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जीएमसीएच में एमडी एमएस की पहली काउंसलिंग 1 और 2 मई को, छात्र परेशान
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चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में एमडी एमएस में एडमिशन के लिए 1 और 2 मई को पहली काउंसिलिंग आयोजित की जाएगी। इस घोषणा से छात्रों में रोष है। उनका कहना है कि लॉकडाउन के चलते हवाई और रेल सेवाओं के अलावा बसों और टैक्सियों के बंद हैं। कॉलेज प्रशासन के ऑफलाइन काउंसिलिंग के निर्णय से छात्र परेशान हैं। वहीं कॉलेज प्रशासन के अनुसार उस दौरान छात्रों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग मेनटेन रखने के लिए उन्हें मेरिट के अनुसार बारी बारी से अलग अलग बुलाया जाएगा। एक दिन में चार शिफ्ट में काउंसिलिंग होगी।
कॉलेज प्रशासन ऑडिटोरियम की सातवीं मंजिल पर काउंसिलिंग का आयोजन करेगा। इसके लिए देश के कई राज्यों से अभ्यर्थियों ने भाग लेने के लिए इच्छा जताई है। पहला बैच सुबह 10 बजे, दूसरा दोपहर 12 बजे और तीसरा दोपहर 3 बजे और चौथा 3.30 पर बुलाया जाएगा। ये मानक दोनों दिन एक समान रहेगा। एक शिफ्ट में 13 छात्रों को बुलाया जाएगा। उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के हिसाब से ईमेल और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से इसमें शामिल होने की सूचना भेजी जाएगी, जिससे लॉकडाउन के दौरान काउंसिलिंग में आने में उन्हें परेशानी न हो। उस दौरान सभी छात्रों की स्क्रीनिंग की जाएगी। पूरी तरह सेनेटाइज होने के बाद ही उन्हें अंदर आने दिया जाएगा। अगर किसी मे कोरोना के लक्षण मिले तो उसकी टेली कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये काउंसिलिंग की जाएगी। वही इस सम्बंध में जब कॉलेज प्रशासन से बात की गई तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया।
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ये तो छात्रों को जानबूझकर कोरोना के खतरे में लाना है
हैरानी की बात है कि कॉलेज प्रशासन ने इस काउंसिलिंग के लिए जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया है कि सभी अभ्यर्थियों की कॉलेज में पहुंचने पर प्रवेश द्वार पर ही थर्मल स्कैनिंग होगी। अगर कोई अभ्यर्थी बुखार, खांसी, जुकाम और फ्लू से ग्रस्त पाया जाता है तो उसकी टेलि-कान्फ्रेंसिंग के जरिए काउंसिलिंग होगी। हमीरपुर और कांगड़ा जिला समेत अन्य जिलों से कई युवाओं ने चंडीगढ़ मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की है और अब वह चिकित्सक एमडी और एमएस के लिए पीजी कोर्सिज में दाखिला लेना चाहते हैं। इन अभ्यर्थियों के अभिभावकों डॉ. आरके शर्मा, सुरजीत पठानिया, सुरेश कुमार ने कहा कि उनके बच्चों ने चंडीगढ़- 32 सेक्टर से एमबीबीएस किया है। जो अब पीजी करना चाहते हैं। लेकिन सार्वजनिक यातायात के सभी साधन बंद हैं। दूसरा कोरोना संक्रमण के कारण पूरे देश में ऑनलाइन दाखिल और पढ़ाई हो रही है तो चंडीगढ़ कॉलेज प्रशासन इस महामारी से बेखबर क्यों बना हुआ है। काउंसिलिंग के दौरान रास्ते में अगर कोई बच्चा संक्रमण का शिकार हो गया तो उसका जिम्मेवार कौन होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से गुहार लगाई है कि इस बारे में चंडीगढ़ प्रशासन से बात कर शीघ्र उचित निर्णय लें।
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कॉलेज प्रशासन ऑडिटोरियम की सातवीं मंजिल पर काउंसिलिंग का आयोजन करेगा। इसके लिए देश के कई राज्यों से अभ्यर्थियों ने भाग लेने के लिए इच्छा जताई है। पहला बैच सुबह 10 बजे, दूसरा दोपहर 12 बजे और तीसरा दोपहर 3 बजे और चौथा 3.30 पर बुलाया जाएगा। ये मानक दोनों दिन एक समान रहेगा। एक शिफ्ट में 13 छात्रों को बुलाया जाएगा। उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के हिसाब से ईमेल और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से इसमें शामिल होने की सूचना भेजी जाएगी, जिससे लॉकडाउन के दौरान काउंसिलिंग में आने में उन्हें परेशानी न हो। उस दौरान सभी छात्रों की स्क्रीनिंग की जाएगी। पूरी तरह सेनेटाइज होने के बाद ही उन्हें अंदर आने दिया जाएगा। अगर किसी मे कोरोना के लक्षण मिले तो उसकी टेली कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये काउंसिलिंग की जाएगी। वही इस सम्बंध में जब कॉलेज प्रशासन से बात की गई तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया।
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ये तो छात्रों को जानबूझकर कोरोना के खतरे में लाना है
हैरानी की बात है कि कॉलेज प्रशासन ने इस काउंसिलिंग के लिए जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया है कि सभी अभ्यर्थियों की कॉलेज में पहुंचने पर प्रवेश द्वार पर ही थर्मल स्कैनिंग होगी। अगर कोई अभ्यर्थी बुखार, खांसी, जुकाम और फ्लू से ग्रस्त पाया जाता है तो उसकी टेलि-कान्फ्रेंसिंग के जरिए काउंसिलिंग होगी। हमीरपुर और कांगड़ा जिला समेत अन्य जिलों से कई युवाओं ने चंडीगढ़ मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की है और अब वह चिकित्सक एमडी और एमएस के लिए पीजी कोर्सिज में दाखिला लेना चाहते हैं। इन अभ्यर्थियों के अभिभावकों डॉ. आरके शर्मा, सुरजीत पठानिया, सुरेश कुमार ने कहा कि उनके बच्चों ने चंडीगढ़- 32 सेक्टर से एमबीबीएस किया है। जो अब पीजी करना चाहते हैं। लेकिन सार्वजनिक यातायात के सभी साधन बंद हैं। दूसरा कोरोना संक्रमण के कारण पूरे देश में ऑनलाइन दाखिल और पढ़ाई हो रही है तो चंडीगढ़ कॉलेज प्रशासन इस महामारी से बेखबर क्यों बना हुआ है। काउंसिलिंग के दौरान रास्ते में अगर कोई बच्चा संक्रमण का शिकार हो गया तो उसका जिम्मेवार कौन होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से गुहार लगाई है कि इस बारे में चंडीगढ़ प्रशासन से बात कर शीघ्र उचित निर्णय लें।
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