आर्थिक संकटः सरकार की नजर कर्मचारियों की जेब पर, हड़ताल पर जाने वालों का काटेगी वेतन
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गंभीर आर्थिक संकट में घिरी पंजाब सरकार अपनी आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रही है। इसी कड़ी में सरकारी कर्मचारियों को दिए जा रहे टेलीफोन भत्ते में कटौती का प्रस्ताव तैयार करने के बाद राज्य सरकार ने अब फैसला लिया है कि अगर कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो हड़ताल की अवधि के लिए उनका वेतन काट लिया जाएगा। राज्य सरकार ने अपने इस फैसले संबंधी तैयार नीति को मंजूरी भी दे दी है।
वित्त विभाग ने हाल ही में एक प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा है, जिसमें कर्मचारियों को अक्तूबर, 2011 से मिल रहे मोबाइल फोन भत्ते में कटौती करने की सलाह दी गई है। फिलहाल सरकार ने इस प्रस्ताव पर फैसला नहीं लिया है लेकिन इसी दौरान, सरकार ने 23 अप्रैल, 1993 की अपनी, काम नहीं वेतन नहीं, की नीति को दोहराने का एलान कर दिया है, जिसके तहत अब राज्य के सरकारी कर्मचारी अगर स्टे-इन-स्ट्राइक या टूल डाउन स्ट्राइक पर जाते हैं तो उसे हड़ताल ही माना जाएगा और हड़ताल की अवधि को बिना वेतन छुट्टी माना जाएगा। हालांकि इस अवधि के लिए सरकार कर्मचारियों की सेवा में कोई ब्रेक नहीं जोड़ेगी। वार्षिक प्रमोशन और दक्षता स्टैप-अप की तिथि को बिना वेतन छुट्टी के हिसाब से आगे बढ़ा दिया जाएगा।
इससे पहले, वित्त विभाग ने मोबाइल भत्ते में कटौती का जो प्रस्ताव सरकार को दिया है, उसके तहत, क्लास ए के अधिकारियों-कर्मचारियों को मिल रहे 500 रुपये के मासिक भत्ते को घटाकर 200 रुपये करने, क्लास बी अधिकारियों-कर्मचारियों को मिल रहे 300 रुपये मासिक भत्ते को घटाकर 175 रुपये करने, क्लास सी कर्मचारियों का 250 रुपये का मासिक भत्ता घटाकर 150 रुपये करने और क्लास डी कर्मचारियों का मासिक मोबाइल भत्ता 250 रुपये से घटाकर 100 रुपये करने का प्रस्ताव है। वित्त विभाग का कहना है कि इस कटौती से सरकार को हर साल 45 करोड़ रुपये की बचत होगी। इस मद में राज्य सरकार को हर साल 101.10 करोड़ रुपये देने पड़ रहे हैं।
लोकतंत्र में कर्मचारियों को अपनी बात कहने का हक है: खैरा
हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों का वेतन काटने संबंधी फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए पंजाब सिविल सचिवालय के कर्मचारियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के नेता सुखचैन सिंह खैरा ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है और अगर कर्मचारियों की बात नहीं सुनी जाती तभी हड़ताल जैसे कदम उठाए जाते हैं, जिनका कर्मचारियों को अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों को दबाव बनाने की साजिश रच रही है जबकि कर्मचारियों की बकाया डीए जैसी लंबित मांगों को पूरा करने पर विचार नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि सरकार के फैसलों पर 8 जनवरी के बाद कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।