{"_id":"8c4c18be4f083254bef30fb48bf0087b","slug":"father-mother-children-day-at-bal-bhawan","type":"story","status":"publish","title_hn":"'मां-बाप की सेवा करना इंसान का परम कर्तव्य है'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'मां-बाप की सेवा करना इंसान का परम कर्तव्य है'
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 19 Jan 2014 12:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेक्टर-23 स्थित बाल भवन में माता-पिता को समर्पित ‘मात-पिता संतान दिवस’ का आयोजन किया गया। इसका आयोजन डॉ. खेड़ाज़ इंस्टीट्यूट की ओर से किया गया।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज एसएन अग्रवाल कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। इस मौके पर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. विनोद खेड़ा ने कहा कि मां-बाप हमारे पहले गुरु होते हैं, इसलिए उनका सबसे बड़ा फर्ज है हमें अच्छे तरीके और संस्कारों वाले माहौल में परवरिश देना।
वहीं हमारा कर्तव्य है उनकी नित्य सेवा करना। पर वक्त बदलने के साथ मां-बाप और बच्चों के बीच का यह रिश्ता कड़वा होता जा रहा है जो समाज और देश के लिए दु:खद परिणाम भी लेकर आता है।
डॉ. खेड़ा ने कहा कि समाज में अनुरूपता लाने पर जो पेरेंट्स और बच्चों के रिश्ते को मजबूत करके ही मुमकिन हो सकता है।
कार्यक्रम में ‘माता’ और ‘पिता’ पर आधारित प्रासंगिक कविताओं के अलावा इंस्टाट्यूट के स्टूडेंट्स ने दिल को छू जाने वाले गाने भी गाए जिन्हें सुनकर कई लोगों की आंखें भर आईं। ‘मां-बाप का दिल न तुम यूं दुखाओ’, ‘माता-पिता की सेवा दिल से किया करेंगे’ और ‘मां प्यारी मां, गोद में तेरी खेला बचपन मेरा’, ये सब गाने स्टूडेंट्स ने गाकर माहौल को और खुशनुमा कर दिया।
विज्ञापन
वन-एक्ट प्ले ‘मॉडर्न श्रवण कुमार’ भी पेश किया गया जिसमें वर्तमान में बच्चों और पेरेंट्स के रिश्ते को दिखाया गया। इस नाटक में अपने मां-बाप की तरफ दुर्व्यवहार को लेकर हर बच्चे ने दु:ख प्रकट किया और कसम खाई कि भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं करेंगे। इस नाटक को अभिषेक ने डायरेक्ट किया था।
मुख्य अतिथि एसएन अग्रवाल ने कहा कि मां-बाप को शुरुआत से ही बच्चों को सही निर्देशन देना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि पेरेंट्स को अपना कीमती समय बच्चों के नाम करना चाहिए ताकि वे बेहतर इंसान बन सकें।
विज्ञापन
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज एसएन अग्रवाल कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। इस मौके पर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. विनोद खेड़ा ने कहा कि मां-बाप हमारे पहले गुरु होते हैं, इसलिए उनका सबसे बड़ा फर्ज है हमें अच्छे तरीके और संस्कारों वाले माहौल में परवरिश देना।
वहीं हमारा कर्तव्य है उनकी नित्य सेवा करना। पर वक्त बदलने के साथ मां-बाप और बच्चों के बीच का यह रिश्ता कड़वा होता जा रहा है जो समाज और देश के लिए दु:खद परिणाम भी लेकर आता है।
विज्ञापन
डॉ. खेड़ा ने कहा कि समाज में अनुरूपता लाने पर जो पेरेंट्स और बच्चों के रिश्ते को मजबूत करके ही मुमकिन हो सकता है।
कार्यक्रम में ‘माता’ और ‘पिता’ पर आधारित प्रासंगिक कविताओं के अलावा इंस्टाट्यूट के स्टूडेंट्स ने दिल को छू जाने वाले गाने भी गाए जिन्हें सुनकर कई लोगों की आंखें भर आईं। ‘मां-बाप का दिल न तुम यूं दुखाओ’, ‘माता-पिता की सेवा दिल से किया करेंगे’ और ‘मां प्यारी मां, गोद में तेरी खेला बचपन मेरा’, ये सब गाने स्टूडेंट्स ने गाकर माहौल को और खुशनुमा कर दिया।
विज्ञापन
वन-एक्ट प्ले ‘मॉडर्न श्रवण कुमार’ भी पेश किया गया जिसमें वर्तमान में बच्चों और पेरेंट्स के रिश्ते को दिखाया गया। इस नाटक में अपने मां-बाप की तरफ दुर्व्यवहार को लेकर हर बच्चे ने दु:ख प्रकट किया और कसम खाई कि भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं करेंगे। इस नाटक को अभिषेक ने डायरेक्ट किया था।
मुख्य अतिथि एसएन अग्रवाल ने कहा कि मां-बाप को शुरुआत से ही बच्चों को सही निर्देशन देना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि पेरेंट्स को अपना कीमती समय बच्चों के नाम करना चाहिए ताकि वे बेहतर इंसान बन सकें।