एक मकान गिर गया। कई लोग उसमें दब गए।
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दो रातें और तीन दिन छत पर काटे
जगबीर ने बताया कि वे जिस मकान में थे, उसके भी गिरने का भी खतरा था। इसीलिए अपने मकान मालिक के साथ पास में ही उनके डेंटल अस्पताल में चले गए। वहां दूसरी मंजिल पर शाम तक रहने के बाद सामने ही एक मकान था। एक स्थानीय बोट की मदद से उन्होंने अपने दोनों बच्चों को उस मकान में भेज दिया। वे स्वयं भी तैर कर उसमें चले गए तथा दूसरी बार आई बोट की सहायता से मकान मालिक एवं उनकी पत्नी भी सामने के मकान में आ गई। उस मकान में छत पर बैठकर उन लोगों ने दो रातें एवं तीन दिन बिताए। धीरे-धीरे खाने का सामान भी कम होने लगा था। मकान में कुल 40 लोग एकत्रित हो गए थे।

उनके सामने ही पड़ोस का मकान गिर गया और करीब 10 से 12 लोगों की मौत हो गई। इस दौरान मकान में बचे लोगों को उन्होंने अपने पास बुला लिया। इसके बाद सेना की एक बोट की मदद से वे कम पानी वाले इलाके से होते हुए मंगलवार को एयरपोर्ट पर पहुंचे। वहां लगभग 20 से 25 हजार लोगों की भीड़ अपने घरों को जाने के लिए खड़ी थी। एयरपोर्ट पर टिकट के लिए उनके पास पर्याप्त कैश नहीं था। सेना के अधिकारियों ने इडियन एयरलाइंस के विमान तक पहुंचाया। इसके बाद वह मंगलवार रात्रि किसी तरह चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से अपनी ससुराल कुरुक्षेत्र में पहुंचे हैं।

‘मेरे कई दोस्त अब भी वहां फंसे’
सेना द्वारा पूरी मदद एवं प्रयास किया जा रहा है। लेकिन वहां अभी भी लाखों लोग फंसे हैं। जिस मकान में वे फंसे हुए थे, उस मकान में अब भी 10 से 12 लोग फंसे है। उनके कई दोस्त परिवार सहित बाढ़ में फंसे हैं। उनसे कोई संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। जहां वे फंसे थे, वह श्रीनगर के बिल्कुल बीच का इलाका है। बाढ़ में स्थानीय प्रशासन एवं नेताओं का भी कोई अता-पता नहीं चल रहा।

सभी इस आपदा से प्रभावित हैं। यह एक दिन में हुआ और इसीलिए संभलने तक का समय नहीं मिला। जगबीर ने बताया कि कुछ सामान पानी और कुछ घर की छत पर रह गया है। किसका कितना नुकसान हुआ है, कोई अंदाजा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक वे वापस वहां जाएंगे, शायद ही कुछ बचेगा। बस, जान बच गई, इसके लिए शुक्रगुजार हैं।


पिता ने दी थी डीसी को शिकायत
मंगलवार को जगबीर दीक्षित से संपर्क न हो पाने के कारण उनके पिता जोगी राम दीक्षित ने डीसी एन के सोलंकी को शिकायत देकर सहायता की गुहार लगाई थी। डीसी ने एनडीआरएफ को इस बारे में सूचित कर दिया था। लेकिन बुधवार को जगबीर परिवार सहित कुरुक्षेत्र पहुंच गए।
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