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प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर सीएचबी ने लुटा दिए 60 लाख रुपये, फिर भी नहीं मिले फ्लैट

Thu, 25 Jul 2019 01:50 PM IST
खुशबू गोयल अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 25 Jul 2019 01:50 PM IST
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फाइल फोटो
चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के धड़ाम होने के साथ ही लाखों रुपये भी बर्बाद चले गए, क्योंकि सीएचबी ने योजना को धरातल पर लाने के लिए पानी की तरह लाखों रुपये बहा डाले। डेढ़ साल से अधिक समय तक चली पीएमएवाई चयन प्रक्रिया में सीएचबी ने करीब 60 लाख रुपये लुटा दिए।
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अब आरोप लग रहे हैं कि जब पहले से ही पता था कि केंद्र 3.1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के रेट पर जमीन नहीं देगा तो उसके बावजूद इस बोगस प्रोजेक्ट पर अफसर इतने मेहरबान कैसे हो गए। बताते चलें कि इस योजना के तहत 9 हजार लाभार्थियों का चयन किया गया था। प्रधानमंत्री आवास योजना पर ब्रेक लगने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन पर पैसे की बर्बादी के आरोप लग रहे हैं।
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सूत्रों की मानें तो केंद्र ने पहले ही प्रशासन को मार्केट रेट के आधार पर ही जमीन देने की बात कही थी। इसके बाद भी प्रशासन इस बोगस प्रोजेक्ट लाखों रुपये खर्च करता रहा है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पीएमएवाई प्रोजेक्ट पर कम से कम 60 लाख रुपये खर्च कर दिए गए हैं लेकिन यह रकम वास्तविक में और ज्यादा हो सकती है। इसके बाद भी आम लोगों को योजना का कोई लाभ नहीं मिला सका।
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इस तरह खर्च किए लाखों रुपये

पीएमएवाई योजना के तहत पात्रों के चयन को लेकर अक्टूबर-नवंबर 2017 में  20-20 के कैंप लगे। इसके अलावा दो महीने तक शनिवार और रविवार को स्पेशल कैंप फार्मों की छंटनी के लिए लगाए गए। प्रत्येक कैंप में सीएचबी के लगभग 150 कर्मचारी लगातार 20 घंटे तक अपनी सेवाएं दीं। कैंप के दौरान लगे टेंट और बिजली-पानी के लाखों में पेमेंट की गई है।

इसके अलावा प्रतिदिन कैंपों की सुरक्षा के लिए सैकड़ों की संख्या में पुलिस बल की तैनाती भी की जा रही थी। सीएचबी की ओर से योजना में आवेदन करने वालों को कई बार पोस्ट ऑफिस से लेटर भेजे गए। इसके लिए बाकायदा टेंडर भी निकाले गए थे। सूत्रों की मानें तो इस हिसाब से देखे तो डेढ़ साल तक चली पीएमएवाई योजना में प्रशासन ने करीब 60 लाख से अधिक खर्च कर दिए।

केंद्र ने मार्केट रेट से कम पर जमीन देने से किया मना

प्रशासन ने 20 मार्च 2017 को गरीब लोगों को घर देने के लिए पीएमएवाई प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके लिए ईडब्ल्यूएस, एलआईजी और एमआईजी का डिमांड सर्वे किया था। योजना के तहत 1.27 लाख लोगों ने अप्लाई किया था। बोर्ड ने पहले 444 लोगों के नामों की फाइनल लिस्ट जारी की थी। जो लोग बाद में किसी कारण प्रपत्र पूरे नहीं कर पाए थे, उन्हें एक और मौका दिया था।

यही वजह है कि छंटनी के बाद कुल 9 हजार योग्य लोग पाए गए थे। पीएमएवाई योजना केतहत इन्हीं चयनित लोगों को आवास मिलना था। केंद्र ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन दर मार्केट रेट्स 30 करोड़ प्रति एकड़ से कम पर देने को तैयार नहीं है। इसके चलते इस प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गया है।

 
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