अलर्टः शाहबाद मारकंडा में बह रहा 16 हजार क्यूसेक पानी, बाढ़ के खतरे में आधा दर्जन गांव

नरेंद्र शर्मा, कुरुक्षेत्र/शाहाबाद Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 20 Aug 2020 12:08 PM IST

सार

  • सरकार और प्रशासन की अनदेखी पर भड़के ग्रामीण
  • बोले हर साल होती है फसल बर्बाद, जिम्मेदार कौन?
  • आधा दर्जन से अधिक गांवों से एक सप्ताह से संपर्क टूटा
शाहबाद मारकंडा में बढ़ता जलस्तर
शाहबाद मारकंडा में बढ़ता जलस्तर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मानसून की दस्तक से पहले ही हर बार हरियाणा में शाहाबाद कस्बे के आसपास क्षेत्र के बाशिंदों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो जाती हैं। सरकार और जिला प्रशासन द्वारा किये जाने वाले दावे हर साल खोखले साबित होते हैं, लेकिन यहां के बाशिंदों की समस्य ज्यों की त्यों बनी रहती है।
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मारकंडा नदी में 16 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ने जाने पर पहले की भांति इस बार भी गांव काठवा, तंगौर, बिपर, फतेहगढ़ और अजराना सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों के एक सप्ताह से संपर्क टूटा हुआ है। वहीं, साथ ही इन गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है।


जहां राजनेता आदेश देने तक सीमित हैं, वहीं प्रशासनिक अधिकारी उचित व्यवस्था बनाने के जरूर दावे कर रहे हैं। हालांकि शाहाबाद के विधायक रामकरण काला का कहना है कि उन्होंने मारकंडा नदी के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था बनाने के लिए एसडीएम डॉ. किरण सिंह सहित संबंधित अधिकारियों की मीटिंग के दौरान आदेश दिए थे।

अगर किसी गांव के सरपंच को उनके गांव संबंधित कोई समस्या थी तो उन्होंने समय रहते लिखित में शिकायत सौंपनी थी, ताकि उसी समय समाधान कराया जा सके। बताया कि पीछे से मारकंडा नदी में पानी छोड़ा गया है, जिसकी वजह से यहां पानी का स्तर बढ़ा है।

सफाई व्यवस्था को लेकर गुहार लगाई जाती

वहीं, तंगौर, काठवा सहित कई गांव के ग्रामीणों का कहना है कि हर बार सरकार के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के समक्ष मारकंडा नदी की सफाई व्यवस्था को लेकर गुहार लगाई जाती है, लेकिन उन्हें झूठा आश्वासन के अलावा समय रहते कोई समाधान नहीं कराया। बताया गया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार जारी बारिश से कारण यहां मारकंडा में पानी का स्तर बढ़ जाता है।

मारकंडा नदी, रून नदी, वेघना नदी और साढौरा नदी आपस में मिलती हैं, जिस कारण पानी भारी मात्रा में एकत्रित हो जाता है, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से आगे निकाला जाता है और यह पानी शाहाबाद की मारकंडा नदी में पहुंचता है। मारकंडा नदी का पानी गांव कलसाना, मलिकपुर, गुमटी, कठवा, मुगलमाजरा सहित कई क्षेत्रों में मार करता है।

मारकंडा नदी में पहाड़ों के पानी के साथ-साथ काला अंब और सढोरा नदी तथा वेघना नदी का भी पानी पहुंचता है। हर वर्ष इस बरसाती पानी की मार गांव अरुप नगर, गुमटी, दयाल नगर, मुगलमाजरा, मदनपुर व मोहनपुर आदि गांवों को सहनी पड़ती है। हालांकि पिछले कई दिनों से पानी के आने का क्रम जारी है और यह पानी लोगों के खेतों, कठवा गांव की गलियों आदि में मार कर चुका है।

शाम तक नदी में बह रहा था 16 हजार क्यूसेक पानी
बुधवार शाम तक 16 हजार क्यूसेक पानी नदी में बहता रहा था। गेज रीडर रोशन लाल ने बताया कि देर रात तक पानी और बढ़ने की आशंका है। वहीं, नदी में बढ़ रहे पानी के स्तर पर अब प्रशासन की पूरी नजर लगाए हुए है और राहत प्रबंध भी किए जा रहे हैं।

नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह संधू ने बताया कि नदी के साथ लगते सभी गांवों में मुनादी करवाई गई है, कश्तियों की व्यवस्था की है, संबंधित विभाग राहत कार्यों पर लगे हैं और अगर नदी के पानी की मार गांवों में होती है तो वहां के लोगों के रहने की व्यवस्था शहर की धर्मशालाओं और गांव के सरकारी स्कूलों में की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है।

गांव कठवा और डेरा बाजीगर में घुसा नदी का पानी

मारकंडा नदी में आए पानी की मार गांव कठवा और डेरा बाजीगार में हो चुकी है, जिस कारण डेरा बाजीगर कॉलोनी के कुछ परिवारों ने मंदिर में शरण ली है। वहीं, गांव कठवा में खेत पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। सड़कों पर पानी बहने के साथ ही गांव के स्कूल व आंगनबाड़ी में पानी लबालब भर गया है। धान की फसल खराब होने की कगार पर पहुंच गई है वहीं पशुओं के चारा पूर्णतया नष्ट हो गया है।

रास्ते हुए बंद, ट्रैक्टर के माध्यम से हो रहा आवागमन
गांव कठवा के सरपंच अमरिंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन की अनदेखी के चलते हर साल कई गांव में बाढ़ आती है और किसानों को लाखों रुपये नुकसान उठाना पड़ता है। बताया कि कुछ समय पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव का दौरा किया था और समस्याओं को जाना था। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि बाढ़ के पानी को रोकने के लिए समाधान किया जाएगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

हर साल सैकड़ों एकड़ होती है फसल नष्ट : नेत्रपाल
गांव तंगौर के सरपंच नेत्रपाल ने कहा कि हर साल मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण आसपास के क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है, लेकिन प्रशासन इससे सबक लेने की बजाय ग्रामीणों को गुमराह करता है। प्रशासन को चाहिए कि मानसून से पहले मारकंडा नदी की खुदाई कराई जाए, ताकि बांध न टूटे। उन्होंने शीघ्र ही शाहाबाद से झांसा तक नदी की सफाई करने की मांग की।

एसडीएम डॉ. किरण सिंह ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में कई दिनों से हो रही तेज वर्षा के कारण मारकंडा नदी में जलस्तर बढ़ गया है। शाहाबाद मारकंडा क्षेत्र में मारकंडा नदी के पास जल की स्थिति कंट्रोल में है अधिकारियों की गठित टीम में 24 घंटे मारकंडा नदी के जल स्तर पर नजर रखे हुए है।

बारिश को देखते हुए मारकंडा नदी में जल स्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है जिसके कारण मारकंडा नदी के पास लगते गांव में मुनादी करवा कर अलर्ट जारी कर दिया गया है। मारकंडा नदी के साथ रहने वाले झुग्गी झोपड़ी वासियों को नजदीक के मंदिरों और धर्मशाला में शिफ्ट किया जा रहा है।

अगर जरूरत पड़ती है तो नगर की सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से सहयोग लिया जाएगा, ताकि बरसात के कारण किसी को भी किसी दिक्कत का सामना ना करना पड़े। बरसात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को आदेश दिए गए कि नगर व गांव का दौरा कर लोगों को बारिश के कारण होने वाली बीमारियां मलेरिया तथा डेंगू के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ उनका चेकअप किया जाए।
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