आर्थिक संकटः एक कार इस्तेमाल करेंगे मंत्री और अफसर, मोबाइल, लैंडलाइन व इंटरनेट भत्ते में कटौती
- बैंकों में जमा फंड खजाने में जमा कराने के आदेश जारी।
- ज्यादा विभाग संभाल रहे मंत्री/अफसर को सिर्फ एक कार।
- कर्मचारियों को मोबाइल व लैंडलाइन बिलों में कटौती।
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गंभीर वित्तीय संकट में घिरी पंजाब सरकार पैसा बचाने के नए-नए उपायों की खोज में जुट गई है। जहां भी दो पैसे बच सकें, बचा लेने की कोशिशों का ही नतीजा है कि सरकार ने स्टडी टूर, समारोहों/सेमिनारों के आयोजनों पर रोक लगाने के साथ ही अब कर्मचारियों को मोबाइल, लैंडलाइन व इंटरनेट के लिए दिए जा रहे भत्ते में कटौती कर दी है।
सभी सरकारी दफ्तरों द्वारा फर्नीचर व अन्य साजो-सामान खरीदने पर रोक लगा दी गई है और सरकारी कामकाज के लिए वाहन किराए पर लेने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। कैंप आफिसों पर रोक लगाते हुए सरकार ने अधिकारियों से अपने कार्यालयों में ही बैठकर काम करने की हिदायत जारी कर दी है।
इसके साथ ही प्रदेश के ऐसे मंत्री जिनके पास एक से अधिक विभाग हैं, को आने-जाने के लिए अब केवल एक वाहन दिया जाएगा। उनके बाकी विभागों के वाहनों के लिए सरकार कोई भत्ता नहीं देगी। इसके अलावा, राज्य के सभी सरकारी, अर्द्ध सरकारी संस्थानों, बोर्ड-निगमों, आयोगों व अन्य संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि उनके बैंक खातों में जमा राशि तुरंत सरकारी खजाने में जमा करा दी जाए।
उपरोक्त सभी हिदायतों के लिए सरकार की वित्त विभाग द्वारा अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं। एक नोटिस के तहत सभी विभागों से कहा गया है कि वे जो भी खर्च कर रहे हैं, उसके मुकाबले रसीद कम जेनरेट की जा रही है। ऐसे खर्च का पूरा हिसाब रखने के लिए अब विभागों से कहा गया है कि वे प्रत्येक तीन माह पर खर्च की रसीदें सरकारी खजाने में जमा कराएं।
चूंकि विभागों के खर्च की सीमा पहले से तय की जाती है, इसलिए तीन माह की रसीदों से यह पता चल सकेगा कि कौन से विभाग सीमा से अधिक खर्च कर रहे हैं। एक अन्य नोटिस के तहत, दफ्तरों के लिए फर्नीचर व अन्य साजो-सामान खरीदने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि नए स्थापित होने वाले दफ्तरों के लिए प्रबंधकीय विभाग की अनुमति से इस मद में एक लाख रुपये तक का खर्च किया जा सकेगा जबकि इससे भी ज्यादा खर्च की अनुमति संबंधित मंत्री की मंजूरी के बाद वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी होगी।
सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के मोबाइल बिल के भुगतान, आवास पर लगे लैंडलाइन फोन और इंटरनेट सुविधा पर भी सरकार द्वारा गत 24 नवंबर को लिए फैसले को लागू कर दिया गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि कई विभागों द्वारा सरकारी खजाने से फंड निकालकर अपने बैंकों में रख लिया जाता है और 31 मार्च को फंड अगले साल खर्च करने के लिए मंजूरी दिए जाने की मांग की जाती है या 31 मार्च को यह रकम ब्याज सहित खजाने में जमा करवा दी जाती है।
वहीं सरकार को खजाने में से फंड रिलीज करने के उद्देश्य से लिए जा रहे कर्ज पर अधिक ब्याज देना पड़ता है। राज्य सरकार ने अब फैसला लिया है कि अगर किसी भी विभाग ने खजाने से फंड रिलीज करवाकर बिना किसी जस्टीफिकेशन के बैंकों में रखा हुआ है तो वे यह सारा फंड खजाने में जमा कराएं।