{"_id":"5e5828f08ebc3ef3a47e69b0","slug":"five-scientists-resolve-alakh-will-awaken-towards-science-chandigarh-news-pkl367951099","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच वैज्ञानिकों का संकल्प, साइंस के प्रति जगाएंगे अलख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच वैज्ञानिकों का संकल्प, साइंस के प्रति जगाएंगे अलख
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। विज्ञान के प्रति कम होते रुझान को पांच वैज्ञानिक बढ़ा रहे हैं। वह युवाओं में विज्ञान के प्रति जागरूकता ही पैदा नहीं कर रहे बल्कि अपने रिसर्च के जरिये देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके रिसर्च को देश दुनिया में एक अलग स्थान मिला है। यह वैज्ञानिक आम नहीं खास हैं, उनकी उपलब्धि भी काफी बड़ी हैं। कई नाम कई रिकॉर्ड हैं। वर्तमान
में इन्होंने विज्ञान के बढ़ावे का जिम्मा संभाला है। साथ ही युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित कर रहे हैं। कोई स्कूल-कॉलेजों में विज्ञान का प्रचार-प्रसार कर रहा है तो कोई अपनी कक्षाओं में ज्ञान बांट रहा है। आइए जानते हैं ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के अवसर पर आज इन पांच वैज्ञानिकों के बारे में-
फोटो सहित
कैंसर पर प्रो. सोबती ने किया अधिक कार्य
पीयू के पूर्व वाइस चांसलर पद्मश्री प्रो. आरसी सोबती के नाम कई रिकॉर्ड हैं। बायोटेकभनोलॉजी से जुड़े रहे प्रो. सोबती ने कैंसर पर अधिक कार्य किया और ख्याति प्राप्त की। वर्तमान में वे स्कूल, कॉलेजों में विज्ञान का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। इस समय वे भारतीय सभ्यता की साइंस का प्रचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि विज्ञान एक कर्म है, लोगों के माइंड सेट को बदलना होगा। इसके लिए वह काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
प्रो. भूपेंद्र सिंह भूप ने क्वालिटी बाई डिजाइन का पढ़ाया पाठ
फोटो-
पीयू के फार्मास्युटिकल साइंस के प्रो. भूपेंद्र सिंह भूप ने क्वालिटी बाई डिजाइन का पाठ देश ही नहीं पूरी दुनिया की फार्मा इंडस्ट्री को पढ़ाया है। उनके नाम 300 से अधिक पब्लिकेशंस हैं। वह कहते हैं कि वैज्ञानिक सोच धीरे धीरे विकसित हो रही है और देश आगे बढ़ रहा है। युवाओं को विज्ञान में और रुचि दिखानी होगी। वह कहते हैं कि विज्ञान के प्रति युवाओं को वह जगा रहे हैं।
प्रो. रजत संधीर ने न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में किया बड़ा काम
फोटो---
पीयू के सीनेटर एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. रजत संधीर को न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में काम करने की महारथ हासिल है। उन्होंने एल्जाइमर से लेकर कई बीमारियों पर रिसर्च कर नाम कमाया है। वह कहते हैं कि विज्ञान और पर्यावरण के बीच संतुलन बैठाना होगा ताकि जलवायु परिवर्तन के कारण यह न बनें। विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ना है।
प्रोफेसर एमसी सिद्धू पौधों के नाम से उनकी उपयोगिता बताने में जुटे
फोटो-
पीयू के बॉटनी विभाग के प्रोफेसर एमसी सिद्धू के नाम अनजान पेड़-पौधों के नाम खोजने का रिकॉर्ड है। सुखना लेक में पांच साल पहले मिली बूटी का नाम भी 24 घंटे में खोजकर इन्होंने ही रिकॉर्ड बनाया था। कई पब्लिकेशन इनके नाम हैं और इंपैक्ट फैक्टर भी अधिक है। वह विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति प्रेम का संदेश दे रहे हैं। साथ ही लोगों को पौधों के नाम से उसकी उपयोगिता बताने में जुटे हैं।
----
स्कूली बच्चों को जापान तक पहुंचाया
फोटो-
