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वित्तीय संकट का असरः स्ट्रीट लाइटों का बिल भरने में असमर्थ चंडीगढ़ निगम, सड़कें भी प्रशासन को सौंपने की तैयारी

Wed, 19 Feb 2025 03:36 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 19 Feb 2025 03:36 PM IST
सार

मेयर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि निगम बिजली के बिलों पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च कर रहा है। स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत और बिलों पर भी काफी पैसा लगता है। वह 21 जनवरी को पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के साथ होने वाली बैठक यह मुद्दा उठाएंगी और वी3 सड़क और स्ट्रीट लाइट्स को प्रशासन को देने की मांग करेंगी।

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financial crisis Chandigarh Municipal Corporation bill of street lights administration
चंडीगढ़ नगर निगम - फोटो : फाइल

विस्तार

वित्तीय संकट से जूझ रहे चंडीगढ़ नगर निगम की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल भरना भी मुश्किल हो रहा है। खर्चों में कटौती के लिए निगम ने सेक्टरों को विभाजित करने वाली वी3 सड़कों की मरम्मत और स्ट्रीट लाइटों की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। चार डिस्पेंसरियों को भी प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग को देने का सुझाव दिया गया है।
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नगर निगम के अधिकारियों का मानना है कि अगर वी3 सड़कों का जिम्मा प्रशासन को दे दिया जाए, तो उन्हें सड़कों की मरम्मत में करीब 25 करोड़ रुपये की बचत होगी। वर्तमान में निगम ने करीब 267 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत और निर्माण के लिए करीब 54 करोड़ का एस्टीमेट बनाया है लेकिन पैसे नहीं होने की वजह से काम अधर में लटका हुआ है। इसमें भी 40-45 फीसदी वी3 की सड़कें हैं। 
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मेयर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि निगम बिजली के बिलों पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च कर रहा है। स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत और बिलों पर भी काफी पैसा लगता है। वह 21 जनवरी को पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के साथ होने वाली बैठक यह मुद्दा उठाएंगी और वी3 सड़क और स्ट्रीट लाइट्स को प्रशासन को देने की मांग करेंगी। अगर ऐसा हो जाता है कि निगम को राहत मिलेगी और काफी पैसों की भी बचत होगी, जिससे शहर के अन्य विकास कार्यों को पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रशासन को पत्र भी लिखा जाएगा।
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निगम ने नहीं दिए पैसे, कंपनी ने बंद किया काम

नगर निगम के पास शहर की करीब 45 हजार स्ट्रीट लाइटों का जिम्मा है। इसके अलावा करीब साढ़े 15 हजार गार्डन लाइटें भी हैं। निगम ने स्ट्रीट लाइट्स के रखरखाव का काम ईईएसएल (एनर्जी एफ्फिसिएंट सर्विस एलटीडी) कंपनी को दिया था। लेकिन कंपनी ने अपना टर्म पूरा होने से पहले ही निगम को यह नोटिस दे दिया है कि वह आगे काम नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि उनके पैसों का भुगतान नहीं किया है। सेवाओं में कमी का होने का हवाला देकर निगम ने उनके अप्रैल से ही पैसे रोके हुए हैं। जिसकी वजह से कंपनी ने काम बंद कर दिया है। इससे निगम की परेशानी बढ़ी हुई है।

चार डिस्पेंसरियां को स्वास्थ्य विभाग को देने का सुझाव, हर साल दो करोड़ हो रहे खर्च

नगर निगम वर्तमान में चार डिस्पेंसरियों को चला रहा है। इन पर हर साल दो करोड़ रुपये खर्च होते हैं। कांग्रेस के पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने सवाल उठाया है कि निगम के पास डिस्पेंसरी चलाने की कोई एक्सपर्टीज नहीं है। ऐसे में वह क्यों चला रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन्हें प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग को दे देना चाहिए। मेयर हरप्रीत कौर बबला ने भी इस पर सहमति जताई है। यह चार डिस्पेंसरियां सेक्टर-39, 49, 50 और 52 में हैं। निगम ने अलग-अलग वर्षों में इनका निर्माण किया था। इस वजह से वह खुद ही इन्हें चला रहे हैं। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि यहां डॉक्टर
पीजीआई और स्वास्थ्य विभाग से लगाए गए हैं लेकिन निगम के भी कई कर्मी काम करते हैं।

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