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मानवता: हिंसा पीड़ित महिलाओं के दर्द को समझा अपना, चंडीगढ़ की महिला वकीलों ने निशुल्क केस लड़कर दिया सहारा
Thu, 08 Jul 2021 06:09 PM IST
निवेदिता वर्मा
मोनिका नागर, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
मोनिका नागर, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 08 Jul 2021 06:09 PM IST
सार
घरेलू हिंसा और अन्य प्रताड़नाओं की शिकार महिलाएं जब कमजोर आर्थिक स्थिति का सामना करती हैं तो और कमजोर पड़ने लगती हैं। ऐसे में चंडीगढ़ की कुछ महिला वकीलों ने उन्हें न्याय दिलाने के लिए कदम बढ़ाया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ में आए दिन घरेलू हिंसा, दुष्कर्म, अपहरण आदि की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कुछ महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण आवाज नहीं उठा पाती हैं। ऐसी पीड़िताओं के दर्द को जिला अदालत की महिला वकीलों ने अपना समझा। उनका निशुल्क केस लड़कर सहारा दिया। इसके अलावा वकीलों ने मानसिक रूप से प्रताड़ित पीड़िताओं को कानूनी सलाह के साथ उनकी काउंसलिंग भी की। महिला वकीलों ने कहा कि कोई महिला जब हिंसा का शिकार होती है तो मानसिक तौर पर अकेली हो जाती है। आर्थिक समस्याओं के कारण बहुत सी महिलाओं के मामले दबे रह जाते हैं। एक महिला के दर्द को समझना ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है। इससे मन को बड़ी शांति मिलती है।
2500 पीड़िताओं की कर चुकी हूं सहायता
ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन फॉर्म और दलित राइट्स प्रोटेक्शन फोरम दोनों संगठनों की मैं संस्थापक हूं। यह संगठन गरीब लोगों की सहायता के लिए कार्य करता है। 2004 से अब तक लगभग 2500 पीड़ितों की कानूनी सहायता कर चुकी हूं। इन पीड़ितों में घरेलू हिंसा और दुष्कर्म से पीड़ित ज्यादा महिलाएं शामिल रहीं। इन मामलों में पीड़िताओं और महिला वकीलों के सामने काफी चुनौतियां होती हैं। -पुष्पा सलारिया, जिला अदालत
12-12 घंटे करनी पड़ती है काउंसिलिंग
महिला प्रशिक्षण संस्थान एनजीओ से 2014 में जुड़ी थी। यह संस्था महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए कार्य करती है। हम महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए सिलाई, कढ़ाई और ब्यूटीशियन कोर्स उपलब्ध कराते हैं, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सकें। वकील होने के नाते मैं अब तक ढाई सौ घरेलू हिंसा की महिलाओं की सहायता कर चुकी हूं। लॉकडाउन के दौरान इतने मामले आए कि 12 घंटे तक काउंसिलिंग करनी पड़ी। -गीतांजलि वाधवा, जिला अदालत
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अब तक 15 महिलाओं की कर चुकी हूं सहायता
ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन फोरम में कानूनी सलाह देने का काम करती हूं। जो गरीब बच्चे और महिलाएं वकील नहीं कर सकते, ऐसे पीड़ित लोगों की सहायता के लिए मैं चार साल से काम कर रही हूं। मेरे पास अब तक गुजारा भत्ता और घरेलू हिंसा के मामले ज्यादा हैं। मैं 15 मामलों में महिलाओं की सहायता कर चुकी हूं। इसके अलावा लॉकडाउन में भी लोगों को खाना पहुंचाने का काम किया। -ज्योति मेहता, जिला अदालत
बच्चों की पढ़ाई पर करती हूं सहायता
मैंने 2018 में अपनी वकालत पूरी की है। उसके बाद से ही एनजीओ के साथ मिलकर बच्चों को शिक्षा देने में सहायता कर रही हूं। जिस भी बच्चे को पढ़ाई के लिए सहायता की जरूरत होती है उसे देते हैं। मैं युवा स्तंभ संस्था से जुड़ी हुई हूं जो जरूरतमंद बच्चों को किताबें, कपड़े, जरूरत का सामान और महिलाओं को सेनेटरी पैड जैसी सहायता उपलब्ध कराते हैं। -रोशनी, जिला अदालत
केस नंबर 1