डॉ. परमजीत सिंह राजकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेक्टर आठ में लेक्चरर हैं। उन्होंने बेस्ट साइंस टीचर, स्टेट टीचर व सीबीएसई नेशनल टीचर अवार्ड जीते हैं। उन्होंने कई स्कूलों के विद्यार्थियों के अंदर वैज्ञानिक सोच विकसित करके जापान तक विज्ञान प्रतियोगिता में पहुंचाया है। वर्तमान में वह विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच उत्पन्न करने में जुटे हैं।
विज्ञापन
में इन्होंने विज्ञान के बढ़ावे का जिम्मा संभाला है। साथ ही युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित कर रहे हैं। कोई स्कूल-कॉलेजों में विज्ञान का प्रचार-प्रसार कर रहा है तो कोई अपनी कक्षाओं में ज्ञान बांट रहा है। आइए जानते हैं ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के अवसर पर आज इन पांच वैज्ञानिकों के बारे में-
विज्ञापन
फोटो सहित
कैंसर पर प्रो. सोबती ने किया अधिक कार्य
पीयू के पूर्व वाइस चांसलर पद्मश्री प्रो. आरसी सोबती के नाम कई रिकॉर्ड हैं। बायोटेकभनोलॉजी से जुड़े रहे प्रो. सोबती ने कैंसर पर अधिक कार्य किया और ख्याति प्राप्त की। वर्तमान में वे स्कूल, कॉलेजों में विज्ञान का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। इस समय वे भारतीय सभ्यता की साइंस का प्रचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि विज्ञान एक कर्म है, लोगों के माइंड सेट को बदलना होगा। इसके लिए वह काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
प्रो. भूपेंद्र सिंह भूप ने क्वालिटी बाई डिजाइन का पढ़ाया पाठ
फोटो-
पीयू के फार्मास्युटिकल साइंस के प्रो. भूपेंद्र सिंह भूप ने क्वालिटी बाई डिजाइन का पाठ देश ही नहीं पूरी दुनिया की फार्मा इंडस्ट्री को पढ़ाया है। उनके नाम 300 से अधिक पब्लिकेशंस हैं। वह कहते हैं कि वैज्ञानिक सोच धीरे धीरे विकसित हो रही है और देश आगे बढ़ रहा है। युवाओं को विज्ञान में और रुचि दिखानी होगी। वह कहते हैं कि विज्ञान के प्रति युवाओं को वह जगा रहे हैं।
प्रो. रजत संधीर ने न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में किया बड़ा काम
फोटो---
पीयू के सीनेटर एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. रजत संधीर को न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में काम करने की महारथ हासिल है। उन्होंने एल्जाइमर से लेकर कई बीमारियों पर रिसर्च कर नाम कमाया है। वह कहते हैं कि विज्ञान और पर्यावरण के बीच संतुलन बैठाना होगा ताकि जलवायु परिवर्तन के कारण यह न बनें। विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ना है।
प्रोफेसर एमसी सिद्धू पौधों के नाम से उनकी उपयोगिता बताने में जुटे
फोटो-
पीयू के बॉटनी विभाग के प्रोफेसर एमसी सिद्धू के नाम अनजान पेड़-पौधों के नाम खोजने का रिकॉर्ड है। सुखना लेक में पांच साल पहले मिली बूटी का नाम भी 24 घंटे में खोजकर इन्होंने ही रिकॉर्ड बनाया था। कई पब्लिकेशन इनके नाम हैं और इंपैक्ट फैक्टर भी अधिक है। वह विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति प्रेम का संदेश दे रहे हैं। साथ ही लोगों को पौधों के नाम से उसकी उपयोगिता बताने में जुटे हैं।
----
स्कूली बच्चों को जापान तक पहुंचाया
फोटो-
डॉ. परमजीत सिंह राजकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेक्टर आठ में लेक्चरर हैं। उन्होंने बेस्ट साइंस टीचर, स्टेट टीचर व सीबीएसई नेशनल टीचर अवार्ड जीते हैं। उन्होंने कई स्कूलों के विद्यार्थियों के अंदर वैज्ञानिक सोच विकसित करके जापान तक विज्ञान प्रतियोगिता में पहुंचाया है। वर्तमान में वह विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच उत्पन्न करने में जुटे हैं।