वकील पुष्पा सलारिया ने बताया कि एक अनुसूचित जाति की लड़की का अपहरण कर उसका दुष्कर्म किया गया था। इसमें दो आरोपी शामिल थे। जहां पर पीड़िता नौकरी करती थी, वहीं पर ये दोनों आरोपी भी काम करते थे। दोनों आरोपियों के बचाव में बड़े-बड़े नेता सामने आ रहे थे। उस समय आरोपियों को गिरफ्तार कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। उसके बाद आरोपियों को सजा दिलाकर पीड़िता को इंसाफ भी दिलाया गया था।
केस नंबर 2
गीताजंलि वाधवा ने बताया कि एक महिला की लगातार तीन बेटियां हुईं। इस वजह से उसके पति ने उसे घर से निकाल दिया। अब वह महिला मां के पास रहती है। उसकी मां घर-घर में बर्तन साफ कर उनका गुजारा कर रही है। पीड़िता का कहना है कि वह इतनी छोटी बच्चियों को छोड़कर कहीं कमाने नहीं जा सकती। अब आरोपी पति के खिलाफ अदालत में केस चल रहा है।
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2500 पीड़िताओं की कर चुकी हूं सहायता
ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन फॉर्म और दलित राइट्स प्रोटेक्शन फोरम दोनों संगठनों की मैं संस्थापक हूं। यह संगठन गरीब लोगों की सहायता के लिए कार्य करता है। 2004 से अब तक लगभग 2500 पीड़ितों की कानूनी सहायता कर चुकी हूं। इन पीड़ितों में घरेलू हिंसा और दुष्कर्म से पीड़ित ज्यादा महिलाएं शामिल रहीं। इन मामलों में पीड़िताओं और महिला वकीलों के सामने काफी चुनौतियां होती हैं। -पुष्पा सलारिया, जिला अदालत
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12-12 घंटे करनी पड़ती है काउंसिलिंग
महिला प्रशिक्षण संस्थान एनजीओ से 2014 में जुड़ी थी। यह संस्था महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए कार्य करती है। हम महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए सिलाई, कढ़ाई और ब्यूटीशियन कोर्स उपलब्ध कराते हैं, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सकें। वकील होने के नाते मैं अब तक ढाई सौ घरेलू हिंसा की महिलाओं की सहायता कर चुकी हूं। लॉकडाउन के दौरान इतने मामले आए कि 12 घंटे तक काउंसिलिंग करनी पड़ी। -गीतांजलि वाधवा, जिला अदालत
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अब तक 15 महिलाओं की कर चुकी हूं सहायता
ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन फोरम में कानूनी सलाह देने का काम करती हूं। जो गरीब बच्चे और महिलाएं वकील नहीं कर सकते, ऐसे पीड़ित लोगों की सहायता के लिए मैं चार साल से काम कर रही हूं। मेरे पास अब तक गुजारा भत्ता और घरेलू हिंसा के मामले ज्यादा हैं। मैं 15 मामलों में महिलाओं की सहायता कर चुकी हूं। इसके अलावा लॉकडाउन में भी लोगों को खाना पहुंचाने का काम किया। -ज्योति मेहता, जिला अदालत
बच्चों की पढ़ाई पर करती हूं सहायता
मैंने 2018 में अपनी वकालत पूरी की है। उसके बाद से ही एनजीओ के साथ मिलकर बच्चों को शिक्षा देने में सहायता कर रही हूं। जिस भी बच्चे को पढ़ाई के लिए सहायता की जरूरत होती है उसे देते हैं। मैं युवा स्तंभ संस्था से जुड़ी हुई हूं जो जरूरतमंद बच्चों को किताबें, कपड़े, जरूरत का सामान और महिलाओं को सेनेटरी पैड जैसी सहायता उपलब्ध कराते हैं। -रोशनी, जिला अदालत
केस नंबर 1
वकील पुष्पा सलारिया ने बताया कि एक अनुसूचित जाति की लड़की का अपहरण कर उसका दुष्कर्म किया गया था। इसमें दो आरोपी शामिल थे। जहां पर पीड़िता नौकरी करती थी, वहीं पर ये दोनों आरोपी भी काम करते थे। दोनों आरोपियों के बचाव में बड़े-बड़े नेता सामने आ रहे थे। उस समय आरोपियों को गिरफ्तार कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। उसके बाद आरोपियों को सजा दिलाकर पीड़िता को इंसाफ भी दिलाया गया था।
केस नंबर 2
गीताजंलि वाधवा ने बताया कि एक महिला की लगातार तीन बेटियां हुईं। इस वजह से उसके पति ने उसे घर से निकाल दिया। अब वह महिला मां के पास रहती है। उसकी मां घर-घर में बर्तन साफ कर उनका गुजारा कर रही है। पीड़िता का कहना है कि वह इतनी छोटी बच्चियों को छोड़कर कहीं कमाने नहीं जा सकती। अब आरोपी पति के खिलाफ अदालत में केस चल रहा है।